पुलिस अकर्मण्यता की हदः वे चाहे जो करें उनकी मर्जी !

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बात चाहे मानव तस्करी का हो या गो तस्करी का।  घटना डायन बिषाही का हो या लकड़ी तस्करी का। यही नहीं जब हम बात करते हैं नक्सली हिंसा या अन्य आपराधिक वारदातों की तो गुमला जिला हमेशा झारखण्ड में अव्वल रहा है।  इसका एक मात्र कारण जिले की पुलिस का सुस्त, स्वछंद और भ्रस्ट होना है। ,

gumla_sp (1)गुमला के पूर्व एसपी नरेन्द्र सिंह, जतिन नरवाल, राकेश बंसल, ने तो अपने भ्रस्ट आचरण से गुमला पुलिस की साख को बट्टा लगा दिया।  हर तरफ पुलिस की किरकिरी करा दी। उनके कार्यकाल में जिले का अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ता ही चला गया। नक्सलियों ओर अपराधियों का खुनी खेल चलता रहा और पुलिस अपना खेल खेलती रही ।

gumla_sp (2)पर बहुत दिनों के बाद गुमला को भीमसेन टूटी जैसा ईमानदार एवं कर्मठ एसपी मिला ,जिनके अथक प्रयासों से अपराध का ग्राफ तेजी से गिरा है।  पुलिस को कम नुकसान पर बड़ी सफलताएं हासिल हुई।

gumla_sp (3)एसएसपी पवन सिंह के कुशल नेतृत्व में चलाये गए नक्सल ऑपरेशनों में पुलिस को भारी सफलता मिली। पर इसी बीच एसपी भीमसेन टूटी का ट्रेनिग में चला जाना कई थानेदारों के लिए किसी लाट्री लगने से कम नहीं है।  

ये थानेदार अपनी मन मर्जी करने लगे।  थानों के थानेदार दिन रात पैसे की उगाही में लगे हुए हैं।  पैसा लेकर शातिर अपराधियों को छोड़ दिया जा रहा हैं। सरेआम अपराध करने वाले अपराधी पैसा देकर छूट जा रहे हैं।  

खासकर गुमला थाना अंतर्गत कई वारदातों में पुलिस की भारी किरकिरी हुई। मसलन चर्चित MMS  कांड हो या जाली नोट प्रकरण या फिर पंजाब आरा मशीन के पास कीमती लकड़ियों से भरा पकड़ा गया ट्रक।  इन सभी मामलों में पुलिस ने मोटी रकम लेकर असली अभियुक्तों को छोड़ दिया।  

कुछ दिन पहले गुमला में MMS कांड हुआ था, जिसमें शहर के एक लड़का और लड़की को जंगल में ले जाकर बुरी तरह मारा पीटा गया।  उनके साथ अभद्र वर्ताव किये गए तथा उनका वीडियो क्लिप तैयार कर फेसबुक ओर व्हाटसप पर वायरल कर दिया गया।

सभी लड़के लड़की के साथ गलत सम्बन्ध बनाना चाहते थे। पर लड़की के विरोध पर उसे बेरहमी से पिटाई भी की गयी।

इन लड़कों में ईट भठा संचालक श्यामलाल एवं संदीप का लड़का भी शामिल था।  जिसकी जानकारी पीड़िता नें खुद पुलिस को दी थी।पीड़िता के अनुसार इन लड़कों ने घटना का वीडियो क्लिप बनाया था। इसके बाद भी पुलिस ने इनको अभियुक्त नहीं बनाया।

कहते हैं कि इसके बदले पुलिस नें ईट भठा संचालकों से वरीय अफसरों के नाम पर २५ लाख रुपये लेकर आरोपियों को छुट्टा सांढ़ की तरह छोड़ दिया। (हमारे गुमला प्रतिनिधि से प्राप्त समाचार)

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