जमशेदपुर ब्लड बैंक में करोड़ों की उगाही का धंधा

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जमशेदपुर ब्लड बैंक केवल कागज़ो पर देता है गरीबो को मुफ्त में रक्त , हर वर्ष 47 हज़ार बोतल मिलते है ब्लड बैंक को डोनेशन से ब्लड , प्रोसेसिंग फीस के नाम पर वसूले जाते है 600 रूपए। करोड़ों की होती है उगाही।

bloodजमशेदपुर ब्लड बैंक कागज़ी आंकड़ो पर हर वर्ष सात हज़ार 654 बोतल ब्लड गरीबो और थेलेसीमिया के मरीज़ो को मुफ्त उपलब्ध कराता है। साथ ही गरीब मरीज़ो से प्रति बोतल 250 रूपए लिय जाते है।

जबकि वास्तविकता कुछ और सामने आरही है । जमशेदपुर ब्लड बैंक को हर वर्ष 47 हज़ार बोतल ब्लड डोनेशन के माध्यम से आते है और उनमे ब्लड डोनेशन करने वाले अधिकाँश लोग ऐसे होते है, जो ब्लड डोनेशन करने के बाद अपना ब्लड वापस नहीं लेते है।

यदि किसी व्यक्ति को इमरजेंसी में ब्लड की आव्यशकता होती है तो उसे ब्लड बैंक बिना डोनर के किसी कीमत पर ब्लड नहीं देता है । इतना ही नहीं,  ब्लड डोनर के साथ प्रोसेसिंग फीस के रूप में 600 रूपए वसूले जाते है। ब्लड डोनेशन के बाद जो ब्लड, ब्लड बैंक को मिलते है वो ब्लड कहाँ जाते है, इसका कोई आंकड़ा पेश नहीं किया जाता है ।

ब्लड बैंक ने   एक वर्ष का अधिकारिक आंकड़ा जो पेश किया है, उसपर भी कई प्रश्न चिन्ह लगते है । हर वर्ष सात हज़ार 654 बोतल ब्लड गरीबों और थेलेसीमिया के मरीज़ो को मुफ्त उपलब्ध कराने की बात कही गई है। जबकि ब्लड बैंक में मौजूद लोगो से मिली जानकारी के अनुसार यह केवल कागज़ी आंकड़े है।

ब्लड बैंक के चेयरमैन  का कहना है कि प्रोसेसिंग फीस वो कर्मचारियो के वेतन के लिए लेते है। जबकि आंकड़े बताते है कि केवल प्रोसेसिंग फीस के नाम पर लगभग 3 करोड़ रूपए सालाना ब्लड बैंक दुआरा वसूले जाते है।

साथ ही ब्लड डोनेशन कैंप के माध्यम से प्राप्त होने वाले ब्लड का उपयोग ब्लड बैंक कैसे और कहाँ करता है, इसका उनके पास कोई जवाब नहीं। ब्लड बैंक का यह अवैध कारोबार वर्षो से समाज सेवा के नाम पर चलाया जा रहा है।

इस खेल में हज़ारो बोतल ब्लड को ब्लड बैंक कहाँ और कैसे उपयोग करता है,यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा। पर कुल मिलाकर समाज सेवा के नाम पर यह करोडो रूपए उगाही का ही खेल है, ऐसा कहा जाये तो यह गलत नहीं होगा।

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