राजनीतिक जीवन के सबसे कठिन दौर में लालू

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Lalu_Prasadलालू प्रसाद अपने राजनैतिक कैरियर के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं। एक और जहां 30 सितम्बर को चारा घोटाले पर फैसला आने वाला है वही दूसरी और घर में ही सत्ता पर काबिज होने को लेकर जंग छिड़ा गया है।पार्टी के बचाये रखना इनके लिए बड़ी चुनौती बन हुई है। कानून के जानकार मानते हैं कि लालू प्रसाद का जेल जाना तय है ।

ऐसी स्थिति में पार्टी का बागड़ोर किसके हाथ में रहे इसको लेकर संशय कि स्थिति बनी हुई है। लालू के घर में ही तीन तीन दावेदार है मीसा भारती,तेज प्रताप और तैजस्वी बीच में राबड़ी हैरान है। दूसरी स्थिति यह है कि अब्दुलबारी सिद्दकी और रघुवंश सिंह को पार्टी का कार्यकारी प्रमुख बनाया जाये लेकिन इसको लेकर पार्टी में विरोध है।

हलात इतनी गम्भीर हो चुकी है कि लालू प्रसाद रात रात भर सो नही रहे।राजनैतिक विचारक मानते हैं कि लालू प्रसाद के राजनैतिक कैरियर का यह सबसे कठिन दौर है और इससे उबर गये तो फिर लालू उसी पूराने रंग में दिखेगे। लालू पर कसा कानूनी शिकंजा चायबासा ट्रेजरी से करोड़ो रुपये की अवैध निकासी मामले में कल रांची के सीबीआई कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गयी है और 30 सितम्बर को सीबीआई की विशेष कोर्ट इस मामले में अपना फैसला सुनायेगी।

कोर्ट का जो रुख है और फिर लालू प्रसाद के खिलाफ जितने सबूत कोर्ट के सामने मौंजूद है उस स्थिति में कानून के जानकार मानते है कि लालू प्रसाद को कम से कम पांच वर्ष की सजा मिलेगी ही।फिर जेल से निकलने में कम से कम चार से पांच माह का समय लग ही जायेगा, क्योकि सीबीआई कोर्ट के फैसले के खिलाफ लालू प्रसाद हाईकोर्ट जायेगे फिर बेल फाईल करेगे बहुत मुश्किल है बाहर निकलना। पार्टी के कमान को लेकर चल रहा है घमासान । पार्टी टूट के कगार पर लालू प्रसाद पार्टी को एकजूट रखने के लिए पिछले दिनो एक बैंठक बुलाई थी जिसमें पार्टी के सभी वर्तमान और पूर्व विधायक के साथ साथ वर्तमान और पूर्व सांसद के साथ साथ पार्टी के वरिष्ठ नेताओ को उपस्थित रहने को कहा गया था।

पिछले कई बैंठक और रैली से दूर रहे जगतानंद सिंह इस बार भी बैंठक में शामिल नही हुए वही प्रभुनाथ सिंह भी इस बैंठक में नही आये रघुवंश सिंह भी काफी देर से पहुंचे।ये उम्मीद की जा रही थी कि लालू प्रसाद जेल के दौरान पार्टी के संचालन के लिए कोई कमिटी बनायेगे। लेकिन ऐसा नही हुआ पार्टी के वरिष्ठ नेता को दो दो या फिर तीन तीन लोकसभा क्षेत्र का प्रभारी बना दिया गया और पूरे कार्यक्रम के दौरान दोनो बेटा उछल कूद करते रहे। राजनैतिक टिकाकार मानते हैं कि लालू प्रसाद के जेल जाने के बाद उनके समर्थको में और जोश बढेगा लेकिन पार्टी को एक जुट रखना बहुत ही मुश्किल माना जा रहा है।

ऱघुवंश सिंह पर सभी वर्गो की सहमति है लेकिन ऱधुनाथ झा जैसे पार्टी के नेता इसका विरोध कर रहे हैं लेकिन सबसे बड़ा विरोध घर में ही चल रहा है। बेटी मीसा भारती की अपनी राजनैतिक महात्वाकंक्षा पनप रहा है जय प्रकाश यादव जैसे नेता मीसा के साथ है वही तेजस्वी और तेज प्रताप को घर के अंदर ही बहन और बोहनोउ का अलग अलग समर्थन है राबड़ी तय नही कर पा रही है कि किसके साथ जाये स्थिति बेहद गम्भीर हो गयी है ।

लालू प्रसाद को डर सता रहा है कि इनके जेल जाते ही परिवार के अंदर चल रहे राजनैतिक गुटबंदी कही सड़क पर ना आ जाये। परिवार को कमान मिला तो पार्टी का टूटना तय फिलहाल कोशिश ये हो रही है कि परिवार में पहले एकता बनाया जाये और किसी एक के नाम पर सहमति बन जाये क्यो राबड़ी को लेकर खतरा यह है कि फिर साधु और सुभाष वाली स्थिति ना बन जाये कोई बेटा आये तो कुछ कहलवा ले दूसरा बेटा आये को कुछ और ही कहलवा ले ऐसी स्थिति में पार्टी को सम्भाल कर रख पाना बहुत ही मुश्किल है।वही किसी बेटे के हाथ पार्टी का कमान सौपा गया तो पार्टी का टूटना तय है।

अब्दुबारी सिद्दकी,जगतानंद सिंह,प्रभुनाथ सिंह,रघुंबस सिंह जैसे कई बड़े नेता पार्टी छोड़ सकते हैं।कहा यह जा रहा है कि जगतानंद सिंह और प्रभुनाथ सिंह नीतीश कुमार को लेकर थोड़े नरम पडे है और नीतीश कुमार की और से अंदर अंदर बड़ी कोशिश हो रही है कि अब्दुलबारी सिद्दकी,जगतानंद सिंह,प्रभुनाथ सिंह,ऱघुवंस सिंह जैसे बड़े नेता को तोड़ा जाये।इस स्थिति में लालू प्रसाद का कोई एक गलत फैसला राजनीत के हासिए पर पहुंचा सकता है।

पार्टी टूटी तो फिर बिहार में गठबंधन का बन सकता है नया समीकरण राजद टूटा तो फिर बिहार में नया समीकरण बन सकता है। वामपंथी पहले ही नीतीश के साथ चुनाव लड़ने का औपचारिक घोषणा भी कर दिया है। कांग्रेस के साथ नीतीश की डील अंदर ही अंदर चल ही रही है और डील हो गयी तो लोजपा को कांग्रेस साथ ले आयेगा और ऐसी स्थिति में लालू अकले पड़ जायेगे और ऐसी स्थिति बनी तो लालू राजनीत के हासिए पर चले जायेगे और इसकी पूरी भनक लालू प्रसाद को भी है लेकिन, यह सब कुछ जानते हुए भी आज उनके हाथ कोई तुरुप का पत्ता दिख नही रहा है।  ……… बिहार ऑब्जर्वर

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