गया पार्लर कांड: CM नीतिश के बेटे को फंसाने की थी साजिश!

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मनीषा श्रीवास्तव निर्दोष है।  असली मुजरिम है मोहन श्रीवास्तव।  वेश्यालय संचालक गया नगर निगम के उप मेयर मोहन श्रीवास्तव को बचाने मे लगी पुलिस।

 राजनामा.कॉम। विगत  25  दिसंबंर की रात को गया शहर मे मसाज पार्लरो पर छापे के बाद वेश्याओं की गिरफ़तारी और  मसाज पार्लर स्वर्गलोक से गिरफ़तार एक वेश्या द्वारा उच्च अधिकारियो के नामो का खुलासा होते ही पुलिस अधिकारी सकते मे आ गये। उधर उक्त मसाज पार्लर के संचालक गया नगर निगम के उप मेयर मोहन श्रीवास्तव का नाम भी इस रैकेट को चलाने वालो मे सामने आया। रात भर बिहार के उच्चाधिकारी कोतवाली थाने मे मामले को दबाने के लिये फ़ोन से पैरवी करने मे लगे रहे । उनका प्रयास था कि सबसे पहले लडकियो को थाने से हटाया जाय ताकि उनका नाम न आये।

newsपुलिस ने  आनन फ़ानन मे लडकियो को छोड दिया और एक ग्राहक को पार्लर का मालिक बताकर मुकदमा दर्ज किया. आम जनता की आंखो मे धुल झोकने के लिये  एक नोटिस मसाज पार्लर पर चिपका दिया गया। देह व्यवसाय निवारण कानून  1956  की धारा  18  के तहत नोटिस का प्रावधान है जिसमे मकान मालिक को मकान खाली करने का  सात दिन का समय देना है तथा एक साल तक मकान किराये पर लगाने के लिये एस डी ओ से पूर्वानमति लेने का प्रावधान है । इस धारा की उपधारा  ( 2 )  मे यह भी प्रावधान है कि इस कार्य मे लिप्त मकान मालिक को सजा होने पर न्यायालय बिना नोटिस के मकान को जप्त करने का आदेश प्रदान कर सकती  है । इससे साफ़ जाहिर है कि मकान मालिक पर मुकदमा होना आवश्यक है फ़िर पुलिस ने मुकदमा क्यों नही किया ।

हालांकि मनीषा श्रीवास्तव को नोटिस दी गई है लेकिन मनीषा श्रीवास्तव निर्दोष है । मकान मोहन श्रीवास्तव ने अपने पैसे से मनीषा श्रीवास्तव के नाम खरिदा ताकि फ़सने की बारी आये तो मनीषा श्रीवास्तव फ़से।अगर लडकी की उम्र  18  साल से कम है तो तीन साल तक मकान किराये पर देने के लिये पूर्वानुमति लेने का प्रावधान है । गिरफ़तार लडकियो मे एक नाबालिग थी लेकिन मेडीकल नही कराया गया । पुलिस ने मेडीकल क्यो नही कराया ?

कानून की धारा  3  के अनुसार कोई भी व्यक्ति जो वेश्यालय  चलाता है या उसका प्रबंधन करता है या कार्य करता है या संचालन या प्रबंधन मे सहयोग करता है वह अपराधी है । धारा  3  की उपधारा के अनुसार कोई भी व्यक्ति जो मकान का किरायेदार , मालिक , एजेंट  है या उसकी सहमति से वेश्यालय का संचालन हो रहा हो वह इस अपराध का दोषी माना जायेगा तथा उस व्यक्ति को साबित करना होगा कि वह इस अपराध मे शामिल नही है यानी खुद को निर्दोष साबित करने की जिम्मेवारी उस व्यक्ति की होगी। यह कानून आई पी सी से अलग है तथा इसमे अपराधी को निर्दोष साबित होने के लिये साक्ष्य देना पडेगा ।

इसके बावजूद पुलिस ने मोहन श्रीवास्तव को अभियुक्त नही बनाया जबकि शहर के आम नागरिक को पता है कि वह पार्लर मोहन श्रीवास्तव का है।  इस कानून की धारा  5  के तहत नाबालिग लडकी से वेश्यावर्‍ति करवाने की सजा आजीवन कारावस है तथा धारा  6  की उप धारा  ( 2A )  के तहत लडकी की उम्र एवं दैहिक शोषण की जानकारी के लिये मेडीकल कराना जरुरी है जो पुलिस ने नही किया ।

धारा  5 A   के तहत कोई भी व्यक्ति जो वेश्यावर्‍ति के उद्देश्य से लडकी को नियुक्त करेगा, उसको एक जगह से दुसरे जगह लायेगा, उसका हस्तांतरण करेगा , धमकी देगा, अपहरण करेगा, फ़्राड करेगा , धोखा देगा, अपने पद का उपयोग उसको प्रभावित करने के लिये करेगा उसे इस अपराध का दोषी माना जायेगा।

इस कानून की धारा  15  की उप धारा ( 5 )  के तह्त वेश्यालय परिसर मे पाई गई लडकियां या व्यक्ति को न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करना है तथा इसी धारा  15  की उप धारा  ( 5-A )  के तहत न्यायिक दंडाधिकारी के समच प्रस्तुत करने के पहले लडकियो का मेडीकल कराना अनिवार्य है ताकि उ्नकी उम्र का निर्धारण हो सके, दैहिक शोषण से हुई क्षति का पता चले और उन्हे कोई  यौन संक्रमण रोग तो नही है जिसमे एड्स भी आता है।

इस कानून की धारा  17  के तह्त वेश्यालय से बरामद लडकियो को हर हालत मे मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करना है। गया पुलिस को बताना चाहिये कि कौन से कानून के प्रावधान के तहत लडकियो को बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के दुसरे के जिम्मे सौपां गया है।

कानून की धारा  17  एवं 17-A  केतह्त लडकियो को उनके मां-बाप, अभिभावक , पति को सौपने के पूर्व मजिस्ट्रेट को भी जांच करके यह संतुष्ट होना है कि लडकी के अभिभावक , मा-बाप या पति सही है और उनको सौपने से लडकी को क्षति पहुंचने की कोई आशंका नही है । यानी लडकी को मां-बाप, अभिभावक या पति को सौपने की बाध्यता नही है । इतने कडे प्रावधान के रहते हुये पुलिस ने लडकियो को वैसे लोगों की जिम्मेवारी मे सौप दिया जो उसे क्षति पहुंचायेंगे  या पुन: उनसे वेश्यावर्‍ति करवायेंगें।

इस कानून के तहत अभियुक्त की जिम्मेवारी है खुद को निर्दोष साबित करना । पुलिस जानबूझकर मोहन श्रीवास्तव को बचा रही है। मोहन श्रीवास्तव की पत्नी मनीषा श्रीवास्तव को नोटिस देकर पुलिस चालाकी  दिखा रही है। मोहन श्रीवास्तव एवं किशोर न्याय (बालको की दे्खरेख एवं संरक्षण ) कानून के तहत भी अपराध की दोषी है। बरामद एक लडकी नाबालिग थी। बिहार किशोर न्याय (बालको की देखरेख एवं संरक्षण ) नियमावली  2012  की धारा  2  की उप  धारा (घ) के तहत बाल दुरुपयोग की श्रेणी मे यौन शोषण भी शामिल है।  

इसके अतिरिक्त खुद अपने बच्चे के साथ कर्‍रता के भी है क्योंकि अपने चौथे बच्चे को मोहन ने छुपाकर रखा है ताकि मोहन श्रीवास्तव की सदस्यता न समाप्त हो जाए। कानून के अनुसार जिसके चार बच्चे है और  2007  के बाद चौथा बच्चा पैदा हुआ है वह कोई चुनाव नही लड सकता है। मोहन श्रीवास्तव को उसकी पत्नी मनीषा श्रीवास्तव से चौथा बच्चा  2007  के बाद पैदा हुआ जिसे उसने गायब कर के किसी अन्य को पालने के लिये दे दिया था जिसके बारे मे उसकी पत्नी को भी नही पता है। एक सुंदरी दाई का नाम इस मामले मे आता है जो उक्त बच्चे के बारे मे जानती है।

मोहन श्रीवास्तव का अपराध सिर्फ़ वेश्यालय संचालन तक सिमित नही है बल्कि यह वेश्याओं की आपूर्ति बडे अधिकारियो और नेताओं को भी करता है। उनकी ब्लू फ़िल्म बनाता है तथा ब्लैक मेल करता है। पटना के एक बडे होटल मे राज्य स्तर के अधिकारियो को यह सुविधा उपलब्ध कराई जाती है । अगर पुलिस ने तत्परता दिखाई होती तो ढेर सारे साक्ष्य मिल जाते परन्तु पुलिस शुरुआत से हीं मामले की लीपा पोती मे जुट गई। इस कांड से एक बहुत बडे षडयंत्र का रहस्योदघाटन हो सकता था।

मोहन श्रीवास्तव विगत छ माह से राज्य के मुख्यमंत्री के बेटे को अपने जाल मे फ़साने के लिये षडयंत्र रच रहा था। इसके लिये उसने एक राजनीतिक दलाल को पटना के उस होटल मे जहां यह ठहरता है, पैसे दिये थे तथा उस दलाल से यह सौदा तय किया था कि वह इसका परिचय मुख्यमंत्री के बेटे से करवा दे। हालांकि अभी तक इसे सफ़लता हाथ नही लगी है और दलाल ने इसे बताया था कि मुख्यमंत्री का बेटा अभी मुंबई मे है। गया के सदर एस डी ओ भी दबाव मे काम कर रहे है और वे भी मोहन श्रीवास्तव को बचाना चाहते है। गया नगर निगम के आयुक्त दया शंकर बहादुर मोहन श्रीवास्तव की पैरवी एस डी ओ सदर से कर रहे है। नगर आयुक्त दया शंकर बहादुर के बारे मे भी गिरफ़तार एक लडकी जो लाल रंग का जिंस तथा काले रंग की शर्ट पहने हुये थी बहुत कुछ बताती परन्तु पुलिस ने आनन फ़ानन मे लडकियो को मोहन श्रीवास्तव के आदमियो के जिम्मे सौप  दिया । आम जनता से मेरी अपील है सामने आयें।

इस तरह की गंदगी को साफ़ करे । प्रशासन को बाध्य करें कि अपराधियो की मदद बंद करे। जबतक मोहन श्रीवास्तव की गिरफ़तारी नही होती, उसके खिलाफ़ मुकदमा नही होता तबतक चरणबद्ध तरिके से आंदोलन चलाने का निर्णय लिया गया है। पहले चरण मे पर्चा, पोस्टर के माध्यम से जन जागरण , दुसरे चरण मे धरना प्रदर्शन एवं अंतिम चरण मे आमरण आनशन । आप सब को इसमे शामिल होने का आमंत्रण है ।

…… (गया, बिहार से प्राप्त खबर)

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