आलोचनाओं से घिरीं आज तक की अंजना ओम कश्यप ने यूं दिया जवाब

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“बिहार फ़िलहाल पत्रकारों के लिए एक्सक्लूसिव कवरेज करने और सिस्टम पर गुस्सा निकालने की वजह बना हुआ है। तमाम टीवी चैनलों के पत्रकार मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण सिंह मेडिकल कालेज अस्पताल का चक्कर लगाकर आ रहे हैं, जहाँ बच्चों का इलाज चल रहा है….”

राजनामा.कॉम (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क)। आजतक की स्टार एंकर अंजना ओम कश्यप भी मंगलवार को अस्पताल पहुंची थीं। यहां उन्होंने न केवल पीड़ित परिवारों का दर्द दिखाया, बल्कि राज्य सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किये।

अपनी स्टोरी को मार्मिक रूप देने के लिए अंजना बोलते-बोलते इमोशनल भी हुईं, कई दफा उनका गला भी भर आया। यहां तक सबकुछ ठीक था, लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसे लेकर सोशल मीडिया पर उन्हें जमकर निशाना बनाया जा रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि निशाना बनाने वालों में कोई और नहीं बल्कि अंजना की बिरादरी के लोग यानी पत्रकार ही हैं।

दरअसल, अंजना ने अपने सवाल-जवाब के लिए काफी देर तक ऑन ड्यूटी डॉक्टर को रोके रखा, उनसे बेहद तल्ख़ सवाल किये। वो शायद यह भूल गईं कि डॉक्टर के पास हर सवाल के जवाब नहीं हो सकते।

फिर भी अंजना को अपने सवालों के जवाब मिले, मगर उनका गुस्सा कम नहीं हुआ। जैसे ही डॉक्टर स्ट्रेचर पर ले जाए जा रहे एक मरीज की ओर मुड़े उन्होंने अफसरी अंदाज़ में कहा ‘अब जाकर क्या करियेगा, अभी-अभी मुख्यमंत्री यहां से गए हैं, तब ये हाल है। अगर मैं माइक ऑन नहीं करती साहब, तो आप एक घंटे तक मरीज को मुड़कर नहीं देखते’।

अंजना के इस अंदाज़ पर डॉक्टर भी खफा हो गए, उन्होंने भी गुस्से में कहा ‘क्या बात कर रहीं हैं आप, मैं राउंड पर था। क्या मैं यहां बैठा हूं’? इसके बाद भी अंजना अपने सवाल दागती रहीं। यही बात लोगों खासकर अन्य पत्रकारों को पसंद नहीं आ रही है।

वरिष्ठ पत्रकार सागरिका घोष ने अंजना ओम कश्यप के बारे में ट्वीट किया है ‘यह महिला लगातार पत्रकारिता को एक गलत नाम देती आ रही है। इन्हें आम नागरिकों को धमकाने और नेताओं की खुशामद करने के लिए पहचाना जाता है। बेहद निंदनीय’।

इसी तरह, एनडीटीवी की पत्रकार कादम्बनी शर्मा ने लिखा है ‘ICU में जाकर नौटंकी एंकरिंग करने से,डॉक्टरों पर चिल्लाने से अगर बच्चे ठीक हो जाते तो यही दवाई लिखी जाती। ऐसी रिपोर्टिंग ग़लत और घटिया है’।

वहीं, रोहणी सिंह ने डॉक्टर के साथ अंजना के दुर्व्यवहार के लिए आजतक से माफ़ी मांगने को कहा है। उन्होंने ट्वीट किया ‘मुझे लगता है कि @IndiaToday को अपनी स्टार रिपोर्टर द्वारा अस्पताल के डॉक्टरों के साथ किये गए बर्ताब के लिए माफी मांगनी चाहिए।

पत्रकारों को इस तरह की आक्रामकता उन क्रिकेट प्रेमी नेताओं के लिए बचाकर रखनी चाहिए, जो अस्पताल की बुनियादी सुविधाओं के लिए जिम्मेदार हैं। क्या डॉक्टर और नर्स अपनी पूरी कोशिश नहीं कर रहे हैं’।

अंजना पर निशाना साधने वालों में वरिष्ठ पत्रकार कंचन गुप्ता भी शामिल रहे। हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर अंजना का नाम नहीं लिया, लेकिन निशाने पर वही थीं।

उन्होंने ट्वीट किया ‘उन डॉक्टरों को परेशान करना जो कई रातों से सोये भी नहीं हैं, न तो मीडिया की स्वतंत्रता के तहत आता है और न ही ये मीडिया का अधिकार है। इंडिया टुडे ग्रुप के पत्रकार को आईसीयू में घुसकर डॉक्टर के मुंह पर माइक लगाकर उन बातों के बारे में स्पष्टीकरण मांगते देखना जिसके उसका कोई नाता नहीं, बेहद दुखदाई है।’

इसी तरह लेखक और पूर्व पत्रकार Shubhrastha ने भी अंजना को खरी-खोटी सुनाई हैं। उन्होंने लिखा है ‘तुम्हें शर्म आनी चाहिए अंजना। जिस तरह तुमने अस्पताल के डॉक्टर और नर्सों के साथ व्यवहार किया वह देखकर मुझे बहुत गुस्सा आया। यह पत्रकारिता के मुंह पर तमाचे की तरह है।’

डॉक्टर कफील खान ने भी अंजना के अंदाज़ पर ऊँगली उठाई है। उन्होंने लिखा है ‘यह @aajtak @anjanaomkashyap रिपोर्टिंग है। इस तरह का मीडिया डॉक्टर के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देता है। क्या बुनियादी सुविधाएं प्रदान करना भी अब डॉक्टर की जिम्मेदारी है? डॉक्टर मरीज का अनुपात देखें? 100 मरीजों के भर्ती होने पर 1 डॉक्टर क्या कर सकता है’?

अपने ऊपर हो रहे लगातार हमलों का अंजना ने भी अब जवाब दिया है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें आलोचनाओं की कोई परवाह नहीं और जो उन्होंने किया वह बार-बार करती रहेंगी।

अंजना ने ट्वीट करके कहा है कि ‘अस्पताल में अप्रबंधन और बेरुखी का सच सामने लाना ज़रूरी था,है,रहेगा। ICU में आए बच्चों को अटेंडे करना ज़रूरी था,है,रहेगा। प्रोपोगेंडा वाले आज 108 बच्चों की मौत भूल गए। डॉक्टर के लिए मगरमच्छी सहानुभूति दिखाने वालों, हेकलिंग का प्रपोगैंडा बंद करिए,फिर याद दिला दूँ-अब तक 108 बच्चों की मौत हो चुकी है।’

अब यहाँ कौन सही है और कौन नहीं यह बहस का मुद्दा हो सकता है, लेकिन इतना ज़रूर है कि अंजना को अफसरों की तरह पेश नहीं आना चाहिए था। पत्रकार सवाल कर सकता है, यह उसका अधिकार है, लेकिन सवाल पूछने की भी मर्यादा होती है।

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