ब्लैकमेलिंग की मोड़ पर फिर ठिठका झारखंड

Share Button

आज झारखंड में राजनीति अजीब मोड़ पर है। झूठ, फरेब, छल, प्रपंच और ब्लैकमेलिंग इसके मुख्य तत्व बन गये हैं। राज्य के भाजपाई सीएम अर्जुन मुंडा का तो और भी सानी है। यहां की पूरी राजनीतिक व्यवस्था को मात्र कयासों के भंवरजाल में उलझा रखा है। इसका सीधा कुअसर समूचे प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ रहा है। 

फिलहाल एक बड़ा सबाल उभर कर सामने आया है कि भाजपा के अर्जुन मुंडा और झामुमो के शिबू सोरेन के बीच सफेद झूठ कौन बोल रहा है। मुंडा जहां मुख्यमंत्री हैं वहीं, सोरेन उनकी सरकार समन्वय समिति के अध्यक्ष। और तो और श्री सोरेन की झामुमो पार्टी के बगैर समर्थन के  भाजपा नीत मुंडा सरकार एक पल टिक भी नहीं सकती।

इधर मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने गुजरात में चौथी बार सीएम की कुर्सी संभाल रहे भाजपा के नरेन्द्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने जाने के पूर्व कहा कि 28-28 माह प्रकरण को लेकर वे 29 दिसंबर को सरकार समन्वय समिति की बैठक में सब कुछ स्पष्ट करेगें। पिछले महीने उन्होंने   अमेरिका जाने से पहले कहा था कि वे इन सबालों का जबाब समय आने पर उचित प्लेटफार्म पर देगें। 

हालांकि इस दौरान कारपोरेट घरानों के बल उछल रहे मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा यह भूल रहे हैं कि आखिर  झामुमो सुप्रीमों शिबू सोरेन की अध्यक्षता वाली सरकार समन्वय समिति से इतर उनका उचित प्लेटफार्म कहां है। कहीं ऐसी बात तो नहीं है कि मुंडा सरकार के गठन के पीछे कोई तीसरा प्लेटफार्म  भी है ? जिसकी चर्चा राजनीतिक गलियारों में खुल्लेआम हो रही है। जिसे लोग ” जिंरग ”  की संज्ञा देते हैं। इसी ” जिंरग ” का कमाल है कि झामुमो केंद्र में कांग्रेस के साथ तो प्रदेश में भाजपा के साथ गलबहियां डाले है। 

कितनी बड़ी हास्यास्पद स्थिति है कि मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के अनुसार 28 दिसंबर को सरकार समन्वय समिति की बैठक होगी। दूसरी तरफ झामुमो के शिबू सोरेन कहते हैं कि वे सरकार समन्वय समिति के अध्यक्ष हैं। इसकी बैठक बुलाने से संबंधित मुख्यमंत्री से उनकी कोई बात नहीं हुई है। जब वे  बुलायेगें तो बैठक होगी।

श्री सोरेन का स्पष्ट कहना है कि भाजपा की मुंडा सरकार 28-28 महीने के समझौते पर चल रही है। निर्धारित 10 जनवरी तक सब कुछ आयने की तरह साफ हो जायेगा।

 बात कुछ भी हो लेकिन इतना तो तय है कि भाजपा की नियत साफ नहीं है और उसके मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा समूचे राज्य को बरगला रहे हैं, जो राजनीति के स्वच्छ संकेत नहीं दिखते। गुरु-चेला की इस तरह की मानसिक हौच-पौच ने समूची राजनीतिक व्यवस्था का ही बेड़ा गर्क कर रखा है। 

……………… मुकेश भारतीय

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

Related Post

One comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Loading...