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न्यूज पोर्टल पर एफआईआर पर प्रेस काउंसिल का स्वतः संज्ञान, सरकार से मांगा जवाब

राज़नामा डेस्क। उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक न्यूज पोर्टल ने कोरोना काल में होमगार्डों का दर्द उजागर किया तो पुलिस के एक अधिकारी ने न्यूज पोर्टल के संपादक पर एफआईआर दर्ज करा दिया था।

raznamaइस मामले को प्रेस काउंसिल आफ इंडिया ने स्वत: संज्ञान में लिया है और उत्तर प्रदेश शासन से जवाब मांगा है। प्रेस काउंसिल द्वारा की गई इस कार्यवाही का न्यूज पोर्टल संचालकों ने स्वागत किया है।

बता दें कानपुर से आशीष अवस्थी ‘मीडिया ब्रेक’ नाम से न्यूज पोर्टल का संचालन करते हैं। 8 मई 2020 को उन्होंने कोरोना काल में होमगार्डों का क्या दर्द है, इस पर एक स्टोरी प्रकाशित की।

अवस्थी ने उसका शीर्षक दिया था- ‘पुलिस चाट रही मलाई, होमगार्ड के साथ बेवफाई, बड़ा भेदभाव है भाई’। इस स्टोरी के प्रकाशन से पुलिस महकमा नाराज हो गया।

11 मई 2020 को बाबू पुरवा थाने के एसएचओ राजीव सिंह ने न्यूज पोर्टल के संपादक आशीष अवस्थी पर भादवि की धारा 501, 505, आईटी एक्ट 67, महामारी अधिनियम 3 के तहत प्राथमिकी दर्ज करा दी।

न्यूज पोर्टल के संपादक पर दर्ज कराये गये इस मामले को प्रेस काउंसिल आफ इंडिया ने स्वत: सज्ञान में लिया है।

प्रेस काउंसिल के अध्यक्ष जस्टिस सीके प्रसाद ने इस मामले में 20 मई 2020 को उत्तर प्रदेश शासन को पत्र लिखकर जवाब मांगा है।

प्रेस काउंसिल द्वारा उठाये गये इस कदम का देश भर में न्यूज पोर्टल संचालकों ने स्वागत किया है।

Raznama / Mukesh bhartiy

वरीय पत्रकार मुकेश भारतीय (Mukesh Bhartiy) पिछले 35 वर्षों से समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं। उन्हें समसामयिक राजनीतिक घटनाओं, सामाजिक मुद्दों और क्षेत्रीय समाचारों पर गहरी समझ और विश्लेषणात्मक अनुभव है। उनका लक्ष्य ताज़ा घटनाओं, विश्वसनीय रिपोर्टिंग और प्रासंगिक दृष्टिकोण को पाठकों तक निष्पक्ष रूप से पहुँचाना है। एक्सपर्ट मीडिया न्यूज़ (Expert Media News) सर्विस द्वारा प्रकाशित-प्रसारित राज़नामा (Raznama) के माध्यम से वे मीडिया आधारित स्थानीय, क्षेत्रीय और समसामयिक मुद्दों पर आधारित खबरें और विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं, जो बदलते सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य को समझने में पाठकों की मदद करते हैं। वे मानते हैं कि स्थानीय पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी और जनहित के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ मीडिया और स्वच्छ लोकतांत्रिक व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके।