अन्य

    टीआरपी की होड़ में मर गई मीडिया की नैतिकता!

     
    टीआरपी की होड़ में आजकल के अखबार और चैनल्स कुछ भी करने को तैयार दिख रहे हैं. कुछ कर दिखाने का ऐसा जुनून की संसाधनों के अभाव में भी हर पांच मिनट बाद फायर होता है ब्रेकिंग न्यूज. भले ही स्पॉट पर अपने रिपोर्टर हो न हों, अपनी ओवी हो न हो लेकिन इन्हें तो दूसरे चैनल से लाइव काटने में महारत हासिल है. लगभग सभी रिजनल चैनल और कई नेशनल चैनलों के पास चलने वाले ज्यादातर फूटेज चोरी के होते हैं. मगर फिर भी सब करेंगे नंबर 1 होने का दावा. आखिर कहां गई पत्रकारों की नैतिकता? क्यों खोखली होती जा रही है लोकतंत्र के इस महत्वपूर्ण स्तंभ की नींव? मुंबई विस्फोट से लेके संसद पर हमले के लिए सरकार और प्रशासनिक तंत्र को जिम्मेवार ठहराने वाली मीडिया कितनी दूध की धुली हुई है ये हम और आप जानते हैं. पत्रकारिता का स्तर इतना क्यों गिर गया है? सिस्टम में खराबी और सरकार को नैतिकता और जिम्मेवारी की सीख देने वाली मीडिया को क्या अपने गिरेबान में झांकने की जरुरत नहीं है? मीडिया छोटी-बड़ी गलती के लिए सरकार को घेरने की कोशिश में रहती है? लेकिन कभी ये सोंचा है कि अगर सरकार और सिस्टम मीडिया को इसकी जिम्मेवारी सिखाने की जिद ठान ले तो क्या होगा ? अमर्यादित ढ़ंग से पत्रकारिता करने, बेहूदी खबरें चलाने, बड़ी खबरों को देर से दिखाने जैसे कई मुद्दे पर अगर लोकतंत्र के तीन अन्न स्तंभ मीडिया को घेरे में लेने लगे तो शायद मीडिया को अपनी औकात पता चल जाएगी. ध्यान दिलाना चाहूंगा कि मुंबई विस्फोट के दिन एक केंद्रीय मंत्री फैशन शो का लुत्फ उठाते नजर आये तो न्यूज चैनलों ने मंत्रीजी जी को जमकर धो डाला. मुंबई हमले की खबर से भी बड़ी खबर बन गयी मंत्री जी के फैशन शो में उपस्थिति. क्या सिर्फ मंत्रीजी देश के जिम्मेवार नागरिक हैं? ये ठीक है कि केन्द्रीय मंत्री होने के नाते राष्ट्र के प्रति उनकी जिम्मेवारी सबसे ज्यादा है. और दुख की इस घड़ी में उन्हें जनता के साथ होना चाहिए था. लेकिन क्या जिन पत्रकारों ने मंत्री जी की उस वक्त की बहुमूल्य तस्वीर अपने कैमरे में कैद की उन्होंने भी अपनी नैतिकता दिखाई? जब मुंबई में विस्फोट हुआ देश के सभी मीडियाकर्मीयों का ये दायित्व था कि कम से कम एक दिन तो सिर्फ और सिर्फ विस्फोट से संबंधित खबरों को दिखाते और उसका ही कवरेज करते. अगर मीडिया अपनी नैतिक जिम्मेवारी बखूबी समझता है तो फिर विस्फोट की खबरों की प्रतिक्रिया लेने के बजाए हमारे पत्रकार बंधु वहां फैशन शो का लुत्फ क्यों उठा रहे थे? अपने दायरे में रहकर लोगों को सच्ची खबरें दिखाने का दायित्व मीडिया को है, मगर सवाल ये है कि क्या आज मीडिया अपने दायरे में है?

    Comments

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here

    Expert Media News_Youtube
    Video thumbnail
    झारखंड की राजधानी राँची में बवाल, रोड़ेबाजी, लाठीचार्ज, फायरिंग
    04:29
    Video thumbnail
    बिहारः 'विकासपुरुष' का 'गुरुकुल', 'झोपड़ी' में देखिए 'मॉडर्न स्कूल'
    06:06
    Video thumbnail
    बिहारः विकास पुरुष के नालंदा में देखिए गुरुकुल, बेन प्रखंड के बीरबल बिगहा मॉडर्न स्कूल !
    08:42
    Video thumbnail
    राजगीर बिजली विभागः एसडीओ को चाहिए 80 हजार से 2 लाख रुपए तक की घूस?
    07:25
    Video thumbnail
    देखिए लालू-राबड़ी पुत्र तेजप्रताप यादव की लाईव रिपोर्टिंग- 'भागा रे भागा, रिपोर्टर दुम दबाकर भागा !'
    06:51
    Video thumbnail
    गुजरात में चरखा से सूत काट रहे हैं बिहार के मंत्री शहनवाज हुसैन
    02:13
    Video thumbnail
    एक छोटा बच्चा बता रहा है बड़ी मछली पकड़ने सबसे आसान झारखंडी तारीका...
    02:21
    Video thumbnail
    शराबबंदी को लेकर अब इतने गुस्से में क्यों हैं बिहार के सीएम नीतीश कुमार ?
    01:30
    Video thumbnail
    अब महंगाई के सबाल पर बाबा रामदेव को यूं मिर्ची लगती है....!
    00:55
    Video thumbnail
    यूं बेघर हुए भाजपा के हनुमान, सड़क पर मोदी-पासवान..
    00:30

    आपकी प्रतिक्रिया