kgbv के लेखापालों की हड़ताल 18 मार्च तक बताने के पीछे क्या है राज़ ?

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विगत 18 फरवरी,2016 को ही हड़ताल समाप्त करवाती शिक्षा मंत्री नीरा यादव
विगत 18 फरवरी,2016 को ही हड़ताल समाप्त करवाती शिक्षा मंत्री नीरा यादव

झारखंड शिक्षा परियोजना से जुड़े सभी कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के लेखापाल 18 फरवरी तक  हड़ताल पर रहे या 18 मार्च तक ?

राजधानी रांची के ओरमांझी बीआरसी परिसर में संचालित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की वार्डन अनीता तोपनो के साथ प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी माला कुमारी सिन्हा की माने तो लेखापालों की हड़ताल 18 मार्च तक चली है।

इसकी पुष्टि विद्यालय संचालन के एक अहम सूत्रधार जिला शिक्षा परियोजना के कार्यक्रम पदाधिकारी सीमा प्रसाद भी करती हैं।

हालांकि, यह सर्व विदित है कि कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के लेखापालों की हड़ताल 18 फरवरी तक ही चली है। तब एक सरकारी समझौते के तहत उन सबों की हड़ताल समाप्त हो गई थी और अगले दिन से सभी अपने-अपने काम पर वापस लौट आए थे।

IMG_20160329_145619_HDRऐसे में विद्यालय की वार्डन या विद्यालय भवन के ही एक कमरे में स्थापित प्रखंड शिक्षा विभाग प्रमुख यानि प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी या फिर जिला शिक्षा परियोजना के कार्यक्रम पदाधिकारी का यह लिखना-कहना कि हड़ताल 19 मार्च तक चली है, उसमें कई राज़ छुपे नजर आते हैं।

कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय ओरमांझी की वार्डन अनीता तोपनो के हस्ताक्षर से प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी माला कुमारी सिन्हा ने प्रखंड विकास पदाधिकारी सह जन सूचना सह अपीलीय पदाधिकारी रजनीश कुमार को एक आरटीआई के जबाब में सूचना दी है कि वर्तमान कार्यरत लेखापाल विभागीय हड़ताल पर हैं, योगदान करने पर विस्तृत जानकारी दी जा सकती है।

इस सूचना पत्र वार्डन द्वारा विगत 11 मार्च को हस्ताक्षरित है एवं प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी द्वारा अपने कार्यालय पत्रांकः 715, दिनांकः 18.03.16 को प्रेषित है।

इस बाबत जब शिक्षा परियोजना के कार्यक्रम पदाधिकारी सीमा प्रसाद से बात की गई तो उन्होंने भी आरटीआई आवेदक को 18 मार्च तक हड़ताल में होने की बात कही।

IMG_20160329_145643_HDRअब सबाल उठता है कि कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की वार्डन के साथ प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी  ओरमांझी प्रखंड के जनसूचना अधिकारी सह प्रथम अपीलीय पदाधिकारी यानि प्रखंड विकास पदाधिकारी को गलत इस तरह की गलत सूचना क्यों दी और उसे कार्यक्रम पदाधिकारी  ने झूठे तौर पर प्रमाणित क्यों कर दिया।

जाहिर है कि सबसे एक साथ कोई मानवीय भूल नहीं हुई है बल्कि, एक सोची-समझी रणनीति के तहत सूचना छुपाने की चाल चली है। क्योंकि आरटीआई के तहत जो सूचनाएं मांगी गई है, उससे सबकी कलई खुल जाएगी और एक बड़े गोरखधंधे का यूं ही खुलासा हो जाएगा।

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