इस बच्ची की कलम और पढ़ाई के प्रति ललक देख नम हो गई आँखें

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जिस इलाके में बन्दुक के रास्ते सत्ता पाने का दम्भ भरा जाता हो उस इलाके के बच्ची की कलम और पढ़ाई के प्रति ललक देख आज हर किसी की आँखें नम हो गई। घोर उग्रवाद प्रभावित इलाके लातेहार के महुआटांड़ की रहने वाली ये है शिल्पी खलखो।

दस साल की शिल्पी को दो साल पहले एक नर्स रांची काम करवाने लेकर आई थी। इस दौरान शिल्पी को कई बार प्रताड़ित किया गया। शिल्पी को स्कूल सिर्फ इसलिए भेजा जाता था ताकि वो एक वक्त का खाना घर में न खाये लेकिन खाना बचाने की नर्स की सोच ने शिल्पी की जिंदगी बदल दी।

शिल्पी आज सुबह नर्स के घर से भाग गई। घर से निकलते वक्त शिल्पी कुछ नहीं ली सिर्फ स्कूल ड्रेस पहनकर किताबों के साथ चल दी। बाल कल्याण समिति के पास पहुंची शिल्पी जितनी देर बैठी रही किताबों के पन्ने पलटते रही। जिसे देख सब हैरान थे।

शिल्पी पढ़ना चाहती है कुछ बनना चाहती है। शिल्पी रिम्स की वो माँ नहीं बनना चाहती जिसके सामने फर्श पर एहसान के भोजन परोसे जाते हैं।

शिल्पी में उस बेटी को मत ढुंढियेगा, जिसे हर दिन गर्भ में मार दिया जाता है बल्कि शिल्पी में सिंधु, दीपा, दीपिका, निक्की का चेहरा देखिएगा तो मन कहेगा शिल्पी के पढ़ने और दो वक्त की रोटी की व्यवस्था होनी चाहिए।

….. रांची से जी न्यूज में टीवी जर्नलिस्ट सन्नी शरद अपने फेसबुक वाल पर।

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