वेशक मुख्यमंत्री जनसंवाद कर्मियों के समक्ष अब कई यक्ष प्रश्न मुंह बाये खड़ा है। 31 जुलाई के इस शॉर्ट नोटिस के बाद इस कोरोना काल में परिवार कैसे चलेगा ?  दूसरी ओर पिछले 4 माह से सभी को वेतन नहीं मिला है

राज़नामा डेस्क।  झारखंड मुख्यमंत्री जनसंवाद केंद्र यानी टॉल फ्री नंबर-181 के 132 कर्मचारियों को बगैर सैलरी दिए अचानक एक नोटिस पर बैठा दिया गया। इससे कर्मचारी सकते में हैं।

इस संबंध में सूचना भवन में 23 मार्च से माइका एजुकेशनल कंपनी प्राईवेट लिमिटेड के तहत काम कर रहे 132 कर्मचारियों ने सीएम हेमंत सोरेन को पत्र भेजकर चार माह की सैलरी देने और जनसंवाद केंद्र को बंद नहीं करने की गुहार लगाई है।

जनसंवादकर्मियों की एक टीम ने सोमवार को मुख्यमंत्री आवास में सीएमओ के एक अधिकारी को पत्र सौंप दिया है और सीएम से मिलने का समय भी मांगा है, लेकिन बाद में समय देने की बात कही गई है।

कहा जाता है कि राज्य में जब नयी सरकार बनी और एक युवा मुख्यमंत्री के रूप में दूसरी बार हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री के रूप में झारखंड की बागडोर संभाली तो, जनसंवादकर्मियों को लगा पूर्व की तरह जनसंवाद केंद्र अब नए सिरे से जनसेवा के कार्य में जुटेगा।

इसी दौरान कई स्रोतों से बातें छन कर आ रही थीं कि अब जनसंवाद केंद्र को बंद कर दिया जाएगा। लेकिन, जनसंवादकर्मियों को अब भी यकीन नहीं होता कि सभी को काम से हटा दिया गया है। जनसंवादकर्मियों ने बताया कि उन्हें भरोसा है कि सरकार जनसंवाद केंद्र को पुन: चालू करेगी।

यह भरोसा यकीन में तब बदल गया, जब 22 मार्च को मुख्यमंत्री ने जनसंवाद केंद्र के लिए जारी टॉल फ्री नंबर-181 को राज्यस्तरीय कोरोना नियंत्रण कक्ष के रूप में तब्दील कर दिया।

23 मार्च से लगातार अब तक जनसंवादकर्मियों ने राज्य से बाहर फंसे हजारों लोगों को घर लाने में मदद की। यहां तक कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी कोरोना वॉरियर्स की तारीफ की।

जनसंवादकर्मियों का कहना है कि वे सरकार के अंग हैं, किसी पार्टी के नहीं। ये भी कहा गया कि जनसंवाद केंद्र रघुवर दास व बीजेपी सरकार की उपज है,  इसलिए इसे बंद कर दिया जाएगा और जनसंवादकर्मियों को हटा दिया जाएगा। अंततः यही सच निकला। अब हकीकत सबके सामने है।

इससे जनसंवादकर्मियों को जोरदार झटका लगा है। 24 जुलाई को सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग की ओर से निर्गत आदेश के आलोक में जनसंवाद केंद्र सह राज्य स्तरीय कोरोना नियंत्रण कक्ष, झारखंड को स्थायी तौर पर बंद कर दिया गया है।

इस संदर्भ में जब जनसंवादकर्मियों ने सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय के  निदेशक से बात की, तो उन्होंने कहा कि वर्तमान में सरकार के पास फंड नहीं है।

सवाल उठता है कि कोरोना काल में जहां झारखंड सरकार बेरोजगारों का निबंधन करा कर रोजगार देने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर जो लोग बिना वेतन के इस महामारी में पिछले 4 माह से कार्य किया, उन्हें बगैर वेतन दिए चलता कर दिया गया।

जनसंवादकर्मी अब मुख्यमंत्री को अपना वक्तव्य दिला रहे हैं। सीएम ने  ट्विटर के जरिए से भी 181 कंट्रोल रूम के कार्यों की तारीफ करते हुए सबकी हौसलाअफजाई की थी।

सीएम ने कहा था कि जनसंवादकर्मियों को वेतन के अलावा कुछ प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। लेकिन, यहां तो किए गये काम के बदले वेतन के लाले पड़े हैं, प्रोत्साहन राशि का तो अब सवाल ही गायब हो गया है। क्या यह माना जाये कि सीएम अपने वादे से मुकर गये हैं।

जनसंवाद के कार्यों को देश के कई राज्यों के सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों के प्रतिनिधियों ने जनसंवाद केंद्र का विजिट जनसंवाद के पोर्टल और उसकी कार्यप्रणाली को सराहा है।

इस केंद्र को राष्ट्रीय स्तर पर स्कॉच मेरिट व गोल्ड अवार्ड से भी नवाजा गया है। कई ऐसे मौके आए जब प्रशिक्षु आईएएस, आइपीएस और राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों  व अन्य को जनसंवाद की कार्यप्रणाली से अवगत करने के लिए विजिट कराया गया।

जनसंवाद केंद्र की सफलता को देखते हुए ही आपातकालीन सेवा के लिए स्थापित कॉल सेंटरः ई-राहत और राष्ट्रीय स्तर की जनशिकायत निवारण प्रणाली (पीएमओ पीजी पोर्टल) को भी जनसंवाद के साथ टैग कर संचालित किया जा रहा है, जहां सभी जनसंवादकर्मी 24 घंटे 7 दिन राज्य की सवा तीन करोड़ जनता की सेवा में तत्पर रहते हैं।

इसी का परिणाम है कि पिछले लगभग पांच वर्षों में दर्ज लगभग 5.11 लाख जनशिकायतों में से लगभग 3.8 लाख जनशिकायतों का संतोषप्रद निष्पादन संभव हो सका है।

जनसंवाद केंद्र में कार्यरत 132 कर्मियों में लगभग 80 महिलाकर्मी हैं।  लगभग 30 महिलाकर्मी अनुसूचित जनजाति, 10 अनुसूचित जाति, 10 अल्पसंख्यक समुदाय के हैं और 82 लोग निम्न मध्यम वर्गीय परिवार से आते हैं।

सरकार के निर्देशानुसार जनसंवाद की टीम ने राज्य के 24 जिले के विभिन्न सुदूरवर्ती ग्राम-पंचायतों में जाकर लगभग एक लाख लोगों को प्रत्यक्ष रूप से केंद्र व राज्य सरकारों की योजनाओं के बारे में जानकारी दी है।

जनसंवाद केंद्र की इस सफल यात्रा में राज्य से लेकर जिला, प्रखण्ड, पंचायत व गाव-ग्रामीणों का भरपूर सहयोग मिला। कुछ अपवाद को यदि छोड़ दिया जाए तो, यह एक ऐसा मंच है, जहां राज्य की जनता सीधे मुख्यमंत्री से जुड़ सकती है।

बहरहाल, जनसंवादकर्मियों और जनसंवाद केंद्र के महत्व को समझते हुए मुख्यमंत्री को इसपर सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए, यह समय की मांग है।  (इनपुटः द फॉलोअप टीम)

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