इंडिया टुडे की इस बेशर्मी पर चुप क्यों हैं काटजू

Share Button

आखिर इस देश के एक बड़े मीडिया हाउस के उत्पाद इंडिया टुडे न्यूज मैंगजिन का प्रकाशन-संपादन करने वाली टीम को किस श्रेणी में रखा जाये।

इसका बेहतर जबाब भारतीय प्रेस परिषद् के अध्यक्ष न्यायमूर्ति काटजू साहब ही दे सकते हैं। लेकिन इस मैगजिन का स्तर इतना गिर जायेगा, किसी ने सोचा भी न होगा। 

अगर कोई समाचार पत्र-पत्रिका सेक्स विशेषांकों का प्रकाशन करता है तो उसमें कोई बुराई नहीं हैं। किन्तु सेक्स सूचना के नाम पर मात्र नग्नता का चित्रण विकृत मानसिकता को ही रेखांकित करती है।

यदि हम पत्रकारिता में अश्लीलता निरोधक अधिनियम कानूनों की कसौटी पर भी आंकलन करें तो यह मैगजिन पूरी तरह  से उसकी चपेट में आ जाती है और कठोर दंडात्मक कार्रवाई की आवश्यकता जताती है। 

 इस बात  से इन्कार नहीं किया जा सकता है कि आज समाज में यौन अपराध की समस्या बिकराल रुप धारण करती जा रही है। इसका एक बड़ा कारण कामोत्तेजक सूचनाओं का तीव्र प्रचार है। और बात जब मीडिया की आती है तो उसकी जबाबदेही काफी बढ़ जाती है।

खासकर प्रिंट मीडिया की, जो शहर के चौक-चौराहों से लेकर गांव के गली-मोहल्लों तक सरेआम टंगी रहती है। बेची-खरीदी जाती है। अब क्या इसे भी व्यवसायिकता का दौर कह कर पचाया जा सकता है ?

…………. मुकेश भारतीय

Share Button

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Loading...