एक वेश्यालय संचालक है गया नगर निगम का उप मेयर !

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पुलिस ने मारी रेड । पत्नी के नाम पर है मकान। एक वेश्यापुत्र पार्षद ने की थाने मे पैरवी

pk राजनामा.कॉम। मोहन श्रीवास्तव राजनीति का वह गंदा चेहरा है जिसको देख कर हीं घिन्न आयेगी । गया मे सभी लोगों को पता है उसने  लडकिया सप्लाइ करके राजनीति मे अपनी जगह बनाई है। बहुत सारे राजनेता आज भी लडकियो के लिये मोहन श्रीवास्तव को याद करते है।

मोहन ने अपनी राजनीति स्व० सांसद राजेश कुमार के नौकर के रुप मे शुरु की थी । वह राजेश कुमार के यहां कैसे पहुंचा यह भी दिलचस्प किस्सा है। गया के बाराचट्टी थाने मे चोरी के स्कुटर बरामदगी का एक मुकदमा १९९०-९१ मे हुआ था। वह स्कुटर मोहन श्रीवास्तव के घर से बरामद हुआ था। मुकदमे मे इसका नाम था।

थानाध्यक्ष बिंदेश्वरी सिंह थे जिनके हाथ मे यह मुकदमा था। डीएसपी थे सुरेश पासवान । सुरेश पासवान के उपर एक जांच चल रही थी और उन्हें राजेश कुमार की मद्द की जरुरत थी । वे लगातार दिल्ली जाते थे। मोहन श्रीवास्तव को यह बात पता चली , उसने एक नेता जो राजेश कुआर के नजदकी थे, उनसे पैरवी लगवाई कि सुरेश पासवान से कहकर उसका नाम फ़ायनल कर दिया जाय यानी उसके खिलाफ़ चार्जशीट नही दाखिल की जाय।

उधर राजेश कुमार को एक नौकर की दरकार थी। मोहन चुकि लंपट टाईप का आदमी था। दिल्ली मे रहने की जगह , खाना मुफ़्त का। मोहन तुरंत तैयार हो गया और यही से शुरु हुई इसकी राजनितिक यात्रा । राजेश कुमार एक प्रभावशाली नेता माने जाते थे, उन्होने मोहन को सिमा मे रखने के लिये अपने यहा एक कुत्ता पाला था जिसका नाम भी उन्होने मोहन रखा था । राजेश कुमार जबतक जिंदा रहे मोहन उनके यहां नौकर की तरह रहा । वे इसे अरे मोहना कह कर बुलाते थे।

jagranराजेश कुमार की मर्‍त्यु के बाद यह भगवतिया देवी सांसद का पीए बन गया । भगवतिया देवी अशिक्षित थी । अंगुठा लगाती थी । इसका इसने भरपूर फ़ायदा उठाया जब भगवतिया देवी को पता चला तो इसके उपर केस करने के लिये तैयारी हो गई परन्तु यह हाथ-पांव जोडकर बच गया ।

बाद मे सुरेन्द्र यादव राजद के शासनकाल मे राज्य मंत्री बने । उत्पाद विभाग यानी शराब वाले विभाग का। यही से मोहन ने बहुत तेज छलांग लगाई। यह मंत्री की लाल बती गाडी से शराब व्यवसायियो के यहां जाकर पैसा वसूलता था। इसने उसी काल मे एक मकान खरीदा और वहां मसाज पार्लर खोला जहां कलकता से वेश्या लाकर वेश्यावर्‍ति कराई जाती है। यह उन वेश्याओं को अफ़सरो के पास जिनसे काम निकालना होता है उन्हे सप्लाई करता है। कैमरे मे अफ़सरो की नंगी विडियो बनाई जाती है और उसके आधार पर उन्हें ब्लैकमेल किया जाता है।

कुछ पार्षदो की भी न्यूड फ़ोटो और विडीयो इसके पास है। एक पार्षद जो सशक्त स्थायी समिति के सदस्य है उनकी नंगी तस्वीर मोहन बहुत सारे पार्षदो को दिखा चुका है। उक्त पार्षद  को एक बार बलात्कार के आरोप मे गिरफ़तार करने के बाद पुलिस ने गया शहर मे कमर मे रस्सा लगाकर घुमाया था।

उक्त पार्षद का नाम विनोद मंडल है और इसका एक भाई देवव्रत मंडल दैनिक जागरण का रिपोर्टर है। देवव्रत मंडल मोहन के लिये मीडिया को मैनेज करने का कार्य करता है । कुछेक पार्षदो का कहना है कि देवव्रत मंडल का भी न्यूड फ़ोटो इसके पास है। दैनिक जागरण मे देवव्रत की रिपोर्टिंग से भी पता चल जाता है कि वह पक्षपातपूर्ण है। मोहन को गया विधान सभा क्षेत्र से विगत विधान सभा चुनाव में कांग्रेस का टिकट मिला था , उस समय यह कांग्रेस का सदस्य भी नही था।

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कांग्रेसियो का मानना है कि टिकट के लिये इसने कांग्रेस के नेताओ को लडकी और पैसा दिया था। चुनाव मे यह बुरी तरह पराजित हुआ तथा इसे मात्र 7664   वोट मिला था। कांग्रेस के बी के हरि प्रसाद, वजीरगंज के पूर्व विधायक अवधेश सिंह, गया से एम पी का चुनाव लड चुके संजीव प्रसाद टोनी इसके मददगार माने जाते है। टिकट किस कारण से मिला यह सबको पता है। पटना मे भी इसका कालगर्ल सप्लाई का काम चलता है , वहां के एक  प्रसिद्ध होटल जो बहुत बडे राजनीतिग्य का है तथा वे कांग्रेस के एम एल सी रह चुके है और पिछली बार गया ग्रेडुयेट क्षेत्र से चुनाव लडे थे उनके होटल का उपयोग पटना मे अधिकारियो को लडकी सप्लाई करने के लिये किया जाता है । मोहन वहां रुकता है, अधिकारी वहां आते है, शराब और खुबसुरत लडकियां वहां लाइ जाती हैं।

विगत 25  दिसंबर को पुलिस ने मोहन के मसाज पार्लर जो वास्तव मे वेश्यालय है वहां छापा मारा। ३ लडकियां पकडाइ तथा वहां ढेर सारे साक्ष्य मिले जिससे जाहिर होता है कि उक्त पारलर का उपयोग वेश्याव्र्ति के लिये किया जाता है। वह मकान मोहन की पत्नी मनीषा श्रीवास्तव के नाम पर है तथा मोहन ने अपने विधान सभा चुनाव के समय शपथ पत्र मे उसका उल्लेख किया है। पुलिस ने मोहन पर कोई मुकदमा नही दर्ज किया है। रात भर मोहन के पक्ष मे वैसे राजनीतिग्य एवं बडे अधिकारी पैरवी करते रहे जिनका काला चिठ्ठा यानी न्यूड फ़ोटोग्राफ़ मोहन के पास है।

शायद इसी कारण से मुकदमा नही दर्ज हुआ है अन्यथा IMMORAL TRAFFIC PREVENTION ACT 1956  की धारा  3,4,5,5A, 6 & 7 के तहत यह अपराध कठोर दंड वाला है , अगर छोटी उम्र की बच्ची को इस व्यवसाय मे लाया गया है तो आजिवन कारावास का भी दंड है। पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज न किये जाने पर सबको आश्चर्य हो रहा है। आखिर कौन है वह राजनेता या अधिकारी जिसके कारण मुकदमा दर्ज करने से पुलिस डर रही है ? एक पार्षद जिसके पिता कभी पुलिस के दारोगा थे तथा उन्होने एक वेश्या को अपनी रखैल बनाया था , उससे [पैदा हुआ पुत्र पार्षद बन गया है, वह भी कोतवाली मे मोहन श्रीवास्तव की पैरवी करता हुआ दिखा।

…… (गया, बिहार से प्राप्त खबर)

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