इस वीडियो ब्लॉगर के सपोर्ट में नहीं दिख रहा मीडिया का कोई धड़ा या संगठन ?

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गिरफ्तारी के 20 दिन बाद भी नहीं मिली FIR की कॉपी

  • मुकेश भारतीय 

मशहूर ब्लॉगर अभिषेक मिश्रा ने अपनी गिरफ्तारी के बाद जो वीडियो न्यूज जारी किया है, वह मध्य प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान की गुंडागर्दी साफ तौर पर उजागर करती है। यह वाक्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।

अभिषेक का कहना है कि उसे गिरफ्तारी के 20 दिनों बाद भी एफआईआर की न तो कॉपी उपलब्ध कराई गई है और न ही उसे यह बताया गया है कि आखिर उसके खिलाफ एफआईआर किसने दर्ज कराई है। आईजी लेवल के पुलिस अधिकारी भी उपर (सीएम) के आदेश का सिर्फ हवाला दे रहे हैं।

अभिषेक कहते हैं कि उनका लैपटॉप, मोबाईल, सिमकार्ड और डाटा डोंगल आदि सब पुलिस ने जब्त कर रखे हैं।

अभिषेक का कसूर सिर्फ इतना है कि उन्होंने सीएम शिवराज सिंह चौहान की गाड़ी से उजागर करोड़ों रुपये की खबर प्रसारित की थी। इसके बाद पुलिस विगत 11 नवबंर को अचानक रात 12 बजे गिरफ्तार कर गुमनाम स्थान पर ले गई और फिर आंखों पर पट्टी बांध कर साइबर सेल ले गई तथा दबाब बना कर संबंधित सूचना को डिलिट करवा डाली।

बकौल अभिषेक, पुलिस ने उसे इस शर्त पर छोड़ा था कि वे गिरफ्तारी की सूचना मीडिया में नहीं ले जायेगा। लेकिन हिंदुस्तान टाइम्स में पुलिस के हाले से ही गिरफ्तारी की खबर छपवा दी गई।

अभिषेक की कहानी, उसी की जुबानी सुनने के बाद मुझे 31 मई, 2012 की 12 बजे रात याद आ गई। तब झारखंड में अर्जुन मुंडा की सरकार थी। ठीक अभिषेक की तरह ही पुलिस अचानक रात अंधेरे उठा ले गई। पुलिस के हर स्तर पर बताया जाता कि उपर का आदेश है। मेरी गिरफ्तारी की खबर प्रिंट-इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ सोशल साइट पर वायरल हो गई थी। अंततः पुलिस ने मुझे होटरवार सेंट्रल जेल भेज दिया गया। मेरी गिरफ्तारी का एक और रोचक पहलु यह है कि तात्कालीन सीएम अर्जुन मुंडा के करीबी एवं एक अखबार के बिल्डरिया छाप फ्रेंचाईजी ने मुझे जेल भेजने के आधा घंटा पहले मेरे सामने ही पुलिस को लिखित कंप्लेन भिजवाया था और गिरफ्तारी पहले हो गई थी। बाद में चार्जचीट में बताया गया कि कंप्लेन पहले मिल गई थी और पड़ताल करने के बाद थाना प्रभारी द्वारा गिरफ्तारी तय की गई थी उपर के आदेश से।

मेरा कसूर सिर्फ इतना था कि  मैंने अपनी इसी WWW.RAZNAMA.COM  साइट पर एक खबर प्रकाशित की थी कि गलत सर्कुलेशन दिखाकर रांची से प्रकाशित अंग्रेजी दैनिक पायोनियर सरकारी विज्ञापन डकार रहा है। यह सब सीएम अर्जुन मुंडा के करीबी में हो रहा है। उल्लेखनीय है कि इस अखबार का मालिक भाजपा राज्य सभा सदस्य चंदन मित्रा हैं।

सबाल उठता है कि भय और भ्ष्टाचार मुक्त व्यवस्था के ढिंढोरे पीटने वाले इस तरह की गुंडागर्दी पर क्यों उतर जाते हैं। हाल ही एक भाजपा सांसद ने वेबसाइट पर प्रसारित खबर को लेकर मुझे जमकर गालियां और धमकियां दी। जिसे मैं पीकर रह गया। मेरा साफ कहना है कि अगर किसी को किसी खबर पर आपत्ति हो तो वह जिस शालीनता से खबर लिखी जाती है, उसी उनुरुप अपनी बात रखें या फिर उसे न्यायालय में चुनौती दें। सब दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा।

पुलिस का क्या है। वह तो सत्ता की कठपुतली या गुंडे की भूमिका में होती है। उसे जैसे कहा जाता है, वैसा ही करता है। उसका अपना कोई सेंस नहीं होता है। अगर होता भी है तो खाकी में सब खाक हो जाती है। भाजपा राज कहीं भी हो- उसके निठल्ले पुलिस-गुंडे-मवाली का इस्तेमाल करना अच्छी तरह जानती है।

वीडियो ब्लॉगर अभिषेक मिश्रा के साथ जो कुछ भी हुआ, मीडिया का कोई धड़ा या संगठन उसके सपोर्ट में खुल कर सामने नहीं आया है। आखिर वे आये भी क्यों ? सत्ता की चाशनी में उबलनी उनकी नियत जो ठहरी।

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