सीएम से पंगा लेने के बाद फौरन हटाए गए सीएस !

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sajal_das” अरे बॉस , नौकरी करते हैं। हम मीटिंग में थे। ऑर्डर आ गया। नोटिफिकेशन भी हो गया। आज ही पद छोड़ देगें। हमको क्या, अब मस्ती करेगें। जो हुआ ठीक हुआ। अब हम ज्यादा माथा लगाने वाले नहीं हैं। “

यह कहना है अपने पद से अचानक हटाए गए झारखंड सरकार के मुख्य सचिव सजल चक्रवर्ती का। चक्रवर्ती का यह बयान रांची के एक हिन्दी दैनिक में बतौर कोटेशन प्रमुख पेज पर प्रकाशित हुआ है।

झारखंड सरकार ने उनके स्थान पर  केन्द्रीय गृह मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी राजीव गौबा को मुख्य सचिव बनाया है। चक्रवर्ती एक तेज-तर्रार अफसर माने जाते हैं। मुख्य सचिव के पद पर रहते हुए उन्होंने कई चर्चित कार्रवाईयों को अंजाम दिया है।

चक्रवर्ती को यह विश्वास था कि  हेमंत सरकार न सही, नवेली रघुवर सरकार उन्हें स्थाई मुख्य सचिव के तौर पर कार्य करने का अवसर जरुर देगी। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ।  ‘दिल्ली लॉबी ‘ के बल राजीव गौबा पद मार ले गए।

दरअसल सजल चक्रवर्ती की तेज तर्रारी ही उनकी पद से विदाई का कारण बन गया। पूर्व की हेमंत सरकार भी उनके उसी लहजे  से हमेशा परेशान दिखती रही।

कहते हैं कि इस बार उन्होंने मुख्यमंत्री रघुवर दास से सीधे पंगा ले लिया। अभी  मुख्यमंत्री रघुवर दास भी काफी तेवर में दिख रहे हैं। सो वो कहां मानने वाले थे। बड़बोले कहिए या स्वभिमानी सजल चक्रवर्ती को उनकी औकात बता दिया।

मामला झारखंड सरकार की एक समीक्षा बैठक की है। उस समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री रघुवर दास और मुख्य सचिव सजल चक्रवर्ती के बीच पुलिसिंग को लेकर खुला विवाद हो गया। बैठक में जब सजल चक्रवर्ती ने जब गृह सचिव और डीजीपी से यह आदेश निकालने को कहा कि एसपी, आईजी, डीआईजी से लेकर अन्य अधिकारी कब और कितने दिनों तक निरीक्षण कार्य करेगें तो इस मुख्यमंत्री रघुवर दास  ने कहा कि छोड़ो-छोड़ो, आदेश क्या निकलेगा।  बस फिर क्या था।  मुख्यमंत्री के मुंह से इतना सुनते हीं  सजल चक्रवर्ती तमतमा उठे और कुर्सी से उठ कर बोले, ” …यदि मेरी बात नहीं सुनेगें तो आ एम गोईंग…।” इस पर मुख्यमंत्री ने भी दो दूक बोल दिया कि “….गो गो गो…।” 

इसके बाद बैठक से बाहर सजल चक्रवर्ती ने पत्रकारों  से कहा कि ”मैं राज्य का मुख्य सचिव हूं और ये मेरी ड्यूटी बनती है कि मैं राज्य के हित में बोलूं और जब 4-5 बार ऐसा हुआ तो फिर मैं चिल्ला पड़ा उनका व्यवहार बड़ा ही कठोर था”।

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