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    सुदर्शन टीवी का विवादित शो देखने से सुप्रीम कोर्ट का इंकार, कहा- ‘हम सेंसर बोर्ड नहीं हैं’

    “सुप्रीम कोर्ट ने सुदर्शन न्यूज चैनल के विवादित शो के सभी एपिसोड्स देखने से इनकार कर दिया है। दरअसल सरकारी नौकरी में मुस्लिमों के घुसपैठ का दावा करने वाले इस शो को लेकर आपत्ति जताते हुए लोगों ने याचिका दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसके 6 एपिसोड पर रोक लगा दी थी…

    राजनामा.कॉम। सुप्रीम कोर्ट ने सुदर्शन टीवी का विवादित कार्यक्रम देखने के इनकार कर दिया है। दरअसल सुदर्शन टीवी के एक शो को लेकर विवाद हो गया और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।

    इस शो में चैनल के प्रमुख ‘सरकारी नौकरियों में मुस्लिमों की घुसपैठ’ का दावा कर रहे थे। इसके लिए ‘UPSC जिहाद’ शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इसके 6 एपिसोड पर रोक लगा दी थी।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर 700 पन्नों की किताब के खिलाफ कोई याचिका हो तो वकील यह दलील नहीं देते कि जज पूरी किताब को पढ़ें।

    जामिया के 3 छात्रों के वकील शादान फरासत ने कहा- सरकार भूमिका निभाने में असफल रही है, हम सुप्रीम कोर्ट की तरफ देख रहे हैं, सुदर्शन TV के वकील ने जो कहा है सुप्रीम कोर्ट उसे नोट करें।

    फरासत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में हेट स्पीच पर नियम बनाने को कहा था। लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था घृणास्पद भाषण पर प्रावधान एक डीड लेटर नहीं होना चाहिए। यह अभी भी डीड लेटर बना हुआ है।

    फरासत ने कहा कि कार्यक्रम अगर हेट स्पीच नहीं तो क्या है? मुसलमानों को UPSC में घुसपैठिया बताया जा रहा है, ब्यूरोक्रेट बनने को भारत पर कब्जे की साज़िश बताया जा रहा है, कार्यक्रम में असदुद्दीन ओवैसी और दूसरे लोगों को नमकहराम, गद्दार कहा जा रहा है।

    जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने अकबरुद्दीन ओवैसी, इमरान प्रतापगढ़ी के भाषणों को भी आपत्तिजनक बताया।

    फरासत ने कहा कि उनके बयान के हिस्से आक्रामक लग सकते हैं, लेकिन संदेश में गलती नहीं जस्टिस मल्होत्रा ने कहा कक सुदर्शन के वकील भी कह चुके हैं कि कार्यक्रम समुदाय के खिलाफ नहीं, विदेशी साज़िश के खिलाफ है।

    सुप्रीम कोर्ट ने सुदर्शन न्यूज के वकील से कहा था कि वह पत्रकारिता के बीच में नहीं आना चाहता।

    जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि वह जानते हैं कि आपातकाल के दौरान क्या हुआ था। उन्होंने कहा, ‘हम सेंसर बोर्ड नहीं हैं, जो कि सेंशरशिप करें।’ उन्होंने कहा कि जब हम मीडिया का सम्मान करते हैं तो उनका भी दायित्व है कि किसी खास समुदाय को निशाना न बनाया जाए।

    कोर्ट में सुदर्शन न्यूज ने दूसरे चैनलों का हवाला देते हुए बताया था कि उनपर आतंकवाद से संबंधित कार्यक्रम चलते हैं।

    सुप्रीम कोर्ट ने जानना चाहा कि क्या वह कार्यक्रम में बदलाव करने को तैयार है? कोर्ट ने नमाजी टोपी में मुस्लिम शख्स को दिखाए जाने पर भी आपत्ति की थी।

    हालांकि सुदर्शन टीवी ने इस बात से इनकार कर दिया था कि वह पूरे समुदाय को निशाना बना रहा है।

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