कोर्ट का आदेश भी रांची नगर निगम के पूर्व CEO मनोज कुमार के ठेगें पर !

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रांची (राजनामा.कॉम)।  लगता है कि भ्रष्टाचार के सीधे आरोप में अपने पद से हटाए गए रांची नगर निगम के  पूर्व सीइओ मनोज कुमार की रघु’राज में काफी जम गई है। तभी तो न्यायालय के आदेश के बाबजूद रांची पुलिस एफआइआर दर्ज नहीं कर पाई है।

आइपीएस मनोज कुमार
आइपीएस मनोज कुमार

कहा जाता है कि जब मनोज कुमार रांची में एसडीओ पद पर पदास्थापित थे, तब उनके आवासीय सरकारी कार्यालय से दो अहम फाईल चोरी हो गई थी। जिसे लेकर तात्कालीन एलआरडीसी  के द्वारा राजधानी के रांची कोतवाली में प्राथमिकी द्रज की गई थी।

कहते हैं कि वह फाइल हरि अग्रवाल से संबंधित थी और तात्कालीन पुलिस अनुसंधानकर्ता ने हरि अग्रवाल की बिना गवाही लिए अपने फाइनल रिपोर्ट में मनोज कुमार को क्लीन चिट दे दी।

उसके बाद हरि अग्रवाल ने सीजीएम के यहां मामले की पुनः जाच की गुहार लगाई। 12 मार्च, 2015 के सीजीएम कोर्ट ने डीजीपी, डीआइजी और एसएसपी को मामले की नये सिरे से जांच के आदेश दिये।

उसके बाद डीआईजी ने फौरिक संज्ञान लेते हुए एसएसपी को अपने कार्यालय पत्रांकः 708/15  द्वारा 1 अप्रैल, 2015 को त्वरित कार्रवाई करने के आदेश निर्गत किये।

इस पर एसएसपी ने मामले की गंभीरता को समझते हुए ठीक उसी दिन अपने कार्यालय पत्रांकः 3639/15 द्वारा क्राइम सेक्शन को अविलंब जांच कार्रवाई करने को कहा।

उसके बाद क्राइम सेक्सन ने अपनी जांच कार्रवाई कर कोतवाली थाना को एफआइआर दर्ज करने का निर्देश दिया।

लेकिन, अब तक न तो इस संबध में कोई पुलिस अनुसंधानकर्ता बहाल नहीं किया गया है। जाहिर है कि मनोज कुमार सरीखे रसुखदार आरोपी अफसर के खिलाफ इस बार भी जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही करने की मंशा प्रतीत है। …...रांची से इन्द्रदेव लाल की रिपोर्ट

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