पूर्व जजों की जांच के पक्ष में सीबीआइ

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नीरानई दिल्ली।  झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने टाटा स्टील से लाइसेंस के एवज में मोटी रकम मांगी, कारपोरेट दलाल नीरा राडिया टाटा मोटर्स के करार के लिए द्रमुक नेताओं से जुगत भिड़ा रही थीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज से करीबी रिश्तों के एवज में पूर्व टेलीकॉम नियंत्रक प्रदीप बैजल ने सेवानिवृत्ति के बाद ऊंचे ओहदे वाली नौकरी पाई, अनिल धीरूभाई अंबानी समूह के रिलायंस कम्युनिकेशन ने दस्तावेजों में जालसाजी की। सुप्रीम कोर्ट में सीबीआइ की ओर से पेश 16 सबूतों में से ये प्रमुख हैं जो जांच एजंसी ने नीरा राडिया की टेलीफोन बातचीत के आधार पर लगाए हैं। एजंसी कारपोरेट दलाली के तहत हुई गड़बड़ियों की जांच कर रही है।

सीबीआइ की इस सूची ने राडिया मामले को फिर से खोल दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजंसी को निर्देश दिए थे कि वह आयकर विभाग के टैप किए गए सभी 5800 बातचीत की जांच करे। अभी तक एजंसी सिर्फ 2-जी घोटाले से जुड़े पहलुओं की ही जांच कर रही थी। आरोपों की इस सूची को देखने के बाद इस हफ्ते के शुरू में जज को यह कहने के लिए मजबूर होना पड़ा कि सरकार के चप्पे-चप्पे में बिचौलिये बैठे हुए हैं।

सीबीआइ ने संकेत दिए कि आइटम संख्या एक में जितने मामले दर्ज हैं उनमें से राडिया खुद सीधे तौर पर महज एक में शामिल हैं। एजंसी चाहती है कि वह इनमें से चार और की जांच करे और बाकी को सरकारों, मुख्य अधिकारियों (सीवीओ) और एक को सेबी के पास भेजना चाहती है।

एजंसी ने दावा किया है कि टेलीफोन बातचीत से इस बात का भी खुलासा हुआ है कि एक पूर्व जज को भी पैसे दिए गए हैं और सरकार के एक वरिष्ठ विधि अधिकारी को पांच सितारा स्वीमिंग पूल की सदस्यता दिलाई गई है। लेकिन एजंसी ने इसे महज ‘सुनी हुई बात’ ही कहा और इसकी जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट से आगे के दिशानिर्देश की मांग की। ये मुख्य मुद्दे टैप की गई बातचीत पर आधारित हैं जिसका सार एजंसी ने तैयार किया है।

तमिलनाडु के साथ बस के लिए करार की खातिर टाटा मोटर्स के वरिष्ठ अधिकारी रवि कांत राडिया के संपर्क में थे। रवि चाहते थे कि वे द्रमुक नेताओं पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर यह ठेका टाटा को दिलवा दें। दूसरी बातचीत से टाटा मोटर्स और अशोक लीलैंड के बीच करार को लेकर कड़ी प्रतियोगिता का भी पता चलता है।

एजंसी का कहना है कि इस मामले को तमिलनाडु के डीजीपी के पास भेज देना चाहिए। संवादों के मुताबिक, ट्राई के पूर्व प्रमुख बैजल ने नीरा राडिया की जनसंपर्क कंपनी नोएसिस में नौकरी पाई। सीबीआइ इसकी उचित जांच चाहती है।

एजंसी ने पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। अंकुआ में टाटा को लौह अयस्क खदान के लाइसेंस के लिए झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने कथित तौर पर 150 करोड़ रुपए की मांग की। लेकिन टाटा ने यह रकम देने से इनकार कर दिया और राष्ट्रपति शासन के दौरान तत्कालीन राज्यपाल सैयद रिजवी के जरिए लाइसेंस हासिल करने की कोशिश की। हालांकि यह लाइसेंस अभी रुका हुआ है, लेकिन एजंसी झारखंड के डीजीपी के पास इस मामले को भेजना चाहती है।

टैप से यह भी पता चला है कि न्यायपालिका और पंचाटों के कुछ सदस्य भी दलाली के इस खेल में शामिल थे। आरोप है कि नौ करोड़ की रिश्वत के एवज में हाई कोर्ट के एक जज ने रियल स्टेट कंपनी को फायदा पहुंचाने वाला फैसला दिया था। इसी तरह किसी खास को फायदा पहुंचाने के एवज में विधि अधिकारी को पांच सितारा स्वीमिंग पूल की सदस्यता का तोहफा दिया गया। लेकिन सीबीआइ ने जज और अधिकारी के नाम को सामने लाने से इस आधार पर परहेज किया कि ये सुनी-सुनाई बाते हैं और अभी इसकी जांच की जरूरत है। एजंसी ने सुप्रीम कोर्ट से इसकी जांच के लिए दिशानिर्देश की मांग की।

अनिल अंबानी की सासन ऊर्जा परियोजना पर भी दलाली के कीचड़ पड़े हैं। आरोप है कि कंपनी ने अपनी दूसरी परियोजना के लिए खदान से अतिरिक्त कोयला निकाला। प्रतिद्वंद्वियों ने कंपनी की इस गतिविधि को चुनौती दी है। एजंसी इसमें कोल मंत्रालय के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच चाहती है। साथ ही उसने ध्यान दिलाया कि कैग ने खान के इस अनुबंध पर सवाल उठाए थे।

पूर्व डीजी (हाइड्रोकाबर्न) वीके सिबल मुंबई में एक फ्लैट के मालिक होने के कारण सतर्कता आयोग के जांच के घेरे में हैं। आरोप है कि 2000 में रिलायंस इंडस्ट्रीज को फायदा पहुंचाने के एवज में उन्हें यह फ्लैट दिया गया है। सीबीआइ का कहना है कि संबंधित जांच एजंसियों को टेलीफोन बातचीत के अंश मुहैया कराए जाने चाहिए। रिलायंस कम्युनिकेशन पर आरोप है कि उसने ट्राई और बांबे स्टॉक एक्सचेंज के सामने जाली दस्तावेज और ग्राहकों के आंकड़े पेश किए हैं। इसके कारण सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हुआ है। इसलिए एजंसी इसकी व्यापक जांच करना चाहती है। इसके साथ ही सीबीआइ ने विमानन क्षेत्र में भी बिचौलियों के नाम लिए हैं। रमेश नांबियार और दीपक तलवार के खिलाफ जांच की सिफारिश की गई है।

सुप्रीम कोर्ट में सीबीआइ की ओर से पेश आपराधिकता और अनियमितता के इन साक्ष्यों पर पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा का कहना है कि इन आरोपों में कोई दम नहीं है, मेरी कभी भी नीरा राडिया से फोन पर बातचीत नहीं हुई है।   टाटा मोटर्स के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी ने विभिन्न राज्यों की दी गई निविदाओं का पालन करते हुए विभिन राज्यों को बसों की आपूर्ति की। हमने सभी नियमों का पालन किया। इसी तरह एडीएजी के प्रवक्ता ने भी कंपनी पर लगे आरोपों को निराधार करार दिया है।

एजंसी के आरोपों की जद में आए यूनीटेक के प्रवक्ता ने भी कहा है कि चूंकि ये मामला अदालत में विचाराधीन है इसलिए हम इसपर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। (ईएनएस)

 

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