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‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ ने हाथरस में पत्रकारों पर हमले की निंदा करते हुए कहा….!

राजनामा.कॉम। हाथरस गैंगरेप मामले को कवर कर रहे पत्रकारों के साथ यूपी सरकार के प्रशासन ने जिस तरह से बदसलूकी की, उसकी एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने निंदा की है।

हाथरस गैंगरेप मामले को कवर कर रहे पत्रकारों के साथ यूपी सरकार के प्रशासन ने जिस तरह से बदसलूकी की, उसकी एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने निंदा की है।

INDIA EDITOR GILDS ON HATHRAS 2बता दें कि यूपी के हाथरस जिले में बीते 14 सितंबर को कथित गैंगरेप की वारदात सामने आई थी। करीब 15 दिनों बाद दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में पीड़िता की मौत हो गई। उसके बाद शव को जबर्दस्ती जलाने और परिवार को धमकाने के आरोप वहां के स्थानीय प्रशासन पर लगे।

इसके बाद जिला प्रशासन ने मीडिया के आने पर प्रतिबंध लगा दिया था। दो दिनों तक लगे प्रतिबंध के बाद शनिवार को ये प्रतिबंध हटा लिया गया था।

लेकिन इस दौरान हाथरस केस को कवर कर रहे पत्रकारों के साथ पुलिस द्वारा बदसलूकी की कई खबरें सामने आईं, जिसकी एडिटर्स गिल्ड ने कड़ी निंदा की है।

गिल्ड ने अपने बयान में यह भी कहा कि  इससे भी बुरा ये है कि पत्रकारों की बातचीत टैप की गई और उन्हें लीक किया गया, जिससे उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर कैंपेन चला।

गिल्ड ने अपने बयान में आगे कहा कि यूपी सरकार की ये हरकतें मीडिया के काम करने में बाधा हैं और सरकार से मांग की है कि हाथरस में रिपोर्टिंग के पक्ष में माहौल बनाया जाए।

गिल्ड ने आगे कहा कि हस्तक्षेप करने के मामले में हाथरस सबसे बुरा मामला है लेकिन गिल्ड ये भी मानता है कि मीडिया पर ऐसे हमले हाल के महीनों में ट्रेंड का हिस्सा बन गए हैं। कुछ और राज्य भी पत्रकारों के उत्पीड़न में शामिल रहे हैं।

Raznama / Mukesh bhartiy

वरीय पत्रकार मुकेश भारतीय (Mukesh Bhartiy) पिछले 35 वर्षों से समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं। उन्हें समसामयिक राजनीतिक घटनाओं, सामाजिक मुद्दों और क्षेत्रीय समाचारों पर गहरी समझ और विश्लेषणात्मक अनुभव है। उनका लक्ष्य ताज़ा घटनाओं, विश्वसनीय रिपोर्टिंग और प्रासंगिक दृष्टिकोण को पाठकों तक निष्पक्ष रूप से पहुँचाना है। एक्सपर्ट मीडिया न्यूज़ (Expert Media News) सर्विस द्वारा प्रकाशित-प्रसारित राज़नामा (Raznama) के माध्यम से वे मीडिया आधारित स्थानीय, क्षेत्रीय और समसामयिक मुद्दों पर आधारित खबरें और विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं, जो बदलते सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य को समझने में पाठकों की मदद करते हैं। वे मानते हैं कि स्थानीय पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी और जनहित के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ मीडिया और स्वच्छ लोकतांत्रिक व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके।