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    सु’शासन के नुमाइंदों से यूं त्रस्त हैं पत्रकार!

    राज़नामा डॉट कॉम। बिहार के मुखिया नीतीश कुमार अपनी सफ़ाई में कहते है कि राज्य में सुशासन की सरकार हैं, जबकि उन्ही के अधिकारी भ्रष्टाचार में इतने ज़्यादा संलिप्त हैं कि आलाधिकारियों के पास शिकायत जाने के बाद भी कोई कार्यवाई नही की जाती हैं आख़िर क्यों नहीं कि जाती हैं किसी भी तरह की कोई कार्रवाई।

    इंडिया बेव पॉर्टल के पत्रकार हिमालय राज….

    कनीय अधिकारियों की बात मानें तो पंचायत स्तर से राज्य के वरीय अधिकारियों तक के अधिकारी भ्रष्टाचार में शामिल है, क्योंकि विकास की राशि को धरातल पर आने से पहले ही आधी हो जाती हैं। इतना ही नहीं बल्कि कमीशन की रकम को भी पटना में बैठे बाबुओं के पास तक जाते है। आख़िर जाए भी क्यों नहीं।

    बिहार के विभिन्न ज़िलों से आये दिन भ्रष्टाचार में संलिप्त पदाधिकारियों को निगरानी विभाग के अधिकारी रंगे हाथों पकड़ते है लेकिन उनलोगों पर किस तरह की कार्यवाई होती हैं शायद ही किसी को जानकारी होती होगी।

    बिहार में दिन प्रतिदिन बढ़ते भ्रष्टाचार व प्रशासन की गलत नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को न जाने वह कौन कौन से दिन देखने पड़ते होंगे।

    वैसे तो बिहार के कई जिलों के पत्रकारों को अधिकारियों के कोप भाजन का शिकार होना पड़ा हैं हालांकि इस मामलें में सारण ज़िला भी अछूता नहीं हैं। क्योंकि विगत दो वर्ष पूर्व निजी न्यूज़ चैनल के पत्रकार संतोष कुमार गुप्ता को जदयू नेता के द्वारा गली गलौज व जान से मारने की धमकी दी गई थी।

    इसे लेकर सैकड़ों पत्रकारों का गुस्सा अचानक फुट पड़ा था और मामला थाने तक जा पहुंचा था। इतना ही नहीं बल्कि इन्ही संतोष गुप्ता के द्वारा विगत वर्ष सदर अस्पताल में न्यूज़ कवरेज के दौरान नगर थाने के एक दारोग़ा द्वारा बदसलूकी की गई थी। उस मामले में भी प्राथमिकी दर्ज कराई गई हैं, जो कि अब तक कोर्ट की शरण में मामला लंबित चल रहा हैं।

    भूमाफियाओं के ख़िलाफ़ ज़िला मुख्यालय के युवा पत्रकार हिमालय राज के द्वारा आवाज उठाना अब महंगा पड़ने लगा है, क्योंकि इस मामलें में अब भूमाफिया ही नही, बल्कि ज़िला प्रशासन के कई अधिकारी भी शामिल हो गए है।

    इस मामले को लेकर पत्रकार हिमालय राज ने बताया कि सदर प्रखंड के अंचल पदाधिकारी पंकज कुमार, राजस्व कर्मचारी महम्मद सैफुल्लाह रहमानी सहित व अन्य भूमाफियाओं के ख़िलाफ़ व्यवहार न्यायालय छपरा में धोखाधड़ी व जालसाजी का मामला लंबित हैं। जिसका संबंध मेरे परिवार से जुड़े होने के कारण मुझे सामाजिक रूप से परेशान किया जा रहा है। क्योंकि पेशे से मैं पत्रकार हूँ और इस मामले को जोर शोर से हमने उठाया है ऐसे कई मामले को अधिकारिक व प्रशासनिक दबाव देकर दबाया गया है।

    पीड़ित पत्रकार का कसूर सिर्फ इतना है कि वे समाज में  व्याप्त भ्रष्टाचार व प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ हमेशा अपनी कलम व कैमरे की सहयोग से आवाज उठाते रहते हैं। इतना ही नहीं, बल्कि इस आवाज को समाज की अवाज बनता देखना चाहते हैं। ताकि प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म किया जा सके व इसके पक्ष में उठने वाले हर कदम को रोका जा सकें।

    कई ऐसे गंभीर मामले है जिसका उजागर उक्त पत्रकार ने किया है जबकि भ्रष्टाचार व अफसरशाही इतनी चरम सीमा पर है कि रास्ते चलते कुछ भी अप्रिय घटना घट सकती है। बावजूद इसकी परवाह किए निरंतर अपने काम में लगे रहना यह इनकी पहचान है।

    नगर थाना क्षेत्र के योगिनियां कोठी निवासी पत्रकार हिमालय राज जिनके खिलाफ पुरा प्रशासन लगा हुआ है तभी तो बिना किसी ठोस सबूत के वरीय अधिकारियों के जी हजूरी में या दबाव में आकर नगर थानाध्यक्ष विमल कुमार सिंह द्वारा स्वत: संज्ञान लेकर मुकदमा दर्ज कर लिया गया।

     नगर थानाध्यक्ष के द्वारा त्वरित कार्यवाई करते हुए थाना ले जाकर जेल भेजने तक की तैयारी की गई थी। लेकिन दृढ़ संकल्प व अन्य पत्रकार साथियों के सहयोग से प्रशासन का यह दाव फेल हो गया।

    पत्रकार हिमालय राज का कहना है कि विगत कुछ वर्ष पूर्व ही मैंने भ्रष्टाचार के खिलाफ अवाज उठाना शुरू किया और कई मामलो को स्थानीय ज़िला प्रशासन के आलाधिकारीयों के समक्ष भी रखा, लेकिन कोई कार्यवाई न होता देख अपनी अवाज को आगे बढ़ाने के लिए प्रिंट मीडिया व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने वाले पत्रकारों से मिले। लेकिन मुझें कोई सहयोग नहीं मिला, फिर मैंने स्वयं ही पत्रकार बनना स्वीकार किया व निरंतर समाज में दबे मामलो को उजागर करना शुरू कर प्रशासन के खिलाफ बिगुल फूंक दिया,

    उन खबरों को प्रकाशित करने के बाद ज़िले के कई अधिकारी व उनके दलाल मेरे पीछे पड़ गए। और तरह तरह के लोगों द्वारा समाजिक दबाब व जाति का हवाला देकर मुझें डराने धमकाने से लेकर अब प्रशासनिक स्तर पर भी मुझ जैसे पत्रकार पर फर्जी तरीके से पत्रकारिता करने का मामला स्थानीय नगर थाने में मामला दर्ज करवाया गया।

    पत्रकार हिमालय राज की माने तो अब यह लड़ाई एकल नहीं बल्कि सामूहिक हो गया है। पुरे देश में पत्रकार के अवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। अपनी नाकामयाबी को छुपाने के लिए मीडिया को हथियार बनाया जा रहा है। कभी पत्रकार के उपर जानलेवा हमला कराकर तो कभी प्रशासनिक नियमावली का हवाला देकर दबाब बनाया जा रहा है।

    यहां तक कि उनको गलत साबित करके जेल भेजने से लेकर सामाजिक बहिष्कार करने तक का कोई कसर नहीं छोड़ा जा रहा है।

    शुरूआत दौर में हिमालय राज का सामना जमीन हेराफेरी से जुड़े एक मामले के अधिकारी से हुआ था, जो इतना मशहूर हुआ कि देखते देखते अफसर के खिलाफ दर्जनों मामले सामने आ गए थे। जिसको लेकर जिला प्रशासन ने आनन फानन में उक्त अधिकारी को सदर अंचल से मसरख प्रखंड तबादला कर दिया गया हैं।

    सारण ज़िले के भूमाफिया व प्रशासन के विरुद्ध मामलें को  देश स्तर का बना दिया हैं जिसमें प्रधानमंत्री से लेकर प्रशासन के उच्चस्तरीय अधिकारियों के समक्ष न्याय की गुहार लगाई गई हैं,  अब मामले ने तुल पकड़ा ही था कि लॉक डाउन ने थोड़ा बाधा डाल दिया।

    इसी बीच पत्रकार के उपर मानसिक दबाव बनाने के उद्देश्य से फर्जी मामला बनाकर एआईआर दर्ज कर मामले को रफा दफा कराने को लेकर डराया धमकाया भी जा रहा है कि पत्रकार जमीन से जुड़े मामले को वापस ले या समझौता कर लें।

    सूचना के अधिकार कानून को अपना हथियार बनाते हुए आरटीआई का उपयोग कर जानकारी प्राप्त करना व अग्रेतर कार्रवाई के लिए वरीय अधिकारियों को सूचित करना यहां तक सारण जिले के जिलाधिकारी हो या सदर प्रखंड के अंचलाधिकारी हो सभी ने टालमटोल करके तय समय के अंदर सूचना देने में अनभिज्ञता जताई तभी तो सूचना विभाग पटना में लगातार पत्र प्रेषण से अब जबाब न देने का मामला भी दर्ज कर लिया गया है।

    नगर थाने के थानाध्यक्ष विमल कुमार सिंह के द्वारा दर्ज प्राथमिकी भी नियम कानून को ताक पर रख कर किया गया है जिसमें यह आरोप लगाया गया है कि मुमकिन है इंडिया नामक बेव पॉर्टल फर्जी है और फेक न्यूज को बढ़ावा देते हुए लगातार खबरों को अपडेट्स करते रहते है। जिस वजह से मुमकिन है इंडिया बेव पॉर्टल के पत्रकार हिमालय राज फर्जी पत्रकारिता करते हुए आम लोगों पर अपना धौंस जमाते है। जिस कारण आमलोगो में भय का माहौल कायम हो गया है।

    इसको लेकर हिमालय राज ने भी अपनी बात रखते हुए कहा है कि जग जाहिर है कि धौंस कौन जमाता है और भ्रष्टाचार को बढ़ावा कौन देता है? बावजूद इससे इतर मुमकिन है इंडिया लगातार समाज से जुड़े व भ्रष्टाचार से जुड़े मामले को पोर्टल पर लिखते व दिखाते रहेंगे।

    चाहे मुझे किसी भी मामले में आरोपित करते हुए फांसी की सजा ही क्यों न हो जाए। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के उपर बढ़ते खतरे से निपटने का वक्त अब आ गया है। बस आप सभी पत्रकार साथियों के एकजुट होने व परस्पर सहयोग की अपेक्षा है।

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