एक उम्दा इंसान व लाजवाब फोटोग्राफर थे कृष्ण मुरारी किशन

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कोई डिग्री नहीं थी उनके पास. किसी संस्थान में उन्होंने फोटो की पढ़ाई नहीं की थी. पर, उनके पास वह नजर थी जो दूसरों के पास नहीं थी.जीवन संघर्ष के जरिये उन्होंने वह खास नजर पायी थी. कैमरे तो बहुत सारे लोगों के पास होते हैं, मगर वह नजर कुछ लोगों के पास ही होती है.

kishanकृष्ण मुरारी किशन उन्हीं कुछ लोगों में से एक थे. आज वह हमारे बीच नहीं रहे. कंधे पर बड़ा-सा बैग लटकाये स्कूटर से चलनेवाला एक उम्दा इनसान और लाजवाब फोटोग्राफर अब हमारी स्मृतियों का हिस्सा बन चुका है.

जब फोटो उतारने वह निकले, तो पास में एक साधारण कैमरा और साइकिल थी. पटना के डाकबंगला चौराहे पर किसी जुलूस का फोटो उतारने पहुंचे, तो किसी ने उनका कैमरा हवा में उछाल दिया. मुरारी को लगा, किसी ने उनकी इज्जत हवा में उछाल दी. उछल कर कैमरे को अपने कब्जे में किया.

शायद तब उन्होंने यह भी सोचा होगा-फोटो खींचने को वह नयी पहचान देंगे. यह 1974 की घटना है, जिसे हमने अपने सीनियर से सुनी है. बिहार आंदोलन के दौरान की हजारों तसवीरें उन्होंने उतारीं.

लोकनायक जयप्रकाश नारायण की उनकी उतारी कई तसवीरें राजनीतिज्ञों के यहां देखी जा सकती हैं. जीवंत और अद्भुत फोटो. जाबिर साहब के पास एक तसवीर है. उसमें लोकनायक हैं. जाबिर साहब भी हैं. दिवंगत राजनीतिज्ञों कपरूरी ठाकुर, भागवत झा आजाद, सत्येंद्र नारायण सिन्हा की कई चर्चित तसवीरें उन्होंने उतारी थीं.

krishn_kishanमुख्यमंत्री रहे डॉ जगन्नाथ मिश्र, रामसुंदर दास, लालू प्रसाद और नीतीश कुमार के राजनैतिक कैरियर के हर मोड़ की तसवीर उनके पास है.वाकई केएम किशन ने फोटो जर्नलिज्म को नयी पहचान दी. उसकी ताकत का एहसास कराया.

बिहार की जमीन पर किसी तरह की कोई भी घटना हो और वहां सबसे पहले पहुंचनेवालों में मुरारी न हों, ऐसा सोचा भी नहीं जा सकता था. देश की कोई भी पत्र-पत्रिका हो, वह किशन जी के फोटो के बगैर अधूरी थी. वह छोटी-बड़ी घटनाओं के गवाह रहे.

राजनीतिक उथल-पुथल का दौर हो या छात्र आंदोलन. गांवों में किसान आंदोलन हो या नरसंहार, उन पर पहला क्लिक मुरारी जी का ही होता था. वह जनता और समाज की नजर से फोटो उतारते रहे.  (साभारः अजय कुमार, प्रभात खबर)

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