‘यार की हार’ का बदला यूं ले रहे हैं अंबानी-मोदी के नाथवानी!

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राजनामा.कॉम। हाल के वर्षों में अचानक झारखंड की राजनीति के सबसे बड़े लाइजनर बन कर उभरे उद्योगपति एवं राज्यसभा सदस्य परिमल नाथवानी ने सिल्ली विधानसभा क्षेत्र से सारे एंबुलेंस हटवा दिये हैं। इसे लेकर पूरे क्षेत्र में भारी जनाक्रोश देखने को मिल रहे हैं।

nathwaniकहते हैं कि नाथवाणी ने अपने सरकारी सांसद फंड से सिल्ली में लोगों की चिकित्सा सेवा के लिये  20 एंबुलेंस वितरित किये थे। उन्होंने यह कार्य आजसू नेता सुदेश महतो से जुड़ी संस्था ‘गूंज’ के नाम सौंपी गई थी। गूंज के पास पहले से करीब 10 एंबुलेंस थे।

लेकिन सिल्ली विधानसभा क्षेत्र से आजसू के सुदेश महतो की  शर्रमनाक हार के बाद परिमल नाथवाणी बौखला गये। इसी बौखलाहट में उन्होनें अपने सांसद फंड से निर्गत सारे एंबुलेंस वहां से हटवा कर उन क्षेत्रों में भेज दिये, जहां आजसू के विधायक निर्वाचित हुए हैं या उसके राजनीतिक प्रभाव वाले हलके हैं।

उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव के दौरान दो विपरित ध्रुव पर खड़ी आजसू-भाजपा को विधानसभा चुनाव के ठीक पहले सारे विरोधों-कयासों को ध्वस्त करते हुये एक मंच ला खड़ा कर दिया। भाजपा जैसे राष्ट्रीय राजनीतिक पर  नाथवानी की पकड़ कितनी मजबूत है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है। 

अब इस गलबहियां का कितना फायदा-नुकसान आजसू को हुआ और कितना भाजपा को, यह जग जाहिर है। नाथवानी की इस जुगाड़ तकनीक के पीछे मूल रुप से उनका राज्यसभा में पुनः घुसने की मुहिम  है, जिसके लिए वे आजसू को हर हाल में अपनी थैली में रखना चाहते हैं।

silli_nathwaniबहरहाल, परिमल नाथवानी ने सिल्ली क्षेत्र में जो एबुंलेंस दिये थे। उसके पैसे न तो उनकी रिलायंस या अन्य कंपनी की थी और न तो उनके पैत्रिक संपति के अंश। वे पूर्णतः जनता की गाढ़ी कमाई थी और जनता के हित के लिये ही थी। इसे अत्यंत दोयम दर्जें की राजनीति ही कही जाएगी कि अपने चहेते की चुनावी हार के बाद बौखला कर देश के सर्वोच्स सदन में बैठने वाले सदस्य इस तरह की ओछी हरकत करे। 

इस मामले में एक और बड़ा सबाल यह भी उठता है कि नाथवानी ने अपने सरकारी फंड से इतने व्यापक पैमाने पर एक वैसी संस्था को एबुंलेंस मुहैया क्यों कराए, जो किसी राजनीतिक दल के नेता के ईशारे पर संचालित हो रहे हों ? अगर सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों को सीधे उपलब्ध कराये जाते तो यह स्थिति शायद ही उत्पन्न होती। 

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