SCRB कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम में देखिए कितनी गंभीर हैं पुलिस

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इधर मंगलवार से शुरु हुए इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में एक्सपर्ट लोग मौजूद पुलिसकर्मियों को प्रोजेक्टर के माध्यम से कार्य की बानगियां सिखा-गिना रहे थे, उधर प्रशिक्षण में मौजूद प्रायः वर्दी वाले वाट्सएप पर मशगुल और खुद में और मोबाइल से बातें करते रहने के साथ झपकी लेने में भी तल्लीन दिखाई दिए…..”

पटना। बिहार में पुलिस सूचना तंत्र को सूधारने की कवायद काफी तेज हो गई है। राज्य के गृह आरक्षी विभाग ने केन्द्र और बिहार सरकार की मदद से एक महत्वकांक्षी और दूरदर्शी योजना पर काम करना शुरु कर दिया है।

अब बिहार का ‘राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो’ ठीक उसी तरह काम करेगा जिस तरह के कार्य ‘राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो’ में होते हैं। केन्द्र ने ‘एससीआरबी’ को वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए 64 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की है।

इसके अतिरिक्त पूरी परियोजना के लिए 206 करोड़ की राशि बिहार सरकार द्वारा स्वीकृत की गई है जिसका आवंटन भी होगया। ‘एससीआरबी’ ने इस परियोजना पर कदम बढ़ाते हुए राज्य के सभी जिलो के पुलिसकर्मियों के लिए क्रमवार एक ‘कार्यशाला सह प्रशिक्षण’ कार्यक्रम प्रारंभ कर दिया है।

पटना में 4 सितम्बर से 8 सितम्बर तक आयोजित इस कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम में राज्य के हर जिले के एडीशनल एसपी से लेकर कांस्टेबल स्तर के पुलिसकर्मियों को क्रमवार प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

‘एससीआरबी’ के आईजी डा. कमल किशोर सिंह ने बताया कि पूर्व में राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो एक वर्ष पूर्व के अभिलेखों को जारी करता था परंतु अब ब्यूरो अद्यतन अभिलेखों को एनसीआरबी को भेजेगा। पूर्व में ‘एनसीआरबी’ के 63 फम्र्स होते थे पर अब वह बढ़कर 74 हो गए हैं।

आईजी ने बताया कि  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ही यह आदेश दिया था कि राज्य का ‘अपराध अभिलेख ब्यूरो’ उसी तरह से कार्य करे और अपनी सक्रियता दिखए जिस तरह ‘राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो’ में होता है।

उन्होंने बताया कि एससीआरबी ने वर्ष 2016 में ‘स्टेट क्राईम रिकार्ड’ का पहला संस्करण, 2017 में दूसरा संस्करण प्रकाशित किया था जबकि इसका तीसरा संस्करण चालू सितम्बर माह के अंत तक प्रकाशित कर दिया जाएगा। इससे संबंधित सभी अद्यतन सूचनाएं और जानकारियां एससीआरबी की सरकारी बेवसाईट पर अपलोड रहेंगे।

‘स्टेट क्राईम रिकार्ड ब्यूरो’ के अभिलेख ‘क्राइम इन बिहार’ में अब सिर्फ आंकड़ो का संकलन और प्रदर्शन ही नहीं होगा, बल्कि किस इलाके में अपराध कैसे और क्यूं बढा या बढ़ रहा है और उसपर नियंत्रण पाने के क्या प्रभावी उपाय किए जा रहे हैं। कहां क्या कमी और खामियां हैं इनका भी उल्लेख ‘एसएसीआरबी’ के अभिलेख में होगा।

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