क्या हम बिहारी मराठी तमिलियन मणिपुरी नहीं हो सकते ?

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ये चाहते हैं सिर्फ बैल या शेर ही रहे।  क्या ये संभव है ?  और अगर संभव भी है तो क्या हम अपनी विरासत के साथ न्याय कर पायेंगे…………”

-:  सिने-टीवी लेखकः धनंजय कुमार :-

भारत विविधताओं का देश है। अलग रंग, अलग रूप, अलग बोली, अलग खानपान, अलग पहरावा, अलग धर्म, अलग संस्कृति और जीवन जीने को अलग विचार। यही भारत की सुन्दरता है और एकता है।

लेकिन कुछ लोगों को उन्माद का दौरा बाबा के ज़माने से पड़ते आ रहा है, आनुवंशिक रोग की तरह। विविधता को ख़त्म कर सब एकरंग करना चाहते हैं। एक भाषा, एक विचार, एक पहरावा, एक खानपान।

उसी का नतीजा है कि तनाव बढ़ता जा रहा है। न सिर्फ जम्मू कश्मीर पूर्वोत्तर में नागालैंड और मणिपुर में भी भेद बढ़ता जा रहा है।

सवाल है। क्या ज़बरदस्ती किसी पर शासन किया जा सकता है ?  बन्दूक लेकर गाँव-शहर और देश जीतने का समय बीत चुका है। अब आर्थिक दौर है। दुनिया सिमट चुकी है। जिसको जहाँ बेहतर अवसर दिख रहा है, पलायन कर रहा है।

इन्डियन और अमेरिकन अब केवल इन्डियन और अमेरिकन नहीं रहे, इंडो-अमेरिकन हो रहे हैं। हम बिहारी रहने में सुख ज्यादा महसूस कर रहे हैं। क्या हम बिहारी-मराठी नहीं हो सकते? कश्मीरी-तमिलियन नहीं हो सकते? बांग्ला-मणिपुरी नहीं हो सकते ?

हो सकते हैं और हो रहे हैं, लेकिन कोई अगर कहे कि सिर्फ बिहारी ही रहेगा, तो सब गुड़ गोबर हो जाएगा। ये यही करने पर तुले हैं।

गांधी इस देश के सबसे बड़े नायक इसलिए नहीं हैं कि उनके नेतृत्व में देश आज़ाद हुआ, बल्कि सबसे बड़े नायक इसलिए हैं कि वो सबका सम्मान करना जानते थे। सबको साथ लेकर चलने के हिमायती थे।

ब्राह्मण हो या डोम, तमिल हो या कश्मीरी सबको एक सामान समझते थे और सब एक साथ चले इसके पक्षधर थे।

इसीलिये गांधी ने शासन के बजाय स्वशासन पर जोर दिया। रंग और विचार के बजाय सह अस्तित्व पर बल दिया। सह अस्तित्व ही हमारी विरासत है।

लेकिन जो गांधी के सह अस्तित्व के विचार के समर्थक नहीं हैं, वो न तो अच्छे इंसान हैं और ना ही हिन्दू। भगवान शिव का परिवार सह अस्तित्व का सबसे अनोखा और सुन्दर उदाहरण है, जहां जानवर भी साथ साथ रहते हैं।

सांप, चूहा, मोर, बैल और शेर सब एक दूसरे के दुश्मन हैं, लेकिन सब साथ रहते हैं। यही प्रकृति है।

लेकिन ये चाहते हैं सिर्फ बैल या शेर ही रहे।  क्या ये संभव है ?  और अगर संभव भी है तो क्या हम अपनी विरासत के साथ न्याय कर पायेंगे।

नेहरू और पटेल गांधी के विचारों को आगे बढाने और साकार करने वाले नेता थे। लेकिन इनको गांधी और नेहरू दोनों से नफ़रत है। और नफ़रत है उनके तमाम किये धरे से।

पटेल से इसलिए दोस्ताना जताते हैं, ताकि नेहरू और गांधी पर उनकी ओट लेकर हमला कर सकें। लेकिन ऐसे में यह समझ नहीं पा रहे कि गांधी-नेहरू और पटेल ही थे, जिन्होंने भारत के टुकड़ों को जोड़ा और भारत को खडा किया।

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