खुद अव्वल दर्जे के विवादित छवि के हैं राजगीर के ये कथित जनर्लिस्ट !

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राजनामा.कॉम (ब्यूरो डेस्क)। कुछ दिन पहले नालंदा जिले के राजगीर क्षेत्र के पत्रकारों से जुड़ी एक विश्लेषणात्मक खबर प्रसारित की गई थी। उस खबर में शिवनंदन नामक कथित जर्नलिस्ट ने वहां के आधा दर्जन पत्रकारों को चिरकुट छाप बताते हुये सत्ता-शासन और जनप्रतिनिधियों का जमकर महिमा मंडन किया था। लेकिन जब उनके बारे में विभिन्न ज्ञात-अज्ञात विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी जुटाई गई तो बड़े रोचक तत्थ उभर कर सामने आये।

नालंदा के डीएम डॉ त्यागराजन के साथ राजगीर के कथित जर्नलिस्ट शिवनंदन

“हमारा प्रतिनिधि और प्रशासन बिल्कुल खरे और साफ” के ढिंढोरे पीटने वाले कथित जर्नलिस्ट शिवनंदन राजगीर लॉजिंग हाउस कमिटी के मार्केट की एक दुकान को आवास बनाकर रह रहे हैं। यह दुकान इनके नाम से आवंटित नहीं है। मार्केट की दुकानें व्यवसाय के लिए बनाए गए थे और आवंटित किए गए थे। लेकिन इस कथित जर्नलिस्ट ने एक लंबे समय  से उसे अपने आवास बना कर सपरिवार के रहते हैं। राजगीर लॉजिंग हॉर्स कमेटी क्षेत्र जहां इनका आवास है, वहां के लोग इन्हें काला नाग कहते  हैं।

उल्लेखनीय है कि लॉजिंग हाउस कमेटी के पदेन चेयरमैन पटना प्रमंडलीय आयुक्त,  वाइस चेयरमैन नालंदा डीएम और सचिव राजगीर एसडीओ होते हैं। DM, SP, SDO, DSP सरीखे प्रशासनिक अधिकारियों के साथ  येन- केन-प्रकेरेण फोटो खिंचवा कर कमजोर तबके से अपना उल्लू सीधा करने की छवि काफी शुमार मानी जाती है।

यही नहीं, उन्होंने राजगीर गौरक्षणी के समीप मलमास मेला की जमीन पर वर्षों सें अवैध कब्जा जमाए हुए हैं। इसकी चहारदीवारी का पक्का निर्माण कराया गया है। जिसमें लोहे के गेट भी लगाए गए हैं। इस जमीन पर उनके द्वारा साल में एक बार इंदिरा गांधी की जयंती मनाई जाती है। यह सरकार की जमीन है। इस पर अतिक्रमण है। यह जानते हुए भी वर्तमान एसडीओ लाल ज्योति नाथ शाहदेव उस जयंती समारोह में शामिल होते हैं।

जाहिर है कि प्रशासन के ऐसे अनैतिक कार्यों से अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद होते हैं।

सबसे अहम बात कि मलमास मेला की जमीन पर मखदूम कुंड के समीप बनाया गेस्ट हाउस पूर्णता सरकारी जमीन पर बना हुआ है। इसके निर्माण में कई घरों के नामो निशान मिटाए दिये गए। वर्तमान में भी कई कब्र गेस्ट हाउस के सनी पर है। इससे लगता है कि कभी उस जगह मुस्लिम समाज समुदाय के लोग मृतकों के शरीर को दफनाते थे

वेशक कथित जनर्लिस्ट शिवनंदन को पत्रकार की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है। करीब 2 साल पहले इनको प्रभात खबर से हटा दिया गया है। वे अभी किसी भी समाचार पत्र-पत्रिका  आदि से जुड़े नहीं हैं। उनकी सत्ताशाही चहल-पहल अब सिर्फ सोशल माध्यमों तक ही सीमित है। स्थानीय मीडिया वाले उन्हें फेसबुकिया पत्रकार कहते हैं। 

कथित जर्नलिस्ट शिवनंदन फिलहाल राजगीर विकास मंच सहित आधे दर्जन संगठनों के चेयरमैन और सदस्य है। इस संगठनों के माध्यम से वे समाज सेवा कम और अपनी कमियों को छिपाने और प्रशासन के बीच में  पैठ बना कर स्वार्थ सिद्धि अधिक करते हैं।

वर्तमान में दलाली-चापलूसी ही इनका मुख्य पेशा प्रतीत होता है। जैसा कि थाना, प्रखंड, अनुमंडल समेत जिला स्तर के अनेक सरकारी दफतरों में उनकी उपस्थिति देखने को मिलती है। वे राजगीर  के एक धार्मिक प्रतिष्ठान विरायतन को ब्लैकमेल कर थाईलैंड और भूटान की यात्रा तक कर चुके हैं।

वेशक कथित जर्नलिस्ट शिवनंदन ने सत्ता-शासन के पत्रकारिता को एक बड़ा विकृत स्वरुप दे रखा है। ऐसे लोग मीडिया के बल अकूत काली कमाई की मिशाल पेश करते हैं और जो लोग उस मानसिकता के नहीं होते, वैसे पत्रकारों को वे अपनी हालत व गरीबी न देख दूसरों की बीबी, धन व शोहरत के प्रति जलनशील होने के जुमले फेंकते हैं। अगर ऐसे कथित जर्नलिस्टों के खिलाफ गहराई से जांच-कार्रवाई की जाये तो निश्चित तौर पर सारी नंगई खुल कर सामने आ जायेगी।

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