मैं शहीद पापा बेटी हूं, पर आपके शहीद की बेटी नहीं : गुरमेहर

गुरमेहर ने अपने ब्लॉग पर लिखा है कि अब मैं अपने बारे में अपने शब्दों में बता रही हूं… ‘पाकिस्तान ने मेरे पिता को नहीं मारा, बल्कि जंग ने मारा है’, वीडियो जारी करने वाली गुरमेहर कौर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने एक ब्लॉग लिखा है। जिसका नाम ‘आई एम’ है। उन्होंने मंगलवार को ट्विटर पर ब्लॉग का लिंक शेयर कर इसकी जानकारी दी। लिखा, आपने मेरे बारे में पढ़ा है, लेखों के अनुसार अपनी राय बनाई है। अब मैं अपने बारे में अपने शब्दों में बता रही हूं। पढ़िए गुरमेहर का पूरा ब्लॉग……….. मैं कौन हूं […]

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एक व्यक्ति नहीं, संस्था थे रमेशजी : शिवराज सिंह चौहान

मुझे याद है कि जब मैंने इंदौर में पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट आयोजित की थी, उस समय प्रदेश में कोई भी बड़ा औद्योगिक घराना आना नहीं चाहता था। कई लोगों ने इस आयोजन को लेकर मजाक भी बनाया। उस कठिन समय में रमेशजी ने न सिर्फ मेरा हौसला बढ़ाया बल्कि खुलकर सहयोग दिया। उनके ही सुझावों और व्यक्तिगत संबंधों से उस समिट में देश के ही नहीं बल्कि विदेश के भी कई प्रतिष्ठित उद्योग समूहों ने भाग लिया। यह उन्हीं के प्रयासों का ही परिणाम था कि कई औद्योगिक घरानों ने मप्र में पूंजी निवेश भी किया। वे मप्र की […]

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अनुचित है रांची कॉलेज का नाम बदलना

-: नवीन शर्मा :- राज्य के सबसे पुराने कालेज रांची कालेज का नाम बदल कर डाक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय कर दिया गया है। यह निर्णय किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं लगता है। मेरा दृढ़ता से मानना है कि किसी भी पुराने संस्थान के नाम से लोगों की भावना जुड़ी होती है उसका अपना एक इतिहास होता है। उस संस्थान से जुड़े लोगों का उस संस्थान से एक तारत्मय बना होता है उसे बिना किसी वाजिब कारण के तोड़ना अनुचित है। रांची कॉलेज नाम में कोई बुराई तो नहीं है। ऐसा भी नहीं है कि वाराणसी या प्रयाग की तरह […]

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आपकी पार्टी भी कोई दूध की धूली नहीं है शरद यादव जी

23 मार्च 2017, राज्यसभा, नई दिल्ली। जदयू सांसद शरद यादव गरज रहे है… वे पत्रकारिता जगत में आयी गिरावट, कुरीतियों एवं अखबार-चैनल के मालिकों द्वारा की जा रही गंदी हरकतों और उससे शर्मसार होता लोकतंत्र पर केन्द्र सरकार का ध्यान आकृष्ट करा रहे हैं। विषय गंभीर है, पर राज्यसभा में गिने-चुने सदस्य ही मौजूद है, स्वयं जदयू के कई सांसद राज्यसभा से गायब है। सरकार के नुमाइंदों की संख्या भी कम है। ले-देकर एक केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ही मौजूद है, जो एक तरह से नमूने ही कहे जायेंगे। जदयू सांसद शरद यादव, बहुत अच्छा बोलते है, इसमें कोई दो मत […]

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आखिर रघुवर दास महेन्द्र सिंह धौनी से इतने चिढ़ते क्यों है?

मोमेंटम झारखण्ड की ब्रांडिंग या झारखण्ड का इमेज दूसरे राज्यों में चमकाने के लिए महेन्द्र सिंह धौनी ने एक भी पैसे नहीं लिये। यह भी याद रखिये कि महेन्द्र सिंह धौनी लगातार मोमेंटम झारखण्ड के कार्यक्रम में अपने सारे कार्यों को छोड़ कर, इसमें स्वयं को हृदय से समायोजित किया है और ऐसे व्यक्ति से मुख्यमंत्री का चिढ़ जाना, उसके पोस्टर व बैनर देखकर भड़क जाना, हमें कुछ अच्छा नहीं लगा। कल की ही बात है। रांची से प्रकाशित हिन्दुस्तान अखबार ने अपने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि मोमेंटम झारखण्ड के क्रम में कुछ अफसरों के बीच झड़प […]

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हमारे पत्रकार संगठन का हर विवाद अंदरुनी मामलाः IFWJ अध्यक्ष

रांची (मुकेश भारतीय)। इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट (IFWJ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष वी. विक्रम राव ने कहा है कि  IFWJ के साथ झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिशन (JJA) का जुड़ाव उसी तरह है, जिस तरह जिस तरह से झारखंड भारत से जुड़ा है। संगठन के बारे में वही सबाल कर सकता है, जो संगठन से जुड़ा है और हर विवाद संगठन का अंदरुनी मामला है। जब उनसे पुछा गया कि JJA  से जुड़े अनेक पत्रकार सदस्यों की शिकायत है कि संगठन पर हावी व्यक्तिवादी लोग किसी का नहीं सुनते। वे सोशल मीडिया के तहत ही पद देते हैं और जब चाहें छीन लेते हैं। […]

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अखबारों और चैनलों के सीले होठ और चूं-चूं का मुरब्बा बना झारखंड सीएम जनसंवाद केन्द्र

रांची। वरीय अधिकारियों के दल ने विज्ञापन का ऐसा लालच दिखाया है कि ये अखबार और चैनलवाले आम जनता के सामने नंगे हो गये है, फिर भी बेशर्म की तरह सीना तानकर खड़े है और कह रहे है कि हम लोकतंत्र के चौथे स्तंभ है, जबकि सच्चाई यह है कि ये इंसानियत के नाम पर कलंक है। आपको मालूम होगा कि मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र में कार्यरत दो बेटियों ने यहां हो रहे गलत कार्यों का विरोध किया, उनका कहना था कि मुख्यमंत्री जनंसवाद केन्द्र में कार्यरत महिलाओं के साथ अपमानजनक व्यवहार होता है, इन दोनों बेटियों ने इसकी जानकारी राज्य महिला […]

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रघु’राज में झारखंडी मीडिया को धिक्कार, कोई नहीं समझता बिटियों की पीड़ा

रांची। झारखंड की मीडिया को जिन्होंने रांची की बेटियों की आवाज सुनने से इनकार कर दिया। धिक्कार उस सरकार को जिसे पता ही नहीं कि उनकी बेटियों के संग उन्हीं के नाक के नीचे क्या हो रहा है। रांची स्थित सूचना भवन में चल रहे मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र में कार्यरत महिलाकर्मियों ने राज्य महिला आयोग को पत्र लिखा है कि मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र में कार्यरत वरीय अधिकारियों एवं नियोक्ता के द्वारा उनके साथ बराबर दुर्व्यवहार किया जाता है, अपमानित किया जाता है। इन महिलाकर्मियों ने उक्त पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रीय महिला आयोग नई दिल्ली, प्रधानमंत्री भारत सरकार, मुख्यमंत्री झारखण्ड, राज्यपाल झारखण्ड, […]

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पद्मश्री बलबीर दत्त आज की पत्रकारिता में अप्रासंगिक क्यों?

झारखंड की पत्रकारिता के शीर्ष पुरुष बलबीर दत्त जी को पद्मश्री से नवाजा जाएगा। निश्चय ही यह हर्ष और गर्व का क्षण है। यह और बात है कि आज के दौर के कई पत्रकारों को बलबीर दत्त अप्रासंगिक लगते हैं। उन जैसी शख्सियत को आज की पत्रकारिता के माहौल में अप्रासंगिक माना जाता है, तो इसकी वजहें जानने की कोशिश जरूर होनी चाहिए। मेरी समझ के मुताबिक इसकी वजहें ये सकती हैं। बलबीर जी अपनी कक्षा के हर विद्यार्थी को पहला मंत्र यह दिया करते – पढ़ो-पढ़ो-पढ़ो…लिखो-लिखो-लिखो। फिर विस्तार से इसकी व्याख्या कर बताते कि अच्छा पत्रकार वही होता है जो […]

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इस लॉटरी अर्थव्यवस्था का माई बाप कौन? PayTMPM या FMCorporate ?

-: पलाश विश्वास :- इस लावारिश लाटरी अर्थव्यवस्था का माई बाप कौन है? PayTMPM या FMCorporate? रिजर्व बैंक तो खैर दिवालिया है और शेर बाजार सांढ़ों और भालुओं के कब्जे में हैं। काम धंधे,रोजगार,व्यवसाय वाणिज्य और उद्योग भी तबाह हैं। बाजार में नकदी न होने की वजह से मक्खियों तक के भूखों मरने की नौबत है। PayTMPM कायदे कानून, संविधान और संसद से ऊपर है। PayTMPMसंसद में मौन रहे और अब मीडिया पर एकाधिकार वर्चस्व के तहत मंकी बातें चौबीसों घंटे। PayTMPM ने पचास दिनों की मोहलत मांगी थी कि पचास दिन बाद भारतवर्ष की सरजमीं पर सुनहले दिन लैंड करने […]

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‘हम भारत के लोग’ और नेताओं के बीच यह अंतर क्यों ?

लोकतंत्र में  देश  की प्रजा उसका शरीर होती है लोकतंत्र उसकी आत्मा जबकि लोगों के लिए, लोगों के ही द्वारा  चुनी गई सरकार उस देश का मस्तिष्क होता है उसकी बुद्धि होती है।यह लोगों द्वारा चुनी हुई सरकार ही देश की विश्व में दिशा और दशा तय करती है । यह एक अनुत्तरित प्रश्न है कि हमारी आज तक की सरकारों ने लोकतंत्र की इस परिभाषा और उसके मकसद को किस हद तक पूरा किया है। सरकार और उसके पदाधिकारियों ने जो कि देश के मस्तिष्क का प्रतिनिधित्व करते हैं आजादी के बाद से ही देश के भविष्य को ताक पर […]

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आलोक जी, भड़वे और दलाल हैं हम पत्रकार !

– अनंत झा– हम सत्ताधारियों के पिछलग्गू है। हमें आपकी पीड़ा नहीं दिख रही है। हमने अपने इमोशन पर तेजाब डाल लिया है। हमें आपकी परेशानी से क्या? आप ना सांसद हैं, ना विधायक हैं और ना ही कोई धन्नासेठ सो हमें आपकी बीमारी से क्या? आलोक जी, आप तो अख़बार में पूरे पन्ने का विज्ञापन भी नहीं दे सकते और ना ही किसी चैनल का टाइम स्लॉट खरीद सकते हैं। आप तो पत्रकार ठहरे वो भी छोटी जगह के। आप रांची और दिल्ली के भी तो पत्रकार नहीं हैं, जो सत्ता के बैकडोर का फायदा किसी को दिला देंगे। आपकी […]

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