‘एक्सपर्ट मीडिया न्यूज’ से बोले नालंदा एसपी- अब यूं जारी नही होगी प्रेस विज्ञप्ति

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नालंदा के एसपी सुधीर कुमार पोरिका ने कहा कि आगे से पुलिस विभाग की ओर से जो भी सूचनाएं सोशल साइट के ग्रुपों पर जारी की जायेगी, वे सक्षम अफसरों के पदनाम हस्ताक्षर से ही जारी किये जायेगें। 

इस संबंध में प्रस्तुत है एक्सपर्ट मीडिया न्यूज के प्रधान संपादक मुकेश भारतीय और नालंदा एसपी सुधीर कुमार पोरिका के बीच हुई बातचीत के प्रमुख अंश…..

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज:  आपने और डीएम साहब ने सोशल मीडिया पर बिना कोई पुष्ट सूचना के कोई चीज जारी न करे लेकिन आपके पुलिस विभाग की ओर से यह गलतियां की जा रही है। यहां तक कि आपके स्तर से, डीएसपी के स्तर तक प्रेस कांफ्रेस होने के बाबजूद न जाने किस स्तर से बिना किसी हस्ताक्षर व मुहर के व्हाट्सएप्प ग्रुपों पर जारी कर दिये जाते हैं, वह भी स्थानीय थाना स्तर से….. ?

नालंदा  एसपीः उदाहरण स्वरुप कुछ बताईये…

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज:  करायपरसुराय थाना क्षेत्र में पुलिस के हाथ एक अपराध पकड़ में आया। उसे लेकर डीएसपी हिलसा ने एक प्रेस कांफ्रेस किया। उसी कांफ्रेस की एक प्रेस विज्ञप्ति थाना प्रभारी द्वारा जारी व्हाट्सएप्प ग्रुप में किया गया। उस विज्ञप्ति में किसी न तो कोई हस्ताक्षर-मुहर है और न ही पदनाम। नालंदा में यह कोई एक मामला नहीं है। पुलिस विभाग में हर जगह यही हो रहा था और अभी भी जारी है। आपको नहीं लगा कि यह सब आपके ही आदेश के विपरित हो रहा है?

नालंदा  एसपीः …देखिये होता यह है कि सभी पत्रकार करायपरसुराय नहीं जा पाते हैं। है न। मीडिया वाले ही अनुरोध करता है कि जो भी हुआ है, इनफॉर्मली दीजिये। फार्मली तो हमलोग नहीं दे सकते हैं। इसके बहुत सारे कारण रहता है। जैसे कि एफआईआर में जो आ रहा है, वे फार्मल डॉक्यूमेंट आपस में बांट देते हैं। अब वहां कोई भी पदाधिकारी रहें, मैं रहुं या डीएसपी रहें या कोई भी पदाधिकारी रहें, वे प्रेसकेप्शन कर रहे हैं, वहां मीडिया के लोग बैठे रहते हैं, उन लोगों की सहुलियत के लिये उन्हें नोट दिया जाता है। क्योंकि उनलोगों से किसी का नाम छूट जाता है, घटना का विवरण छूट जाता है, ऐसा न हो, इसलिये किया जाता है। नालंदा में जो पुलिस ग्रुप है, मीडिया ग्रुप है, नालंदा प्रेस आदि है, उसमें लोग आपस में शेयर कर लेते हैं। ताकि किसी को किसी तरह के न्यूज न छुटे।

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज: किसी सक्षम पदाधिकारी द्वारा बिना अधिकृत सूचना का जारी होना और उसे ही मीडिया या आम जन द्वारा सही मान लेना…कहीं इसकी आड़ में कोई असमाजिक या सिरफरे लोग अफवाह की शक्ल भी तो दे सकते हैं…जैसा कि पहले भी कई मौको पर हो चुका है ?

नालंदा  एसपीः….इसके लिये डीपीआरओ सक्षम हैं। आप जैसे बोल रहे हैं…आगे से इस बात का ध्यान रखा जायेगा कि पुलिस विभाग और उनके सक्षम अफसर के द्वारा जो भी सूचना जारी हो, उसे पदेन हस्ताक्षरित आदि कर के ही जारी किया जाये।

 

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