करोड़ो के पार्श्व नाथ की मूर्ति तोड़ने वाले दो अपराधी धराया

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नालंदा(संवाददाता)। राजगीर के पंच पहाड़ वैभारगिरि पर स्थित जैन धर्म के 23 वें तीर्थंकर भगवान पार्श्व नाथ की स्थापित मूर्ति को शुक्रवार की रात अज्ञात अपराधियों ने लूट के उद्देश्य से खंडित कर दिया था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 24 घंटे के अंदर दो शातिर अपराधी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने इनके पास से मूर्ति चोरी के उपकरण भी बरामद किया है। नालंदा पुलिस कप्तान कुमार आशीष ने मूर्ति तोड़ने के मामले को गंभीरता से लेते हुए छापेमारी अभियान चला रखी थी, जिसमें पुलिस को कामयाबी हासिल हुई ।

रविवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में पुलिस कप्तान कुमार आशीष ने  बताया कि पकड़े गए दोनों शातिर अपराधी है और कई जघन्य अपराधों में संलिप्त होने का रिकार्ड दोनों पर हैं। इन पर लूट और मूर्ति चोरी के दर्जनों मामले विभिन्न थानों में  दर्ज हैं। गिरफ्तार शातिर अपराधियों में एक राजगीर के मार्क्सवादी  नगर के सिया राजवंशी  और दूसरे छविलापुर थाने के गोरौर गांव के श्रवण कुमार है।

पुलिस ने इनके पास से हथौड़ा, हाई टेम्पर ब्लेड सहित कई अन्य उपकरण भी बरामद की  है। एसपी ने बताया कि इनकी मंशा मूर्ति चोरी करने की नहीं थी, बल्कि मूर्ति की जड़ में धन -धातु चोरी करने की थी।  पर सफलता  नही मिलने पर निराश होकर  मूर्ति को खण्डित कर इर्द गिर्द फेंक दिया।

राजस्थान से मंगाई गई थी मूर्ति

राजगीर के वैभारगिरि पर्वत पर स्थापित भगवान पार्श्व नाथ की मूर्ति राजस्थान से लाई गई थी। इस मूर्ति को स्थापित करने में करोड़ों रूपए की लागत आई थी। दस महीने तक मंदिर बनाने का काम चला था। मंदिर बनाने के लिए पहाड़ के काफी नीचे से मजदूर पत्थर, पानी, सीमेंट, बालू व अन्य निर्माण सामग्री काफी मशक्कत के बाद उपर ले जाते थे। इस मूर्ति का अभिषेक करने के लिए देश भर से जैन समाज के  प्रतिष्ठित लोग आए हुए थे।

बताया जाता है कि इस मूर्ति की कीमत नही लगाई जा सकती है। इससे पहले भी 2007 में चोरो ने मूर्ति चोरी करने का प्रयास किया था। अब इस मूर्ति को स्थापित करने में काफी खर्च आएगा। इसके लिए फिर से नयी मूर्ति बनानी पड़ेगी। फिर से यहां अंजन श्लाका (अभिषेक)कर मूर्ति लगाई जाएगी।

राजगीर पहाड़ पर हैं जैन श्वेतांबर के 11 मंदिर 

बताया जाता है कि राजगीर की सभी पंच पहाड़ियों पर जैन श्वेतांबर के कुल 11 मंदिर है। पहले पहाड़ विपुलाचल पर्वत पर भगवान मुनिसुब्रत स्वामी, आदिनाथ और महावीर स्वामी की चरण पादुका दूसरे पहाड़ रत्नागिरि पर चंद्रप्रभु चौमुखी जिनालय, तीसरे पहाड़ उदयगिरि पर सांवलिय पार्श्व नाथ भगवान चौथे पहाड़ स्वर्णगिरि पर आदिनाथ भगवान की मूर्ति है। जबकि पांचवे पहाड़ वैभारगिरि पर भगवान पार्श्व नाथ, महावीर स्वामी, मुनिसुब्रत, धनाशाली भद्र, बासुपूज्य स्वामी व गौतम स्वामी जी की मूर्ति स्थापित है ।

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