जब डॉ. मिश्र ने महज इंदिरा जी को खुश करने के लिए इस बिल से देश में मचा दिया था तूफान

Share Button
Read Time:6 Minute, 0 Second

बिहार में वे कांग्रेस के आखिरी सीएम थे। उनके निधन के बाद  उनके कार्यों की चर्चा हो रही है। शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। लेकिन सीएम रहते हुए डॉ. जगन्नाथ मिश्र का एक फैसला ऐसा भी था जिसकी आलोचना देश भर में हुई……………..”

राजनामा.कॉम (जयप्रकाश नवीन)। बिहार के कदावर नेता और तीन बार सीएम रहे मुख्यमंत्री डॉ जगन्नाथ मिश्र हमारे बीच नहीं हैं। इमरजेंसी के दौरान पत्रकारिता पर सेंसरशिप की यादें बिसरी भी नहीं थी कि 1982 में उन्होंने बिहार विधानसभा में बिहार प्रेस बिल लाकर हंगामा मचा दिया था। इस बिल के आने से देश भर के पत्रकारों और बुद्धिजीवीओ में आक्रोश फैल गया। लोग सड़कों पर आ गए।

पटना की सड़कों पर पत्रकारों पर भी जमकर लाठियां चली। सारे अखबारों ने सांकेतिक हड़ताल कर दी थी। देश भर में लगभग दस हजार अखबार बिहार प्रेस बिल के खिलाफ एक दिन बंद रहा।

यह था बिहार प्रेस बिल: बिहार के तब के कदावर नेता और सीएम डॉ जगन्नाथ मिश्र ने 1982 में बिहार विधानसभा में बिहार प्रेस बिल पारित किया था।जिसमें भारतीय दंड संहिता में नई धारा 292 (ए)जोड़ा गया था और दंड प्रक्रिया संहिता में संशोधन किया गया था।

इस बिल के धारा 292 (ए) में कहा गया था कि “कोई घोर अशिष्ट या गंदी अथवा भयादोहन के लिए अशिष्ट तस्वीर अथवा मुद्रित या लिखित दस्तावेज किसी समाचार पत्र में छपाता है अथवा उसे सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित या वितरित करता है या करवाता है अथवा रखता है या किसी भी रीति से उसे परिचारित करता है तो वह अपराध होगा।”

ऐसा अपराध अनुसंज्ञेय और गैर जमानती अपराध होगा । इसके लिए पहली बार दो वर्ष तक की कैद या अर्थदंड या दोनों हो सकती है। दूसरे बार के अपराध पर अर्थ दंड के साथ पांच वर्ष की कैद या अर्थदंड नहीं देने पर अतिरिक्त कैद का उपबंध इस बिल में किया गया था।

चूकि बिल मूलतः हिंदी में लिखा गया था। इसलिए इसमें उल्लिखित “अशिष्ट और गंदे” शब्दों का अर्थ अंग्रेजी भाषा से ज्यादा व्यापक था। धारा 292(ए) के मामले में अवमानना की परिभाषा को भी दंड प्रक्रिया संहिता(बिहार संशोधन) बिल 1982 के द्वारा व्यापक बना दिया गया था।

इसके तहत कार्यकारी मजिस्ट्रेटों की भी गिरफ्तारी से लेकर सारी कार्रवाई के अधिकार प्रदान कर दिये गए थे। बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भी भेज दिया गया था।

लेकिन बिहार प्रेस बिल को लेकर मीडिया में उनकी छवि काफी खराब हो रही थी।जिसका आभास स्वयं डॉ मिश्र को भी था। अंततः उन्होंने एक साल के अंदर ही बिल को वापस ले लिया। जबकि बिहार प्रेस बिल राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए लंबित था।

कहा जाता है कि बिहार प्रेस बिल पारित होने को लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी काफी खुश थी। लेकिन उन्होंने इस बात का खंडन भी किया था कि प्रेस पर पाबंदी लगाने जैसी बात इस बिल में नहीं है

बिहार प्रेस बिल डॉ जगन्नाथ मिश्र की बड़ी भूल मानी जाती है। इस बिल के पहले मीडिया में डॉ. मिश्र की छवि काफी अच्छी मानी जाती थी। लेकिन डॉ मिश्र ने श्रीमती इंदिरा गाँधी को खुश करने के लिए बिल को लाए थे।

कहा जाता है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी और उनकी बहू मेनका गांधी के बीच रिश्ते में खटास बढ़ रही थी। अपने दिल्ली दौरे के दौरान प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी से मुलाकात के दौरान मिश्र ने उन्हें उदास देखा तो उन्होंने इस उदासी का कारण जानना चाहा। श्रीमती गांधी अपने और बहू के संबंधों के बारे में प्रकाशित खबरों से आहत थी।

श्रीमती गांधी ने ही डॉ. मिश्र से तमिलनाडु और उड़ीसा जैसे बिल बिहार में भी लाने की बात कह दी। उस समय के सूचना एवं प्रसारण मंत्री वसंत साठे ने इस बिल के बारे में उन्हें पूरी जानकारी दी।

31जूलाई 1982 को डॉ.जगन्नाथ मिश्र ने बिहार विधानसभा में बिहार प्रेस बिल पारित करवाया जिसकी काफी आलोचना हुई। बिहार से लेकर देश भर में इसका विरोध हुआ था।

0 0
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleppy
Sleppy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Share Button

Relate Newss:

रांची मीडिया कप में दिखी दैनिक भास्कर टीम की दबंगई
कटरा हादसे में मीडिया के हाथों मारी गई पायलट ने फेसबुक पर लिखा- जिंदा हूं मैं
सिर्फ गन्दी मानसिकता के कारण होता है रेप !
यूं उठा हर राज़ से पर्दा, लेकिन फैसला सुरक्षित, मामला राजगीर मलमास मेला सैरात भूमि का
IPS अमिताभ ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर हुईं BJP में शामिल
विनायक विजेता, अमिताभ, आशुतोष सहित कई पत्रकार सम्मानित
जया बच्चन ने खाया है गाय और सुअर का मांस :अमर सिंह
22 फरवरी को सीएम पद की शपथ लेगें नीतिश कुमार
सोनिया ने मोदी से पूछा, क्या हुआ तेरा वादा
यूं 'लेफ्ट' होना समस्या का हल नहीं है नालंदा के डीएम साहेब
ऐसे मुर्खों पर मुझे हंसी आती है : पुष्कर पुष्प
" झारखण्डी नृत्य की विविधता , उराँव जनजाति की महत्ता के साथ "
शत्रुघ्न सिन्हा का चुनाव प्रचार से दूर रखने का छलका का दर्द
अभिनेत्री से 'अम्मा' बनी जयललिता की हालत नाजुक
आलोक जी, भड़वे और दलाल हैं हम पत्रकार !
बिहार में भाजपा की लंका जलाने में मोदी-शाह के विभिषण प्रशांत की रही अहम भूमिका
भारत में बिना वेतन काम करेगें 'ग्रीनपीस इंडिया' कर्मी !
टीएन शेषण के निधन की उड़ी अफवाह, 2 केन्द्रीय मंत्री ने दे डाली श्रद्धांजलि  
दिल्ली और बिहार में भाजपा के हौसले की जमीनी हकीकत
भाजपा के बुजुर्गों के जरिये आरएसएस का मोदी-शाह की नकेल कसने की तैयारी
जेलबंद यशवंत के बचाव में सड़क पर उतरे सरयु-रघुवर
ABC ने समाचार पत्र-पत्रिकाओं भेजे ये कड़े निर्देश
बहुत कठिन है सहिष्णु होना श्रीमान
हाँ मैं झारखण्ड हूँ
राजग को 300 सीटें आ भी जाएं तो कैसे आईं, यह कौन बताएगा?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Loading...