कांके प्रखंड प्रमुख है या ‘एनोस एक्का डिजीज’

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mukesh bha

राजनामा.कॉम।  हमारे आस-पास के आदिवासी समुदाय में आज कल एक गंभीर बीमारी तेजी से पनपती नजर आ रही है। वह संक्रमण है…एनोस एक्का डिजीज। हर कोई छोटा-मोटा चुनावी पद मिलते ही सिर्फ और सिर्फ पैसा कमाने हड़पने की जुगत भिड़ाता है और अपने ही समाज-समुदाय को अधिक शिकार बनाता है।

अब जरा देखिए तो…. झारखंड की राजधानी रांची के कांके प्रखंड के नेवरी विकास के पास 6  साल पहले अपनी पत्नी के नाम से पांच डिसमिल जेनरल जमीन खरीदी थी, ताकि ओरमांझी के चकला मोड़ के पास के एन.एच.-33 किनारे अवस्थित मकान अधिग्रहण में टूटने के बाद वहां घर बना के रहा जा सके।

कांके अंचल द्वारा उस समय ही दाखिल खारिज होने बाद जमीन का नियमित रसीद कट रहा है। मुझे इस जमीन को लेकर कभी भी कोई परेशानी नहीं आई और न ही किसी ने दिक्कत खड़ी की। जमीन के चारो ओर मैंने पक्की नींव डाल रखी थी।
लेकिन दो दिन पहले अचानक देर शाम गांव के ही एक शुभचिंतक ने फोन कर बताया कि कांके प्रखंड प्रमुख सुदेश उरांव और उसका भाई, जो जमीन की दलाली कारोबार से जुड़ा है, वह पीछे की करीब 100 डीसमिल आदिवासी जमीन का प्लॉटिंग कर बेचने की जुगाड़ में है और इसके लिए ग्राहकों को फांसने के लिए आपकी जमीन में रास्ता बना दिया है।

इन जमीन दलालों की योजना है कि आदिवासी जमीन को जेनरल जमीन के रुप में प्रचारित कर लोगों को ठगी का शिकार बनाया जाए।
जमीन दलालों की इस गुंडागर्दी सूचना मिलने के बाद अहले सुबह जब मैं खुद की जमीन को देखने गया तो पाया कि मेरे जमीन के उपर जेसीबी से नींव उखाड़ते-दबाते रास्ता बना दिया है। गांव वालों ने बताया कि यह सब प्रखंड प्रमुख की अगुआई में उसके भाई-गुर्गें आनन फानन में सब कुछ करके चल दिए हैं।

उस गांव समेत आस पास के लोगों ने प्रखंड प्रमुख एवं उसके दलाल गैंग के बारे में कई रोचक जानकारी भी दी। जिसकी चर्चा बाद में करेगें।

बहरहाल, एक जनप्रतिनिधि के रुप में प्रखंड प्रमुख ने मेरी जेनरल जमीन के प्रति जो गुंडागर्दी दिखाई है। उसे भूल नहीं सकते। ऐसे लोगों को मुझे जबाब देना अच्छी तरह आता है। अभी वे पैसे और पद के नशे में चूर होकर वही सब करते फिर रहे हैं, जैसा कि इसी क्षेत्र में कभी मधु कोड़ा राज के मंत्री एनोस एक्का ने किया था। एनोस एक्का का अंजाम सबको मालूम है।

सबसे बड़ी बात कि ये कितने गंदे लोग हैं कि एक इंसान को कुरेदते फिर रहे हैं। आदिवासी होकर भी आदिवासियों की ठगी कर रहे हैं। उनके इस काम में पुलिस-प्रशासन के लोग भी खुल कर संलिप्त प्रतित होते हैं। …….मुकेश भारतीय

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