देश को जरूरत है केजरीवाल जैसे पगलेट नेता की !

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हर इलाके यानि धंधे के चोर, कुकर्मी, दलाल, हरामी, भ्रष्ट, पतित, अनैतिक, अनाचारी लोग मीडिया में घुस कर मालिक बन गए हैं… ये उन्हीं लोगों को अपना नौकर बनाते हैं और नौकरी में आगे बढ़ाते हैं जो इनके कुकर्मों को ढंक-तोप कर पैसा बनाने और अनैतिक साम्राज्य को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं.. केजरीवाल ने कोई गलत नहीं गरियाया है.. भड़ास तो छह साल से इन चोरों से लड़ रहा है और गरिया रहा है…

arvindइस देश को सच में केजरीवाल जैसे पगलेट नेता की ही जरूरत है जो हर सच का बेबाकी से खुलासा कर देता है… जो लोग कार्पोरेट मीडिया का नमक खा कर अपना और अपने परिजनों का पेट पाल रहे हैं और पेट की नैतिकता को दुनिया की सबसे बड़ी नैतिकता सगर्व मानते हैं, उन्हें तो केजरीवाल के बयान से न सिर्फ मिर्ची लगेगी बल्कि मिर्ची की तीखी चीत्कार से मुंह नाक कान से धुआं भी निकलेगा.. हां, उन लोगों को बहुत संतोष मिला है जिन्हें ये लगता था कि मीडिया का दिनों दिन भयानक पतन हो रहा है, इसे किसी भी तरह रोका नहीं जा रहा है और इस पतन की बात को जनता तक पहुंचाया भी नहीं जा रहा है… आज केजरीवाल एंड कंपनी के मीडिया पर सीधे आरोपों और उस पर मीडिया में हुई चीख-चिल्लाहट-बहस से जनता के पास यह बात अच्छे से पहुंच गई है कि मीडिया वाले भी चोर होते हैं, पैसे लेकर खबरें चलाते हैं और पैसे लेकर ही नेताओं की हवा बनाते हैं…

जो लोग ये तर्क दे रहे हैं कि केजरीवाल को मीडिया ने हीरो बनाया तो वो ये जान लें कि मीडिया ने हीरो नहीं बनाया बल्कि केजरीवाल को जनता सबसे ज्यादा देखना चाहती है और इसी चाहत को टीआरपी में तब्दील करने की मंशा के चलते मीडिया वाले केजरीवाल को अच्छा या बुरा बनाकर लगातार दिखाते रहते हैं… खासकर टीवी मीडिया में टीआरपी नामक जो कुत्ती चीज होती है, जिसने तमाम संपादकों को नैतिकता के लिहाज से नपुंसक बना दिया या फिर सरोकारी पत्रकार से फिल्मी कलाकार में तब्दील कर दिया, उसने मीडिया मालिकों को भी पागल कर रखा है. वे टीआरपी चार्ट में एक दूसरे की पछाड़ने की होड़ में जुटे रहते हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा टीआरपी के बल पर ज्यादा से ज्यादा एड रिवेन्यू अपने चैनल की तरफ कनवर्ट कर सकें… इसी टीआरपीखोर शातिर मंशा के कारण ये लोग पहले अन्ना फिर केजरीवाल को बंपर कवरेज देने को मजबूर हुए….

उन दिनों जब कम्युनिस्ट अपने लगातर पराभव के कारण मीडिया से बाहर किए जा चुके थे और कांग्रेस-भाजपा और अन्य क्षेत्रीय सत्ताधारी पार्टियों की राजनीतिक सांठगांठ ने घपलों, घोटालों, सिस्टम, आर्थि नीतियों, कार्पोरेट सांठगांठ आदि पर अंदरखाने एकजुट राय कायम कर ली थी, पूरे देश की त्राहि त्राहि, आम जन की पीड़ा को आवाज देने का माध्यम बन गए अरविंद केजरीवाल. सो, वो देखते ही देखते सबसे ज्यादा देखे, पढ़े जाने वाले जीव बन गए. देखते ही देखते सड़ी हुई घटिया राजनीति अचानक बहस, विमर्श के केंद्र में आ गई. अचानक ही ढेर सारे घपलों, घोटालों पर चर्चा होने लगी. यह सब इसलिए क्योंकि राजनीति और सत्ता के कांग्रेस-भाजपा व अन्य सत्ताधारी क्षेत्रीय पार्टियों के सामंती इलाके में एक अनजाना जीव घुसकर वहां का पूरा का पूरा सूरतेहाल हूबहू वही बयान करने लगा जैसा देखा. सो, जनता ने केजरीवाल में नायक देखा और देख रही है. ये नायक ही कह सकता है कि मीडिया का एक बड़ा हिस्सा चोर है, जेल भेजे जाने लायक है.

इन कार्पोरेट मीडिया के चोरों, दागियों, दल्लों को यह नहीं कहना चाहिए कि उन्होंने केजरीवाल को अपने चैनलों पर दिखाकर कोई एहसान किया.. बल्कि उन्हें केजरीवाल को धन्यवाद कहना चाहिए कि वे सड़ रही राजनीति और बंद पड़े कुंद समाज में बिलकुल ताजी हवा की तरह आए जिसके कारण न्यूज चैनलों के उबासी मारते बुलेटिन में ताजगी, दर्शनीयता आ सकी… केजरीवाल अगर पाद दें तो उसे ग्लोबल वार्मिंग बताने को तैयार बैठे मीडिया वालों को खुद सोचना चाहिए कि उनके यहां जब सुधीर चौधरी जैसा चोर और दीपक चौरसिया जैसा दलाल एडिटर इन चीफ बना बैठा हो तो उन्हें दूसरों को उपदेश देना कितना नैतिक है.

दीपक चौरसिया और सुधीर चौधरी को पहले दिन से ही एजेंडा साफ है. वो है आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल का विरोध करना. इन दोनों दागी पत्रकारों के न्यूज चैनलों पर आम आदमी पार्टी के नेताओं ने लाइव कार्यक्रम के दौरान ही इन दोनों की औकात याद दिला दी थी. दीपक चौरसिया को बता दिया था कि वो कांग्रेसी विधायक की गोद में बैठकर एजेंडे के तहत आम आदमी पार्टी को निपटा रहा है और सुधीर चौधरी को बता दिया था कि जो खुद खबर न दिखाने के लिए पैसे मांगने जैसे अपराध में फंसे हों उनके मुंह से नैतिकता की बात अच्छी नहीं लगती. दोस्तों, कोई परंपरागत नेता या कोई परंपरागत पार्टी मीडिया से पंगा नहीं ले सकती क्योंकि एक तो उन्हें अपने काले साम्राज्य का बचाव करना है, दूसरे मीडिया से फेवर लेकर अपना प्रचार करना करवाना है। 

मीडिया से पंगा वही ले सकता है जो सच में नंगा हो. यानि सच में फकीर हो. भड़ास चलाते हुए मेरे छह साल के अनुभव ये बताते हैं कि मीडिया जितना चोर, शातिर, हरामी और अवसरवादी कोई अन्य धंधा नहीं है. यहां जो दिखता है तो वो होता नहीं. जो होता है वो दिखता नहीं. आपको पता होगा ही कि मीडिया के स्याह सफेद का लगातार खुलासा Bhadas4Media.com के माध्यम से करने के कारण कई मीडिया हाउसों ने मिलकर मुझे न सिर्फ जेल भिजवाया बल्कि जमानत न होने देने की पूरी व्यवस्था कराई ताकि हम लोग टूट जाएं. बाद में मेरे कंटेंट एडिटर को भी गिरफ्तार कराकर जेल भिजवा दिया. फर्जी कहानियां चैनलों अखबारों में छपवाई दिखाई गई. परंतु हम लोगों ने मीडिया के काले कारनामों का खुलासा करना बंद नहीं किया बल्कि इसे और बढ़ा दिया है.

अरविंद केजरीवाल ने मीडिया को आइना दिखाकर एक बड़ा और नेक काम किया है. जिस मीडिया को तेल लगाना लोग मजबूरी मानते-समझते थे, उसे उसकी असली औकात बताकर अरविंद केजरीवाल ने एक तरह से दलाल और कार्पोरेट मीडिया के प्रति जनता के अविश्वास को अभिव्यक्त किया है और न्यू मीडिया पर भरोसे का इजहार किया है. हम सभी न्यू मीडिया और सोशल मीडिया वालों को आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल के इस कार्पोरेट मीडिया विरोधी लड़ाई का स्वागत करना चाहिए और मीडिया के शुद्धीकरण के लिए मीडिया के अंदर के दलालों को चिन्हिंत कर उन्हें बेनकाब और नंगा करना चाहिए. ध्यान रखिए, आज यही वक्त है जब मीडिया की ब्लैक शीप्स को पहचान कर अलग-थलग किया जा सकता है.. अगर ऐसा नहीं किया गया तो कुकर्मी, दागी, दलाल ही हमारे आपके एडिटर इन चीफ होंगे और हम सबकी नियति बाजारू और चीप किस्म के मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव में तब्दील हो जाने की होगी…

आखिर में यह बताना चाहूंगा कि रजत शर्माओं (इंडिया टीवी) और विनीत जैनों (टाइम्स नाऊ और टाइम्स आफ इंडिया) के आर्थिक हित भाजपा और कांग्रेस में ही सधेंगे. इनके पेट बड़े हैं. इन्हें अरबों खरबों का पैकेज चाहिए. और, यह देने की ताकत सिर्फ भाजपा या कांग्रेस में है. कांग्रेस कई पारी खेल चुकी है. भाजपा की बारी है और पीछे पैसे लिए सेठों की ढेर सारी तैयारी है. इसलिए ये लोग अगर मोदी की हवा बनाते दिख रहे हैं और केजरीवाल फैक्टर को डायलूट करने में लगे हुए हैं तो ये अपने पेड न्यूज वाले डील के तहत कर रहे हैं और करेंगे. जिस इंडिया टीवी का इतिहास बड़े बड़ों को ब्लैकमेल कर पैसा ऐंठने का रहा हो और जिस टाइम्स नाऊ व टाइम्स आफ इंडिया का इतिहास कंपनियों व नेताओं से बड़े एकमुश्त पैसे लेकर आफेंसिव पेड न्यूज कंपेन चलाने का रहा हो उनसे हम यह उम्मीद नहीं कर सकते कि वो हजारों करोड़ रुपये के इस आम चुनाव में बिना पैसे, बिना फेवर लिए किसी सड़क छाप पगलेट केजरीवाल की अच्छाई बयान करेंगे.. ये लोग जो कर रहे हैं, अपने एजेंडे व अपने निजी हितों के तहत कर रहे हैं और केजीरवाल इन चोरों पर जो हमला कर रहा है वह आम जन, आम आदमी के हितों का प्रतिनिधित्व करते हुए कर रहा है… मेरी नजर में अरविंद केजरीवाल की इज्जत आज से और बढ़ गई है…

……भड़ास4मीडिया के संस्थापक-संपादक यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से

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One comment

  1. तो अन्ना की क्या जरुरत थी ? पगलेट है तो अपनी बीबी को इस्तीफा क्यों नहीं दिलवाता और आन्दोलन में लाता है. बच्चो को आम आदमी के स्कुल में क्यों नहीं पढाता ? काइया , धूर्त और मकार है सिअईए इसका उपयोग कर रही है.

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