अन्य

    ‘एशियन मीडिया अवार्ड्स से नवाजे गए बीबीसी संवाददाता सलमान रावी

    राजनामा.कॉम। बीबीसी के हरदिल अजीज और बेहद संवेदनशील पत्रकार सलमान रावी एक बार फिर से सुर्खियों में है। उन्हें ब्रिटेन के  ‘एशियन मीडिया अवॉर्ड्स’ से सम्मानित किया गया है।

    सलमान रावी को यह सम्मान लाकडाउन के  दौरान उनकी एक रिपोर्ट के लिए दिया गया है। जिसमें उन्होंने फेसबुक लाइव के दौरान एक नंगे पैर मजदूर को अपने जूते उतार कर दें दिए थे।

    फेसबुक लाइव के दौरान ही उनकी मुलाक़ात परिवार के साथ सफ़र कर रहे एक मज़दूर से हुई जो हरियाणा के अंबाला से पैदल चलकर दिल्ली पहुँचा था और आगे मध्य प्रदेश में अपने गाँव तक जाना चाहता था।

    बीबीसी हिन्दी के इस फ़ेसबुक लाइव में उस मज़दूर ने कहा था कि ‘गर्मी में पैदल चलते-चलते उनकी चप्पलें टूट गईं, पर उन्हें कैसे भी अपने घर पहुँचना होगा। यह सुनकर सलमान रावी ने लाइव कार्यक्रम के दौरान ही उस मज़दूर को अपने जूते दे दिए।

    इस पूरे वाक्ये को एशियन मीडिया अवॉर्ड्स ने ‘वर्ल्ड न्यूज़ मोमेंट्स’ के तौर पर नामांकित किया था।

    संस्थान ने कहा है कि “बीबीसी संवाददाता सलमान रावी ने जिस सहज भाव से, बिना कुछ सोचे समझे उस मज़दूर की मदद की, वह उनके स्वाभाविक दया भाव और अनुग्रह को दर्शाता है।

    साथ ही, लॉकडाउन के दौरान भारतीय श्रमिकों को किन परेशानियों का सामना करना पड़ा, उनकी रिपोर्ट यह भी दिखाती है।”

    बीबीसी हिन्दी का यह लाइव वीडियो ना सिर्फ़ बीबीसी के प्लेटफ़ॉर्म्स पर, बल्कि अन्य सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर भी लाखों बार देखा गया था।

    बीबीसी के  वीडियो जर्नलिस्ट पीयूष नागपाल ने सलमान रावी की इस रिपोर्ट को अपने कैमरे में शूट किया था। पीयूष ने उक्त मजदूर परिवार को सड़क के दूसरे छोर पर जाते हुए देखा था,और उन्हें सड़क पार कर फेसबुक लाइव के दौरान ही शूट किया और सलमान रावी ने उक्त मजदूर परिवार की ह्रदय विदारक दास्तां को दुनिया के सामने लाई।

    बीबीसी हिन्दी सेवा के संवाददाता सलमान रावी क़रीब तीन दशक  वे पत्रकारिता के पेशे में हैं और प्रसारण के सभी माध्यमों- रेडियो, टीवी और ऑनलाइन के लिए काम कर चुके हैं।

    एशियन मीडिया अवॉर्ड्स से बात करते हुए सलमान रावी ने कहा, “एक पत्रकार के तौर पर, वो बहुत ही मुश्किल समय था।लाइव शो के दौरान मैं उस मज़दूर को पैसे नहीं दे सकता था।कम से कम जो मैं कर सकता था, वो था उस बिलखते-लाचार पिता को अपने जूते ऑफ़र करना जिनकी गोद में एक बच्चा था, उनकी पूरी गृहस्थी एक गठरी में बंधी हुई थी और उसी हालत में उन्हें पैदल क़रीब 200 किलोमीटर का सफ़र और तय करना था। ऐसे में एक इंसान के तौर पर, इतना तो किया ही जा सकता था।”

    Comments

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here

    Expert Media News_Youtube
    Video thumbnail
    देखिए लालू-राबड़ी पुत्र तेजप्रताप यादव की लाईव रिपोर्टिंग- 'भागा रे भागा, रिपोर्टर दुम दबाकर भागा !'
    06:51
    Video thumbnail
    गुजरात में चरखा से सूत काट रहे हैं बिहार के मंत्री शहनवाज हुसैन
    02:13
    Video thumbnail
    एक छोटा बच्चा बता रहा है बड़ी मछली पकड़ने सबसे आसान झारखंडी तारीका...
    02:21
    Video thumbnail
    शराबबंदी को लेकर अब इतने गुस्से में क्यों हैं बिहार के सीएम नीतीश कुमार ?
    01:30
    Video thumbnail
    अब महंगाई के सबाल पर बाबा रामदेव को यूं मिर्ची लगती है....!
    00:55
    Video thumbnail
    यूं बेघर हुए भाजपा के हनुमान, सड़क पर मोदी-पासवान..
    00:30
    Video thumbnail
    देखिए पटना जिले का ऐय्याश सरकारी बाबू...शराब,शबाब और...
    02:52
    Video thumbnail
    बिहार बोर्ड का गजब खेल: हैलो, हैलो बोर्ड परीक्षा की कापी में ऐसे बढ़ा लो नंबर!
    01:54
    Video thumbnail
    नालंदाः भीड़ का हंगामा, दारोगा को पीटा, थानेदार का कॉलर पकड़ा, खदेड़कर पीटा
    01:57
    Video thumbnail
    राँचीः ओरमाँझी ब्लॉक चौक में बेमतलब फ्लाई ओवर ब्रिज बनाने की आशंका से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश
    07:16