काफी आहत हैं PGI लखनऊ में भर्ती देवघर के कैंसर पीड़ित पत्रकार आलोक संतोषी

Share Button

रांची। झारखंड के देवघर जिला के एक वरिष्ठ पत्रकार आलोक संतोषी गंभीर रूप से बीमार हैं। वे कैंसर से पीड़ित हैं। साल भर पहले पैंक्रियाज कैंसर की सर्जरी हुई थी। उसके बाद रिकवर कर रहे थे। फिर यकायक बीमार ही गए। लखनऊ के पीजीआई में साल भर से ईलाज करा रहे आलोक संतोषी अब टूटने लगे हैं, हारने लगे है। अपनी उदासी और बेबसी को उन्होंने अपने फेसबुक के माध्यम से उकेरा है। साथ ही इस बुरे दौर में पत्रकारों के साथ नहीं देने का दुःख भी प्रकट किया है।

आलोक संतोषी की इस पीड़ा से किसी भी संवेदनशील आदमी की रूह कांप उठेगी। आलोक अपने परिवार के साथ अकेले संघर्ष कर रहे है। कैंसर के दर्द के कांटो के चुभन सिर्फ वो और उनके परिवार को पीड़ा दे रहा है। माहौल बिलकुल निराशाजनक है। देवघर के चंद लोगों ने उनका साथ दिया है, पर पत्रकारों ने उनका हाल पूछने की जहमत तक नहीं उठायी। आलोक की इस पीड़ा से उठे तकलीफ पर उन्हें अकेले छोड़ा नहीं जा सकता है।

आलोक जी ने 23 दिसंबर को अपने फेसबुक वाल पर लिखा है कि “मेरे पत्रकार मित्रो क्या यही हाल रहेगा हम पत्रकारो का। हम लोग दुनिया का सुख दुःख बांटते है और जब खुद पर आफत आती है तो एक दुसरे की हम मदद तक नहीं करते। ऐसा क्यों ? क्या हम इन्शान। नहीं है मुझे दुःख के साथ यह कहना पर रहा है कि मैं 3 सालो से असाध्य बीमारी से जूझ रहा हूं।

देवघर के एक एक लोगो ने मेरे लिए दुवाए मांगी। पैसे से मदद की। मेरा हौसला भी बढ़ाया। तन से मन से धन से समाज ने प्यार दिया। पर हाय रे पत्रकार जगत के मित्रो आपकी इंसानियत कहा मर गई। प्रेस क्लब हो या जिला पत्रकार संघ, किसी ने हाल तक जानना मुनासिब नहीं समझा। फिर कहे का प्रेस क्लब है। क्या हमारा संगठन इतना कमजोर है कि हम अपने साथियो की मदद तक न कर सके।

मैं यह नही कहता कि आप पॉकेट से पैसे निकले। लेकिन सरकार के पास तो हम अधिकार की लड़ाई लड़ ही सकते है। पर हमारे बीमारी में मेरी सरकार थी। देवघर की जनता, जिसने मेरी मदद की और मेैं अभी जीवित हूं। मेरी आप लोँगो से यही विनती है कि अभी भी जागिये। मेरे साथ जो हुआ किसी और पत्रकार के साथ न हो।

आगे के बारे में सोचिये कि हमलोग कितने शोषित है। दुसरों को मदद पहुचते है। सरकार से मदद दिलाते है और खुद पीछे रह जाते है। अगर मैंने कुछ गलत लिखा हो तो मुझे क्षमा करेंगे। लेकिन मेरी बातो पर विचार जरूर करेंगे। मैं दुखी हूं। इसलिए लिखा। जो मेरे साथ हुआ वह किसी और के साथ न हो आपका भाई आलोक संतोषी ”

इससे एक दिन पहले उन्होंने लिखा है कि  “यह जिंदगी भी क्या है कुछ समझ में नहीं आता। 10 दिन से PGI लखनऊ हॉस्पिटल में बेड पर संघर्ष कर रहा हूं। अब शायद मेरी जिंदगी ऐसे ही कटेगी पर कोटि कोटि परनाम करता हूं देवघर में अपने चाहने वालो  की। जब भी मुशीबत में आया, सबो ने मेरी मदद की। मेरा रोम रोम ऐसे प्यार करने वालो के लिए कर्जदार रहेगा। समझ में नहीं आता कैसे सुक्रिया अदा करू।

फिर लंबा आपरेशन हुआ फिर नई जिंदगी मिली देवघर वालो के बदौलत मुझे यह कहने में गर्व महसूस हो रहा है। वे चाहे समाज सेवी हो, नेता हो, डॉक्टर हो, रिस्तेदार हो, मेरे मित्र हो, मेयर साहब होपंडा धर्म राक्षणि के अध्यक्ष हो, मेरी पत्नी, मेरे पुत्र पुत्री, दामाद, भाई, प्रो रामनंदन सिंह, भाई बहन, सबो ने किसी न किसी रूप में मेरा साथ दिया और दे रहे है। सबो के लिए में आभार प्रकट करता हूं। आगे समय क्या गुल खिलायेगा नहीं कह सकता। ऊपर वाले के मर्जी के आगे न कुछ हुआ है न होगा। जय बाबा बैद्यनाथ। जय शिव जय माँ पार्वती। रक्छा करना माँ ”

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Loading...