अनुचित है रांची कॉलेज का नाम बदलना

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-: नवीन शर्मा :-

राज्य के सबसे पुराने कालेज रांची कालेज का नाम बदल कर डाक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय कर दिया गया है। यह निर्णय किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं लगता है।

मेरा दृढ़ता से मानना है कि किसी भी पुराने संस्थान के नाम से लोगों की भावना जुड़ी होती है उसका अपना एक इतिहास होता है। उस संस्थान से जुड़े लोगों का उस संस्थान से एक तारत्मय बना होता है उसे बिना किसी वाजिब कारण के तोड़ना अनुचित है। रांची कॉलेज नाम में कोई बुराई तो नहीं है।

ऐसा भी नहीं है कि वाराणसी या प्रयाग की तरह किसी शासक ने नाम बदल दिया हो तो उसे फिर से पुराना नाम दिया जा रहा है। 1926 में जब से कालेज बना है तब से यह रांची कॉलेज के नाम से ही लोगों के जहन में अंकित है।

ऐसे में मुझे तो यह नाम परिवर्तन कहीं से भी उचित नहीं लगता है। वैसे भी डाक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी का इस संस्थान से कोई कनेक्शन रहा हो ऐसी जानकारी मुझे तो नहीं है।

वैसे भी कांग्रेस पार्टी ने अपने करीब साठ बरस के.शासन में पूरे देश भर के सरकारी संस्थानों के नामों में गांधी, नेहरू, इंदिरा और राजीव गांधी का नाम इस तरह थोप रखा है कि कभी कभी सोचता हूं कि इन चंद नामों के अलावा भी हमारे विशाल देश में प्रतिभावान और समाज में योगदान करने वाले व्यक्ति नहीं हुए हैं क्या?  अब भाजपा की सरकार भी वही कांग्रेस वाली गलती दोहरा रही है।

मेरा मानना है कि अगर अपनी पसंद का नाम रखने का इतना शौक है तो नई संस्थाओं का निर्माण करने की जहमत उठाइए। इससे समाज और राष्ट्र का भी भला होगा। प्राचीन और गौरवशाली संस्थाओं के नाम बदलने का शार्टकट तरीका ठीक नहीं है।

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