जद(यू) में दिखेगी राजद की “राम-श्याम” की जोड़ी ?

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कभी राजद  सुप्रीमों लालू प्रसाद के लिये “राम-श्याम की जोड़ी” के नाम से मशहुर रामकृपाल यादव व श्याम रजक की जोड़ी एक बार फिर से बन सकती है।

राजद के सत्ताकाल में राजद के हर कार्यक्रम में लालू-राबड़ी के दाएं-बाएं रहने वाली यह जोड़ी तब टूट गई थी, जब श्याम रजक ने 2005 का फुलवारी से विधानसभा चुनाव हारने के बाद लालू का साथ छोड़ नीतीश कुमार की पार्टी जदयू का दामन थाम लिया था। इसी के साथ ‘राम’ और ‘श्याम’ की जोड़ी भी टूट गई थी।

इधर लोकसभा सीट बंटवारे को लेकर राजद और लालू से नाराज चल रहे रामकृपाल की बगावत के बाद ‘राम’ और ‘श्याम’ की जोड़ी एक बार फिर से बनने की उम्मीद प्रबल हो गई है।

shyam rajakram-kripal-yadavकहते हैं कि रामकृपाल लगातार अपने पुराने मित्र श्याम रजक के संपर्क में हैं और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनकी कई बार बात भी हो चुकी है। ऐसे रामकृपाल पर भाजपा भी डोरे डाल रही है पर रामकृपाल उस पार्टी में नहीं जाना चाहते,जिस पार्टी और जिस पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी का उन्होंने सांप्रदायिकता के नाम पर लगातार मुखालपत किया है।

हालांकि जदयू ने जहां इस बार रंजन यादव की जगह दीघा की विधायक पूनम देवी को टिकट देने का मन बनाया था। वहीं भाजपा ने राजद से भाजपा में शामिल हुए विधान पार्षद नवलकिशोर यादव को टिकट देने की मंशा पाल रखी थी। क्योंकि पिछले परिसीमन के बाद ही बिहार के सबसे बड़े यादव बहुल मतदाता क्षेत्र के रुप में तब्दील हो गया। पाटलिपुत्र संसदीय क्षेत्र से भाजपा भी यादव कार्ड खेलने के ही चक्कर में है। इससे पहले यादव मतदाताओं की सबसे ज्यादा संख्या मधेपुरा में थी।

 पिछले दिन जिस तरह से लालू यादव की पुत्री और पाटलिपुत्र की राजद उम्मीदवार मीसा भारती और दो विधायक रामानंद यादव और भाई विरेन्द्र ने प्रेस में बयान दिया, उससे जाहिर है कि राजद ने रामकृपाल यादव के लिए अपनी पार्टी के दरवाजे लगभग बंद कर दिए हैं।

यदि रामकृपाल अगर जदयू में मिलते हैं तो संभव है कि जदयू वर्तमान सांसद रंजन यादव का टिकट काटकर उन्हें पाटलिपुत्र से अपना प्रत्याशी बना दे क्योंकि, जदयू द्वारा कराए गए गोपनीय सर्वे में इस बार रंजन यादव को हार जाने की आशंका प्रकट की गई है।

इस सर्वे में यह भी कहा गया है कि पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र के अधिकांश सवर्ण मतदाता रंजन यादव के खिलाफ हैं। रामकृपाल अगर अभी पार्टी भी छोड़ते हैं तो उनकी राज्यसभा की सांसदी नहीं जा सकती क्योंकि राज्यसभा में राजद के दो ही सांसद हैं प्रेमचंद गुप्ता और रामकृपाल यादव।

राज्यसभा में अगर राजद के तीन सांसद होते और रामकृपाल अकेले पार्टी छोड़ते तो 2/3 की संख्या नहीं बनने के आधार पर उनकी राज्यसभा की सांसदी जा सकती थी,पर दो सांसदों के कारण इस मामले में तकनीकी पेच फंस सकता है। अगर रामकृपाल राजद छोड़ते हैं और जदयू उन्हें पाटलिपुत्र से उम्मीदवार बनाने का वचन देती है तो वह नैतिकता के आधार पर राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा भी दे सकते हैं। 

स्रोतः विनायक विजेता की  फेसबुक वाल

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