चाऊ एन लाई द्वारा प्रदत्त बौद्ध ग्रंथ त्रिपिटक को देख अह्लादित हुए चीनी पत्रकार दल   

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नालंदा (राम विलास)। चीनी बौद्ध विद्वान व्हेनसांग के प्रदेश  लोयान्ग के  सात  सदस्यीय पत्रकारों के दल ने शुक्रवार को नालंदा के विरासतो का भ्रमण किया। प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नावशेष, ह्वेनसान्ग मेमोरियल हॉल और नव नालंदा महाविहार के ग्रंथागार का भी दीदार किया। नालंदा के विरासतों को देख कर चीनी पत्रकार बेहद प्रसन्नता थे।

उन्होंने प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के वैभवशाली इतिहास  की विस्तार से जानकारी ली। वह यह जानकर बेहद खुश थे कि चीनी विद्वान ह्वेनसांग इस महाविहार में 5 साल तक अध्ययन करने के बाद 1 साल तक आचार्य रहे थे।

उन्होंने नव नालंदा महाविहार के रजिस्ट्रार डॉक्टर सुनील प्रसाद सिन्हा से सवाल किया कि व्हेनसांग नालंदा क्यों आए थे? 

डॉक्टर सिन्हा ने चीन से आए दल को बताया कि भारतीय बौद्ध विद्वान कश्यप मतंग, परमार्थ, अमोध बज्र,  बुद्ध यश, कुमार जीव समेत अनेक  स्कॉलर चीन गए थे। भारतीय बौद्ध विद्वानों से प्रेरित होकर व्हेनसांग भारत और नालंदा  ज्ञान अर्जन के लिए नालंदा भारत  आए थे। व्हेनसांग मेमोरियल हॉल चीनी यात्री ह्वेनसान्ग की स्मृति में निर्मित व्हेनसांग मेमोरियल हॉल को उन्होंने चीन और भारत के मैत्री का प्रतीक बताया।

चीन से आए इन सदस्यों ने हाथ से निर्मित व्हेनसांग की प्रतिमा भी व्हेनसांग मेमोरियल हॉल में स्थापित किया।  डॉक्टर अशोक कुमार ने चीन से आए  दल को इसके बारे में विस्तार से बताया।  चीन से आया यह  दल  नव नालंदा महाविहार डीम्ड  विश्वविद्यालय के विशाल ग्रंथागार  को  देखकर  आश्चर्य चकित रह गए।  दल  ग्रंथागार  को देख कर बहुत खुश था।

उन सबों  ने उस चीनी त्रिपिटक नामक ग्रंथ को  देखा जिसे चीन के पूर्व प्रधानमंत्री चाऊ एन लाई ने महाविहार को प्रदान किया था। उन्होंने प्रज्ञापारमिता सूत्र,  विशुद्धि मग , स्वर्ण पत्र , भोजपत्र , ताम्रपत्र जैसी दुर्लभ ग्रंथों का दीदार किया।उन्होंने कहा ऐसे दुर्लभ ग्रंथ तो चीन में भी नहीं है। इन ग्रंथों को देखकर चीनी पत्रकारों ने कहा नालंदा आना उनका सार्थक हो गया।

चीनी पत्रकारों के दल ने नव नालंदा महाविहार के रजिस्टार डाक्टर सिन्हा से पूछा कि व्हेनसांग को भारत में किस लिए याद किया जाता है? 

डॉक्टर सिन्हा ने कहां कि व्हेनसांग की डायरी काफी महत्वपूर्ण है। यह डायरी भारत के पौराणिक इतिहास को याद दिलाता है। वह इतिहास और विज्ञान दोनों के स्रोत के रूप में जाना जाता है। इसीलिए भारत में ह्वेनसान्ग को याद किया जाता है। 

इस दल में फोटो जर्नलिस्ट सोसाइटी ऑफ चाइना के निदेशक जियो झुन ही,   यान्सी ब्रॉडकास्टिंग एण्ड टी वी स्टेशन आफ चाइना के वाइस प्रेसिडेंट जान्ग झियो झीन्ग,    लोयान्ग इवनिंग न्यूज़ के चीफ रिपोर्टर चीन्जी क्वी,  कैरियर एकेडमी हेनन के प्रोफेसर झेलिंग रेन एवं अन्य शामिल थे।

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