गद्दार हैं ‘70 वर्षों में देश में कुछ नहीं हुआ’ कहने वाले

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  • मणिका मोहिनी 

वे लोग देश के प्रति गद्दार हैं जो यह कहते हैं कि पिछले 70 वर्षों में देश में कुछ नहीं हुआ। अपने अंदर और अपने आसपास झाँकिए। अपनी आज की और 70 वर्ष पहले की हैसियत को देखिए। क्या आज आप और आपका परिवार वहीँ है जहाँ 70 साल पहले था? क्या आप दिल से मानते हैं कि देश ने कोई प्रगति नहीं की? प्रगति का हिसाब नीचे देखिए।

हर आदमी का standard of living ऊँचा हो गया। गाँव की लगभग दो पीढ़ियाँ शहरों की प्रगति का हिस्सा बन गईं। अनेकों फैक्टरियाँ खुल गईं। जगह-जगह PCO बन गए। कारें इतनी तादाद में हो गईं कि सड़कें छोटी पड़ गईं। फ्लाईओवर, अंडरपास, इतने बन गए कि शहरों को पहचानना मुश्किल हो गया। राजधानी में मेट्रो आ गई। Pro-rata income बढ़ गई। शिक्षित लोगों का अनुपात बढ़ गया। सरकारी और प्राइवेट सेक्टर में तनख्वाहें दस गुणा से भी अधिक बढ़ गईं। व्यापार सेक्टर में बढ़ोत्तरी हुई जिसके कारण बेरोज़गारी की समस्या काफी हद तक हल हुई। गँवार लोग सभ्य हो गए। हमारा देश developing के दायरे से निकल कर developed country की श्रेणी में आ गया।

संवेदनशील चिंतक 'मनिका मोहनी' अपने फेसबुक वाल पर
संवेदनशील चिंतक ‘मनिका मोहनी’ अपने फेसबुक वाल पर

और बरगलाए लोगों को कुछ दिख ही नहीं रहा। और सुनिए। जवाहर लाल नेहरू आज़ाद देश के प्रथम प्रधान मंत्री थे। उनकी शिक्षा, तहज़ीब, कायदे-कानून, highclassness का मुकाबला कोई कर ही नहीं सकता। इंदिरा गाँधी ने राजनीति का नया दर्शन शास्त्र ही लिख दिया था। अल्प अवधि के लिए प्रधान मंत्री बने लाल बहादुर शास्त्री की सौम्यता, भलमनसाहत और सकारात्मक दृष्टिकोण की लोग आज भी तारीफ़ करते हैं।

पी वी नरसिम्हाराव जैसे शिक्षाविद ने अपने काल में क्या घास खोदी? अटल बिहारी वाजपेयी क्या किसी के मुकाबले कम आँके जाने चाहिए? राजीव गाँधी ने देश में संचार क्रांति की शुरुआत की। एक नए युवा भारत का सपना जनता को दिखाया। देश के युवाओं को साथ लेकर एक नए भारत के निर्माण का बीज उन्होंने डाला लेकिन देश में कला, संस्कृति और नैतिकता का उत्थान भी करना चाहा जिसके लिए उन्होंने बुजुर्ग संस्कृति कर्मी 75 वर्षीय पुपुल जयकर को सम्मानपूर्वक अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया। हर समय पैसा पैसा पैसा करने से कोई देश तरक्की नहीं करता, जनता में moral values (नैतिक मूल्य) भी रोंपने होते हैं।

और हाँ, हमारे प्यारे खामोश से अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह चाहे मौन रहे, पर देश में उथल-पुथल तो नहीं मचाई, उनके कारण कोई मरा तो नहीं।

इन सबकी पीठ पर सवार होकर आप आए हैं मिस्टर नमो नमो, आपको एक बना-बनाया देश मिला है, एक उन्नत देश। शर्म आनी चाहिए कि जिस धरती पर आप खड़े हैं, उसकी नींव आपने नहीं डाली, आप पहले से तैयार पुख्ता नींव पर खड़े हैं।

आपको जो करना है, अवश्य करें, प्यारे प्रधान मंत्री, पर यह भी बता दें कि आपने पिछले ढाई साल में किया क्या है, लोगों को बहकाने के सिवा? अब तक आपको पता ही चल गया होगा कि इस देश में बहुत लोग ऐसे भी हैं जो आपके बहकावे में नहीं आएँगे क्योंकि, मैं फिर कहूँगी, कि उनकी बुद्धि घास चरने नहीं गई है।

जनता से यह कहना छोड़ दें, कि ‘सबको नकार कर मुझे भजो, भक्तों, सिर्फ मैं ही मैं हूँ, अहम् ब्रह्मो अस्मि, I am your ultimate boss, whatever I say is correct because I say so.’

ढाई साल से सावन आया है, बिजलियाँ गिराता हुआ, जिसकी चकाचौंध में लोग अंधे हो गए हैं। और सावन का अंधों को हरा ही हरा दिखाई दे रहा है।

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