पत्रकार वीरेंद्र कुमार की 67 वीं जयंती मनाई गई 

चंडी (नालंदा दर्पण)। भगवानपुर स्थित वीरेंद्र ग्रुप के प्रधान कार्यालय सरस्वती कंपलेक्स में दिवंगत पत्रकार वीरेंद्र कुमार सिन्हा की जयंती मनाई गई।

जयंती की अध्यक्षता करते हुए पूर्व प्रधानाध्यापक अरुण चौधरी ने कहा कि यह हमारे मित्र थे। यह सभी गरीब मजलूम को खुलकर मदद किया करते थे। यह व्यक्ति पुलिस, प्रशासन से लेकर शासन तक से आमजन के लिए निर्भीक हो कर लड़ा करते थे।

पत्रकारिता में भी इन्होंने अपने कलम का सभी लोगों को लोहा मनवाया। इस व्यक्ति के द्वारा चंडी में अपनी हड्डी फैक्ट्री खोलने के लिए खरीदे गए जमीन में बच्चियों की उच्च शिक्षा के लिए डॉ. रामराज सिंह महिला महाविद्यालय बनाकर भी एक कृतिमान स्थापित किया। आज उनके पुत्र प्रवीण कुमार सुमन, मुन्ना सिंह उनके बताएं रास्ते पर चल रहे हैं। यह बहुत खुशी की बात है।

कार्यक्रम में वीरेंद्र ग्रुप वीरेंद्र एजुकेशनल एंड सोशल ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रवीण कुमार सुमन, कार्यकारी अध्यक्ष डा राजाराम कुमार , ट्रस्टी मुन्ना सिंह , रविंद्र कुमार , नरेश प्रसाद , पप्पू कुमार माथुरी, सिद्धनाथ कुमार , अनुज कुमार , पप्पू कुमार, विश्वजीत कुमार , मृत्युंजय कुमार, धर्मेंद्र कुमार, आशीष कुमार, आशीष नेहरा, संजीव कुमार सहित दर्जनों लोग उपस्थित थे।

प्रमुख खबरें

कोविड के चलते भारत में हुई मौतों पर अमेरिका के अखबार की खबर है चर्चाओं में !

राजनामा.कॉम डेस्क। कोरोना कोविड 19 के संक्रमण के चलते देश में कितने लोग कालकलवित हुए हैं, अर्थात कितने लोगों ने दम तोड़ा है इस...

नये जमाने की पत्रकारिता ‘मोजो’ (मोबाइल जर्नलिज्म), कैसे बनाएं कैरियर

"अब मोजो यानी मोबाइल जर्नलिज्म का जमाना है। मोजो जर्नलिस्ट बनकर न‌ केवल पत्रकारिता के पैशन को पूरा कर सकते हैं, बल्कि अपनी खबरे...

Facebook Video Story Reels डाउनलोड करने का आसान तरीका

नालंदा दर्पण डेस्क। आज सोशल मीडिया (Social Media) पर फेसबुक (Facebook) एक बड़ा लोकप्रिय प्लेटफार्म स्टोरी वीडियो रील्स एक लोकप्रिय फीचर है, जो फेसबुक...

फर्जी पत्रकारों पर अब इस तरह लगाम लगाएगी पुलिस, हेल्पलाइन नबंर जारी

राजनामा.कॉम। खुद को पत्रकार बताकर लोगों को धमकाने, ब्लैकमेल करने, उगाही करने और अन्य तमाम तरह से परेशान करने वालों की अब खैर नहीं...

गर्त में जाती पत्रकारिता के मानक बने झारखंड के ये प्रेस क्लब

“आखिर लोकतंत्र का चौथा खंभा यानी पत्रकारिता गर्त में क्यों जा रही है।? क्यों पत्रकार अपेक्षा का शिकार हो रहे हैं ? क्यों पत्रकारिता...