कम्यूनल-अनसोशल वीडियो वायरल करने वाले ऐसे पुलिसकर्मी पर हो क्वीक एक्शन

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“असमाजिक तत्वों पर नजर रखने की जबावदेही सबकी है। पुलिस-प्रशासन का दायित्व है कि वह पहचान में आये ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करे, ताकि वैसे लोगों में भय का महौल कायम हो सके, जो विशेष परिस्थितियों में भी प्रशासनिक हिदायत को ठेंगा दिखाने से नहीं चूकते……

-:  मुकेश भारतीय :-

बीते कल का दिन-रात हर दृष्टिकोण से काफी संवेदनशील था। बिहार-झारखंड के चप्पे-चप्पे में पुलिस प्रशासन काफी सजगता से मुसतैद दिखी। कई स्थानों पर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई। कुछ जगहों पर हिंसक झड़पों की सूचना भी मिल रही थी।

इसी बीच नालंदा जिले में ‘JDU HARNAUT ASSEMBLY’ नामक ग्रुप पर देर रात करीब 11 बजे दो आपत्तिजनक वीडियो देखने को मिले। 10.54 बजे रात में अपलोड किये गये ऐसे वीडियो वायरल करने के पीछे साफ मकसद होता है एक विशेष समुदाय को टारगेट कर दूसरे समुदाय के बीच नफरत व हिंसा के भावना को उकसाना।

उस वीडियो को देखने के बाद मेरा दिमाग सन्न था।  (9430902120)  नंबर से वीडियो अपलोड करने वाले को फोन किया तो उधर से मिले जबाव काफी चौंकाने वाले थे।

ट्रू कॉलर के अनुसार खुद को सीताराम नाम की पुष्टि करते हुये बताया गया कि वह एक पुलिस एसआई है और 5-6 साल पहले बिहारशरीफ में था। सोहसराय थाना से पदास्थापित रहा। अभी वह पटना विशेष सुरक्षा में पदास्थापित है।

जब उससे पूछा गया कि इस तरह के आपत्तिजनक वीडियो पोस्ट करने के पीछे उसका आशय क्या है? वह लोगों को क्या संदेश देना चाहता है? तो उसका दलील था कि वह अपने समुदाय को दूसरे समुदाय का सच दिखाने का सतकर्म कर रहा है।

इसके बाद मैंने जदयू हरनौत असेंबली ग्रुप की वीडियो की सूचना 11.21 बजे हरनौत थानाध्यक्ष महोदय को दी। उन्होंने सारी बातें 2.17 मिनट तक गौर से सुनी।

फिर उन्होंने अचानक आवाज कटने की बात करते हुये रिकॉल कर हलो-हलो करते रहे। मानो मेरी आवाज उन्हें सुनाई नहीं दे रहा हो, जबकि उनकी आवाज साफ आ रही थी।

इसके बाद 6-7 बार मैंने कॉल किया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। इसके बाद मैंने बिहारशरीफ एसडीओ साहब को फोन लगाया, लेकिन उनका मोबाईल स्वीच ऑफ था।

इसके बाद रात 11.21 बजे नालंदा एसपी साहब के सरकारी नंबर पर कॉल किया। तीन बार उनका मोबाईल से ‘ द बीएएसएनएल सबक्राइबर बीजी ऑन द अनदर कॉल’ के प्रतिउतर मिले। इसके बाद 4 बार कॉल किया लेकिन हर बार उनके मोबाईल की सिर्फ घंटियां ही सुनाई देती रही। 

इसके बाद नालंदा एएसपी साहब का मोबाईल से संपर्क साधने की कोशिश की, दुर्भाग्यवश उनका मोबाईल भी स्वीच ऑफ मिला।

इसके बाद रात 11.29 बजे बिहारशरीफ डीएसपी (लाइन एंड आर्डर) साहब की सरकारी घंटी बजाई। उन्होंने मोबाईल उठाया। तब उन्हें मामले सी सारी जानकारी दी। इस पर उन्होंने बताया कि उनके सरकारी नंबर में नेट काम नहीं कर रहा है। स्नैपशॉट भेज दें। कनेक्ट होते ही देख लूंगा।

साथ ही उन्होंने बिहारशरीफ हेड क्वार्टर डीएसपी से संपर्क साधने को कहा। जिनका नबंर मांगने पर उन्होंने नहीं दी। उनका कहना था कि वे नये आये हैं। कहीं और से व्यवस्था कर लीजिये।

इसके बाद नालंदा के एक रिपोर्टर को फोन किया। उससे नंबर उपलब्ध होते ही रात 11.52 बजे हेड क्वार्टर डीएसपी साहब को फोन किया। उन्हें सारी बातें बताई। उन्होंने सारी बाते गंभीरता से सुनी।

फिर उनके  व्हाटस्एप्प नंबर पर सारे स्नैपशॉट और आपत्तिजनक वीडियो भेज दिये। उन्होंने तुरंत मैसेज रीड किया। इसके बाद मुझे शांति मिली कि चलो पुलिस के संज्ञान में मामला चला गया।

इसके ठीक पहले नालंदा जिला जदयू तकनीकी सेल के अध्यक्ष एवं जदयू हरनौत असेंबली व्हाटस्एप्प ग्रुप के एक एडमिन नवीन कुमार को मामले की जानकारी दी थी। उन्होंने उसे गंभीरता से लेते हुये 11.43 बजे आपत्तिजनक वीडियो डालने वाले को रिमूव करते हुये कई चेतावनी भरे कंमेंट भी लिखे।

अब देखना है कि मिले परिचय के अनुसार समाज-राष्ट्रहित में पुलिस सेवा से जुड़े एक पुलिसकर्मी की ऐसी सांप्रदायिक हरकत के खिलाफ नालंदा-पुलिस प्रशासन कोई ठोस कानूनी कार्रवाई कर पाती है या नहीं।

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