Home जर्नलिज्म भारत को कहां ले जाना चाहती है ये अधकचरी महिलाएं !

भारत को कहां ले जाना चाहती है ये अधकचरी महिलाएं !

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एक महीने की तैयारी के बाद दिल्ली के युवाओं ने जंतर मंतर से स्लट वॉक (बेशर्मी मोर्चा) निकालकर समाज को महिलाओं के प्रति अपनी सोच बदलने का संदेश दिया। रविवार की सुबह साढ़े दस बजे  जंतर मंतर से शुरू हुआ यह मोर्चा वापस जंतर मंतर पर ही लौट आया। यहां नुक्कड़  नाटक के जरिए महिलाओं को कपड़े पहनने और काम करने की आज़ादी की मांग की गई। इस कार्यक्रम में शामिल महिलाओं और लड़कियों का कहना है कि जंतर मंतर से महिलाओं के हक और सम्मान के लिए आवाज बुलंद हुई है। उनके मुताबिक स्लट वॉक यानी बेशर्मी मोर्चा समाज की मानसिकता बदलने की लड़ाई की शुरूआत भर है।
स्लट वॉक की आयोजक उमंग सबरवाल ने कहा है कि हमारी कोशिश जरूर रंग लाएगी। वहीं, बॉलीवुड कलाकार नफीसा अली  ने कहा है कि सरकार को महिलाओं के प्रति ज्यादा संवेदनशील होना चाहिए। उन्होंने कहा कि नेताओं को महिलाओं के प्रति बयान देते समय बहुत संवेदनशील होना चाहिए।
जंतर मंतर पर स्मिता ग्रुप ने नुक्कड़ नाटक का मंचन कर महिलाओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज़ उठाई। स्लट वॉक करने  वाली लड़कियों ने दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और दिल्ली के पुलिस कमिश्नर बीके गुप्ता की आलोचना की। विरोध प्रदर्शन करने वाली लड़कियों ने शीला दीक्षित के उस बयान की आलोचना की जिसमें उन्होंने कहा था कि दिल्ली महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं है। वहीं, बीके गुप्ता के उस बयान पर भी स्लट वॉक कर रही लड़कियों ने कड़ा ऐतराज जताया जिसमें उन्होंने कहा था कि दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराध में कमी आई है। महिलाओं ने कहा कि जिस दिन कमिश्नर ने यह बयान दिया था, उसी दिन महिलाओं से रेप की घटना सामने आई थी। भारत में अपने तरीके का यह पहला बड़ा अनोखा विरोध प्रदर्शन है जो महिलाओं के पहनावे की आजादी के समर्थन में चलाया जा रहा है। दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्राओं के साथ ही बड़ी संख्या में दिल्ली की महिलाओं ने इसे अपना समर्थन दिया।
क्या है स्लट वॉक

स्लट वॉक जिसे हिंदी में बेशर्मी मोर्चा नाम दिया है, महिलाओं के हक और सम्मान की लड़ाई है। आयोजकों के मुताबिक, स्लट वॉक उस मानसिकता के खिलाफ जंग का ऐलान है जो समझते हैं कि लड़कियां अगर मॉडर्न या छोटे कपड़े पहन रही हैं तो वे छेड़खानी के लिए आमंत्रित कर रही हैं। पीड़ित पर ही आरोप लगाने और दोषी को कसूरवार ठहराने की मानसिकता बदलने की लड़ाई है यह। यह वॉक लोगों को अहसास दिलाने के लिए है कि लड़कियों के साथ अत्याचार और भेदभाव हो रहा है और इसे खत्म करने की जरूरत है।

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