बिरादरी पर कुछ तो लाज कीजिये साहेब

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वेशक झारखंड में भाजपा-झामुमो-आजसू की तिकड़ी मुंडा सरकार के इधर के शासन काल में पत्रकारों का उत्पीड़न काफी बढ़ गया है। और बात जब सत्तारुढ़ भाजपा के छुटभैये नेताओं तक की भी होती है, तब पुलिस-प्रशासन तो दूर प्रिंट-इलेक्ट्रॉनिक मीडिया वाले भी अपने खबरचियों के बजाय सरकारी मशीनरी का तलवा चाटने में अधिक मशगुल दिखते हैं।

खबर है कि झारखंड के पलामू में दैनिक जागरण के छायाकार को भाजयुमो के एक नेता ने पीट दिया। इस घटना की जानकारी छायाकार ने अखबार प्रबंधकों को दी, परन्‍तु अखबार ने इस खबर के बारे में एक लाइन प्रकाशित करना भी गंवारा नहीं समझा। कहा जा रहा है कि रांची से प्रकाशित होने वाले दैनिक जागरण के पलामू कार्यालय में प्रियदत्‍त उर्फ छोटू छायाकार के रूप में काम करता है। किसी बात को लेकर एक भाजयुमो नेता ने छोटू को पीट दिया।

उसमें कई लोग तो उल्टे मीडिया हाउस के स्वंयभूओं को वसूली चढ़ाते रहते हैं। वहीं अब तो ब्लॉक स्तर तक के छुटभैये नेता लोग सीधे संपादक तक पहुंच रखने लगे हैं। जाहिर है कि उनकी सूचनाओं में निष्पक्षता नहीं तलाशी जा सकती। आखिर ठेका-पट्टा से लेकर ब्लैकमेलिंग के धंधे से क्या उम्मीद किया जाये। 

इस घटना के बाद पत्रकारों ने आपात बैठक कर उक्‍त छायाकार से हुई मारपीट की निंदा की। पत्रकारों ने भाजयुमो नेता के समझौता के दबाव से भी इनकार कर दिया है। अखबार में छायाकार के साथ मारपीट की एक लाइन की खबर प्रकाशित नहीं हुई। इससे पलामू के पत्रकारों में रोष है।

 इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि आज मीडिया के ब्लॉक स्तर तक ऐसे लोगों की भरमार हो गई है, जिसे मीडिया हाउस तो कुछ नहीं देता ; फिर भी उसके संवाददाता-छायाकार चारपहिये वाहनों तक में विचरते रहते हैं। उसमें कई लोग तो उल्टे मीडिया हाउस के स्वंयभूओं को वसूली चढ़ाते रहते हैं। वहीं अब तो ब्लॉक स्तर तक के छुटभैये नेता लोग सीधे संपादक तक पहुंच रखने लगे हैं। जाहिर है कि उनकी सूचनाओं में निष्पक्षता नहीं तलाशी जा सकती। आखिर ठेका-पट्टा से लेकर ब्लैकमेलिंग के धंधे से क्या उम्मीद किया जाये। 

…………मुकेश भारतीय

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