धन्य है बिहार के नेता… धन्य है बिहार के पत्रकार…

इन दिनों बिहार के दो यादव नेताओं का पूरे देश में धूम है। एक है राजद सुप्रीमो लालू यादव और दूसरे है राजद के ही विधायक नीरज यादव। दोनों की समानता यह है कि दोनों पत्रकारों से ही भीड़ गये है। लालू यादव रिपब्लिक टीवी के पत्रकारों को उनकी औकात बता रहे है, वहीं नीरज यादव तो प्रभात खबर के पत्रकार को गालियों से नवाज दिया है। अगर इनसे संबंधित समाचारों की बारीकियों को देखें तो रिपब्लिक टीवी के पत्रकार लालू के समक्ष शेर की तरह भिड़ते नजर आ रहे है, वहीं प्रभात खबर का पत्रकार नीरज यादव के समक्ष मिमियाता […]

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तबादले पर बवाल है-उठते कई सवाल हैं

देश की सबसे प्रतिष्ठित सरकारी सेवा मानी जाती है यूपीएससी, जिसके अंतर्गत दृढ़ इच्छाशक्ति ओर कठिन परिश्रम से देश के युवा इस सेवा में शामिल होकर विभिन्न पदों पर अपनी सेवाएं देते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि संदीप कदम, मनोज कुमार, भोर सिंह, इंद्रजीत महथा, पी मुरुगन और नैंसी सहाय जैसे कई और अन्य अधिकारी ही क्यों शिद्दत के साथ सिस्टम और समाज को सुधारने का बीड़ा उठाते हैं, क्यों अन्य अधिकारी ये जिम्मा नहीं निभाते, इसी शून्यता में कुछ अधिकारी अच्छा कार्य करके समाज मे हीरो बन जाते हैं। लेकिन सवाल है क्या कमी रह जाती है उन युवा […]

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बच्चे फेल नहीं हुए, आपका सिस्टम फेल हुआ साहब

झारखंड और बिहार के मैट्रिक और इंटर का रिजल्ट यहां के शैक्षणिक माहौल की गंदगी और सड़ाध का ही प्रतिफल है। झारखंड में मैट्रिक की परीक्षा में 4.63 लाख में से 1.95 लाख बच्चे फेल हो गए। वहीं इंटर में 62 हजार परीक्षार्थी फेल हो गए। यांनी कुल 2.57 लाख बच्चे फेल हो गए। यह बहुत ही खतरनाक संकेत है।यही हाल बड़े भाई बिहार का भी है। वहां भी 12वीं की परीक्षा में 12 लाख में से आठ लाख घुलट गए। कुछ शातिर नेता और अधिकारी इस शर्मनाक रिजल्ट के लिए बेवकूफ जैसी सफाई दे रहे हैं। कोई कह रहा है […]

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रघु’राज के सलाहकार योगेश-अजय प्रक्ररण का स्वागत होनी चाहिेये

-: श्री कृष्ण बिहारी मिश्र :- मुख्यमंत्री रघुवर दास ने योगेश किसलय को प्रेस सलाहकार पद से हटा दिया और योगेश किसलय की जगह अपने राजनीतिक सलाहकार अजय कुमार को इस पद पर नियुक्त कर दिया, अर्थात् आप कह सकते है कि मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अजय कुमार का जहां पर कतरा, वहीं योगेश किसलय को बाहर का रास्ता दिखा दिया। आम तौर पर देखा जाय तो ऐसे पद मुख्यमंत्री अपनी सुविधानुसार बनाते है, रखते है फिर मिटा देते है, पर इससे आम जनता को क्या फायदा होता है? या मुख्यमंत्री को ये लोग कितना सलाह दे पाते है, उसका सबसे […]

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सीएम के कनफूंकवों के इशारे पर हुई FIR और रांची के ये अखबार यूं लगे ठुमरी गाने

वरिष्ठ पत्रकार कृष्ण बिहारी मिश्र ने दी विरोधियों को खुली चुनौती- जागीर तुम्हारी, शासन तुम्हारा। कनफूंकवे तुम्हारे और ठुमरी गानेवाले अखबार तुम्हारा। रांची से प्रकाशित कुछ राष्ट्रीय अखबारों ने मुख्यमंत्री रघुवर दास और उनके कनफूंकवों को खुश करने के लिए हाथों में गजरा लगाकर ठुमरी गाया….. भाजपा नेता ने ही रघुवर को राम बनाया और भाजपा नेता ने ही उस चित्र को मुझे भेजा और भाजपा नेता ने ही कनफूंकवों के इशारे पर मेरे खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा दी, यानी ऐसे चल रहा है, रघुवर शासन और ऐसे चल रही है रघुवर के इशारे पर यहां की पत्रकारिता… जी हां, रांची […]

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सोशल मीडिया को भी प्रेस परिषद दायरे में लाना चाहिएः अध्यक्ष न्यायमूर्ति सी.के. प्रसाद

भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष न्यायमूर्ति सी.के. प्रसाद ने परिषद के कार्य क्षेत्र के विस्तार करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार को अब सोशल मीडिया को भी इस वैधानिक निकाय के दायरे में लाना चाहिए, क्योंकि इसकी पहुंच प्रिंट मीडिया से भी ज्यादा है। प्रेस क्लब में ‘भारतीय प्रेस परिषद और प्रेस की स्वतंत्रता’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के जरिए चंद सेकेंड में पूरी दुनिया में कोई बात प्रसारित की जा सकती है। ऐसा भी कहा जाता है कि देश में कई बुरी घटनाएं सोशल मीडिया पर गलत संदेश प्रसारित किए जाने की […]

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प्रिंट मीडिया के लिये यह है आत्म-चिंतन का समय

भारत में प्रिंट मीडिया का बाजार 30,300 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। लेकिन यह बहस का विषय हो सकता है कि राजस्व और पाठक संख्या के लिहाज से जोरदार बढ़ोतरी करने वाले समाचार पत्र और पत्रिकाएं क्या बेहतरीन पत्रकारिता के लिए भी इसका इस्तेमाल कर रही हैं? हिंदी डिजिटल विंग ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ में छपे अपने आलेख के जरिए यह कहना है कॉलमिनिस्ट वनिता कोहली खांडेकर का। उनका पूरा आलेख है….. हाल ही में मीडिया जगत से संबंधित तीन ऐसी खबरें आईं जिन पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है। पहली, भारत में प्रिंट मीडिया की शानदार प्रगति अब भी जारी है। देश […]

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पहले ‘जय जवान,जय किसान’ और अब ‘मर जवान,मर किसान’

कभी इसी देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने एक नारा दिया था – जय जवान, जय किसान। बाद में अटल बिहारी वाजपेयी जब प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने वैज्ञानिकों की कर्मठता को देखा तो उस नारे में दो शब्द और जोड़े और फिर हुआ – जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, पर आज देश की क्या स्थिति है? न जवान की जय हो रही है, न किसान की जय हो रही है और न ही विज्ञान की जय हो रही है, तब जय किसकी हो रही है…   जाहिर है… नेताओं की, उनकी पत्नियों की और उनके बेवकूफ औलादों की। उद्योगपतियों […]

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अपने ही मुल्क में दफ्न होती ज़िंदगियां ! और कितनी शहादत ?

-: अरविन्द प्रताप :- झारखण्ड – छतीसगढ़ राज्य बनते ही इनके हिस्से में एक सबसे भयानक दुस्वारी आयी, जिसका नाम था नक्सलवाद, नक्सलवाद ने झारखण्ड और छतीसगढ़ जैसे कई राज्यों को खून के आंसू रुलाया है, जिसकी बलिवेदी पर न केवल सूबे के सांसद…और विधायक बलि चढ़ते रहे…बल्कि यहां की धरती रोजाना देश के जवानों के खून से लाल भी होती रही… राज्य में बनी सरकारों ने कभी इस मसले पर गंभीरता नहीं दिखाई…नतीजन वक़्त के साथ यह समस्या भी सूबे में नासूर बनता गया…नक्सली कैसे सूबे में लाल कारीडोर का निर्माण करते चले गए…और सरकारें कैसे बौनी बनी रहीं… छतीसगढ़ में […]

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मैं शहीद पापा बेटी हूं, पर आपके शहीद की बेटी नहीं : गुरमेहर

गुरमेहर ने अपने ब्लॉग पर लिखा है कि अब मैं अपने बारे में अपने शब्दों में बता रही हूं… ‘पाकिस्तान ने मेरे पिता को नहीं मारा, बल्कि जंग ने मारा है’, वीडियो जारी करने वाली गुरमेहर कौर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने एक ब्लॉग लिखा है। जिसका नाम ‘आई एम’ है। उन्होंने मंगलवार को ट्विटर पर ब्लॉग का लिंक शेयर कर इसकी जानकारी दी। लिखा, आपने मेरे बारे में पढ़ा है, लेखों के अनुसार अपनी राय बनाई है। अब मैं अपने बारे में अपने शब्दों में बता रही हूं। पढ़िए गुरमेहर का पूरा ब्लॉग……….. मैं कौन हूं […]

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एक व्यक्ति नहीं, संस्था थे रमेशजी : शिवराज सिंह चौहान

मुझे याद है कि जब मैंने इंदौर में पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट आयोजित की थी, उस समय प्रदेश में कोई भी बड़ा औद्योगिक घराना आना नहीं चाहता था। कई लोगों ने इस आयोजन को लेकर मजाक भी बनाया। उस कठिन समय में रमेशजी ने न सिर्फ मेरा हौसला बढ़ाया बल्कि खुलकर सहयोग दिया। उनके ही सुझावों और व्यक्तिगत संबंधों से उस समिट में देश के ही नहीं बल्कि विदेश के भी कई प्रतिष्ठित उद्योग समूहों ने भाग लिया। यह उन्हीं के प्रयासों का ही परिणाम था कि कई औद्योगिक घरानों ने मप्र में पूंजी निवेश भी किया। वे मप्र की […]

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अनुचित है रांची कॉलेज का नाम बदलना

-: नवीन शर्मा :- राज्य के सबसे पुराने कालेज रांची कालेज का नाम बदल कर डाक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय कर दिया गया है। यह निर्णय किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं लगता है। मेरा दृढ़ता से मानना है कि किसी भी पुराने संस्थान के नाम से लोगों की भावना जुड़ी होती है उसका अपना एक इतिहास होता है। उस संस्थान से जुड़े लोगों का उस संस्थान से एक तारत्मय बना होता है उसे बिना किसी वाजिब कारण के तोड़ना अनुचित है। रांची कॉलेज नाम में कोई बुराई तो नहीं है। ऐसा भी नहीं है कि वाराणसी या प्रयाग की तरह […]

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