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सीएम और गवर्नर को सरेआम गाली देता है शिबू सोरेन का पीए

shibu PA
आज झारखंड मुक्ति मोर्चा के सुप्रीमों शिबू सोरेन के पीए विवेक का रसुख क्या है। यदि आपको इसका आंकलन करना है तो शिबू सोरेन उर्फ गुरुजी के मोहराबादी स्थित आवास चले जाइये।
शुरुआती दौर में गुरुजी के बड़े पुत्र स्व. दुर्गा सोरेन का ड्राइवर… उसके बाद छोटे पुत्र हेमंत सोरेन (वर्तमान उप मुख्यमंत्री) का ड्राइवर…उसके बाद गुरुजी की शरण में…उसके बाद गुरुजी जी की कृपा से पा ली झारखंड विधान सभा में नौकरी…फिर गुरुजी का बन गया सरकारी पीए।
बस इतना सा ही सफर है विवेक का। यह कभी भी झामुमो पार्टी का छोटे या बड़े पद पर नहीं रहा। लेकिन आज इसका बोलबाला देखिये कि ये शख्स सरेआम सीएम और गवर्नर को गालियां देता है। डिप्टी सीएम को दलाल शब्द से विभूषित करता है। वरीय पार्टी कार्यकर्ताओं को भींगे कपड़ों की तरह निचोड़ डालता है।
देखिये सबसे बड़ा आश्चर्य। वह गाल ठोक कर करता है तब…जब सामने गुरुजी बैठे हों और सब कुछ करीब से सुन रहे हों। फिर भी कोई रोक ठोक नहीं। मानो गुरुजी इ सरकारी महारथी के सामने बिल्कुल लाचार और असहाय।
कहने वाले यहां तक कहते हैं कि कभी चाकरी करने वाले विवेक ने गुरुजी को मानसिक तौर पर गुलाम बना लिया है। पार्टी में भी वही होता है , जैसा विवेक चाहता है। विवेक की महात्वाकांक्षा चुनाव लड़ने की है।
अब जरा संलग्न विडियो को गौर से देखिये और खुद आंकलन कीजिये।..http://youtu.be/0GRv_xGtJE4

Raznama / Mukesh bhartiy

वरीय पत्रकार मुकेश भारतीय (Mukesh Bhartiy) पिछले 35 वर्षों से समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं। उन्हें समसामयिक राजनीतिक घटनाओं, सामाजिक मुद्दों और क्षेत्रीय समाचारों पर गहरी समझ और विश्लेषणात्मक अनुभव है। उनका लक्ष्य ताज़ा घटनाओं, विश्वसनीय रिपोर्टिंग और प्रासंगिक दृष्टिकोण को पाठकों तक निष्पक्ष रूप से पहुँचाना है। एक्सपर्ट मीडिया न्यूज़ (Expert Media News) सर्विस द्वारा प्रकाशित-प्रसारित राज़नामा (Raznama) के माध्यम से वे मीडिया आधारित स्थानीय, क्षेत्रीय और समसामयिक मुद्दों पर आधारित खबरें और विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं, जो बदलते सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य को समझने में पाठकों की मदद करते हैं। वे मानते हैं कि स्थानीय पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी और जनहित के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ मीडिया और स्वच्छ लोकतांत्रिक व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके।