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Monday, May 17, 2021
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    सेबी ने एनडीटीवी के प्रमोटर्स पर लगाया 27 करोड़ रुपए का जुर्माना

    राजनामा. कॉम। बाजार नियामक सेबी ने एनडीटीवी के प्रमोटर्स प्रणय रॉय और राधिका रॉय के साथ-साथ आरआरपीआर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड पर 27 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। आरआरपीआर होल्डिंग नई दिल्ली टेलीविजन लिमिटेड (एनडीटीवी) की प्रमोटर संस्था है।

    यह जुर्माना कुछ कर्ज समझौतों के बारे में शेयरधारकों से जानकारी छिपाकर विभिन्न प्रतिभूति नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में लगाया गया है।

    एनडीटीवी ने शेयर बाजारों को भेजी सूचना में कहा है कि एनडीटीवी के फाउंडर व प्रमोटर्स प्रणय रॉय और राधिका रॉय व प्रमोटर कंपनी आरआरपीआर होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड सेबी के आदेश के खिलाफ तुरंत अपील करेगी।

    सेबी के मुताबिक, सेबी अधिनियम की धारा 15एचए के तहत रॉय दंपती और आरआरपीआर होल्डिंग पर 25 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया है, जिसे ये तीनों संयुक्त रूप से आदेश प्राप्ति के 45 दिनों के भीतर जमा कराएंगे।

    इसके साथ ही प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 के तहत प्रणय और राधिका रॉय से 1-1 करोड़ रुपए का अतिरिक्त जुर्माना भी वसूले जाने का निर्देश दिया गया है।

    सेबी के 52 पेज के आदेश के अनुसार, कई कर्ज समझौतों में ऐसी शर्तें शामिल की गई हैं, जो एनडीटीवी शेयरधारकों के निजी हितों पर बुरा प्रभाव डालती हैं।

    एनडीटीवी ने कहा कि एनडीटीवी के फाउंडर्स और प्रमोटर्स प्रणय रॉय और राधिका रॉय व प्रमोटर कंपनी आरआरपीआर होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड ने बार-बार यह कहा है कि उन्होंने किसी भी लेन-देन अथवा समझौते के जरिए प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से एनडीटीवी का नियंत्रण हस्तांतरित करने की अनुमति नहीं दी है।

    दी गई सूचना में कहा गया है कि वह एनडीटीवी की चुकता शेयर पूंजी में अब भी 61.45 प्रतिशत हिस्सेदारी के धारक हैं।

    सेबी के गुरुवार को पारित आदेश के बारे में एनडीटीवी की ओर से कहा गया कि कंपनी के प्रमोटर्स और प्रमोटर ग्रुप कंपनी आदेश के खिलाफ तुरंत अपील करेगी।

    सेबी का आदेश कंपनी के फाउंडर्स और प्रमोटर कंपनी ग्रुप द्वारा 2008-2010 के दौरान विश्वप्रधान कमर्शियल प्रा.लि. और आईसीआईसीआई बैंक के साथ किए गए कर्ज समझौतों के बारे में कथित तौर पर खुलासा नहीं किए जाने पर आधारित है।

    एनडीटीवी द्वारा शेयर बाजारों को भेजी सूचना में यह भी कहा गया है कि कंपनी का नियंत्रण कथित तौर पर छोड़ दिए जाने का मामला अभी प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण में लंबित है।

    इस मामले में न्यायाधिकरण ने 2019 में एनडीटीवी संस्थापकों के पक्ष में स्थगन दिया हुआ है। यह स्थगन अभी भी लागू है।

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