हरिवंश जी, आपके ठेगें पर क्यों है प्रेस कानून

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राजनामा.कॉम (मुकेश भारतीय) । दैनिक प्रभात खबर के स्वंयभू प्रधान संपादक हरिवंश सिंह नैतिकता और पत्रकारिता के बड़े-बड़े दावे करते हैं। उन्होंने तो इसके लिये एक मीडिया स्कूल भी खोल रखा है, जो बीस हजार रुपये की मोटी फीस लेकर पीजी डिप्लोमा इन मास कम्यूनिकेशन की डिग्री भी प्रदान करती है। ऐसे में एक अहम सबाल उठता है कि झारखंडी पत्रकारिता के इस बागड़ बिल्ले को बाकई “ जर्नलिज्म एथिक्स ” का रत्ती भर ज्ञान है ? या फिर उनके सारे एथिक्स दूसरे के लिये ही बना है।

आप आज का दैनिक प्रभात खबर अखबार को हाथ में लीजिये। प्रमुख पृष्ठ से लेकर अंदर के पेजों पर ऐसे विज्ञापनों की भरमार है, भारतीय संविधान के तहत मिले वाक्य व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों के घोर उलंघन ही नहीं है बल्कि,इंडियन न्यूज पेपर सोसाइटी, डीएवीपी, एडवरटाइजिंग स्टैंडर्स कांसिल ऑफ इंडिया एवं एडवरटाइजिंग ऐसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा तय आचार संहिता की भी धज्जियां उड़ाता है।

माना कि प्रायः सभी समाचार पत्र ऐसा कर रहे हैं.लेकिन, हरिवंश जी या उनकी पेडियाज टीम दूसरों की नंगई का उदाहरण देकर खुद की नंगई को उचित नहीं ठहरा सकते।

आइये हम नजर डालते हैं कुछ उन प्रमुख विज्ञापन आचार संहिताओं पर, जिसके उलंधन पर किसी भी समाचार-पत्रिका के संपादक- मालिक-प्रकाशक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किये जाने के प्रावधान हैः

1)      विज्ञापन किसी की नैतिकता को आघात न पहुंचाती हो।

2)      धर्म या राजनीति से संबधित विज्ञापन न हो।

3)      विज्ञापन संदेश समाचार के रुप में न हों।

4)      विज्ञापन किसी चिट फण्ड कर्जदाताओं के न हो।

5)      निजी क्षेत्र के बचत या लॉटरी के विज्ञापन ।

6)      शादी-विवाह कराने वाली एजेंसियों के विज्ञापन ।

7)      गैर लाईसेंस प्राप्त रोजगार सेवाओं के विज्ञापन।

8)      भविष्यवाणियां और सम्मोहन आदि का दावा करने वाले विज्ञापन।

9)      विदेशी बैंकों और विदेशी वस्तुओं के विज्ञापन।

10) किस्मत के खेल आदि के विज्ञापन।

11) किसी बुराई या कमी से ग्रसित विज्ञापन।

12)जादुई इलाज का दावा करने वाले विज्ञापन।

13) बच्चों पर बुरा प्रभाव डालने वाले विज्ञापन। ….आदि

उपरोक्त तरह के विज्ञापन के प्रकाशित करने और उसकी शिकायत करने पर संविधान में दंडित किये जाने के प्रावधान है। ऐसे में क्या हरिवंश सिंह सरीखे वरिष्ठ और घाघ पत्रकार को विज्ञापन संबंधी इन कानूनों की जानकारी नहीं है। अगर है तो वे अपनी दोगली मानसिकता का परिचय क्यों दे रहे हैं ? क्या वे इतने प्रभावी हैं कि कानून उनके जैसों के ठेगें पर है ?  …. मुकेश भारतीय

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One comment

  1. in sari bato se se ye saaf ho jata hai ke,hariwansh singh jaise log ne jharkhand ko banj bana diya hai.or yahi karan hai aaj 12 sal bitne ke bad bhe aaj jharkhand bad se badter hota ja raha hai,in logo ko jharkhand ke janta se kuch bhe lene dena nahi hai.hame hamesa add milta rahe or uska paisa milta rahe or nahi to ye apne kalam ke dam per use barbad kar dete hai……jaise aaj nirmal baba

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