पोलोनियम 210 से हुई थी सुनंदा पुष्कर की हत्या !

Share Button

Sunanda_Pushkarदिल्ली पुलिस ने सुनंदा पुष्कर की मौत को खुदकुशी नहीं, बल्कि हत्या बताया है। इस खुलासा से पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे शशि थरूर इस खबर से सकते में हैं।

तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस पार्टी के सांसद शशि थरूर ने फेसबुक पर लिखा है कि वह यह जानकार बेहद हैरान हैं कि दिल्ली पुलिस ने उनकी पत्नी की मौत पर अनजान लोगों के खिलाफ कत्ल का मामला बनाया है।

थरुर चाहते हैं कि इस मामले की पूरी तरह छानबीन हो।  वे आगे भी पुलिस को पूरा सहयोग देते रहेगें।

sunanda_razथरूर का कहना है कि उनके परिवार ने कभी भी मामले के इस मोड़ के बारे में नहीं सोचा था। उन्होंने कभी नहीं सोचा कि इसमें किसी व्यक्ति की मिलीभगत हो सकती है लेकिन वे सब चाहते हैं कि गहराई तक जांच हो और पूरा सच सामने आए। 

थरूर ने शिकायत भरे अंदाज में कहा है कि उन्हें आज तक पोस्टमार्टम की रिपोर्ट नहीं दी गयी है और ना ही अन्य किसी भी रिपोर्ट की कॉपी मुहैया कराई गयी है।  वे पुलिस से एक बार फिर आग्रह करना चाहेंगे कि उन्हें जल्द से जल्द रिपोर्टें की प्रतियां दी जाएं।

 विदित हो कि 51 साल की सुनंदा पुष्कर की मौत के करीब एक साल बाद दिल्ली पुलिस ने उनके कत्ल का मामला दर्ज किया है। पिछले साल जनवरी में दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में उन्हें मृत पाया गया था।

घर में पुताई का काम होने के कारण वे अपने पति के साथ होटल में रह रही थीं। अब तक माना जा रहा था कि उन्होंने खुदकुशी की। सुनंदा डिप्रेशन का शिकार थीं। ऐसे में गलती से ज्यादा दवा लेने की बात भी कही जा रही थी। लेकिन अब पुलिस का कहना है कि उनकी जहर दे कर जान ली गयी है।

दिल्ली पुलिस के कमिश्नर भीम सेन बस्सी के अनुसार ताजा मेडिकल रिपोर्ट में ‘अप्राकृतिक मौत’ की बात सामने आई है।  हो सकता है जहर खिलाया गया हो या फिर इंजेक्शन के जरिए दिया गया हो। इन बातों को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने कत्ल का मामला दर्ज किया है।

पुलिस का मानना है कि सुनंदा की हत्या रेडियोधर्मी पदार्थ पोलोनियम 210 देकर की गई। पोलोनियम 210 में थैलियम और नीरियम मौजूद होता है। हलांकि इस बात पर अब तक कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगाई गई है।  

क्या है पोलोनियम 210

पोलोनियम 210 एक दुर्लभ रेडियोएक्टिव तत्व है।  साल 1898 में मैरी क्यूरी और उनके पति पियरे क्यूरी ने इसकी खोज की थी। ये यूरेनियम की रासायनिक प्रक्रिया के दौरान यह उत्पन्न होता है। इसे न्क्लियर रिएक्टर में भी बनाया जाता है।

यह रेडियोएक्टिव रसायन खाने-पाने, प्रदूषित वायु या खुले जख्म के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकता है। एक बार शरीर में इस रसायन के घुसने के बाद व्यक्ति की मृत्यु निश्चित हो जाती है।

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Loading...