सीएम के कनफूंकवों के इशारे पर हुई FIR और रांची के ये अखबार यूं लगे ठुमरी गाने

वरिष्ठ पत्रकार कृष्ण बिहारी मिश्र ने दी विरोधियों को खुली चुनौती- जागीर तुम्हारी, शासन तुम्हारा। कनफूंकवे तुम्हारे और ठुमरी गानेवाले अखबार तुम्हारा। रांची से प्रकाशित कुछ राष्ट्रीय अखबारों ने मुख्यमंत्री रघुवर दास और उनके कनफूंकवों को खुश करने के लिए हाथों में गजरा लगाकर ठुमरी गाया….. भाजपा नेता ने ही रघुवर को राम बनाया और भाजपा नेता ने ही उस चित्र को मुझे भेजा और भाजपा नेता ने ही कनफूंकवों के इशारे पर मेरे खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा दी, यानी ऐसे चल रहा है, रघुवर शासन और ऐसे चल रही है रघुवर के इशारे पर यहां की पत्रकारिता… जी हां, रांची […]

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सोशल मीडिया को भी प्रेस परिषद दायरे में लाना चाहिएः अध्यक्ष न्यायमूर्ति सी.के. प्रसाद

भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष न्यायमूर्ति सी.के. प्रसाद ने परिषद के कार्य क्षेत्र के विस्तार करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार को अब सोशल मीडिया को भी इस वैधानिक निकाय के दायरे में लाना चाहिए, क्योंकि इसकी पहुंच प्रिंट मीडिया से भी ज्यादा है। प्रेस क्लब में ‘भारतीय प्रेस परिषद और प्रेस की स्वतंत्रता’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के जरिए चंद सेकेंड में पूरी दुनिया में कोई बात प्रसारित की जा सकती है। ऐसा भी कहा जाता है कि देश में कई बुरी घटनाएं सोशल मीडिया पर गलत संदेश प्रसारित किए जाने की […]

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प्रिंट मीडिया के लिये यह है आत्म-चिंतन का समय

भारत में प्रिंट मीडिया का बाजार 30,300 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। लेकिन यह बहस का विषय हो सकता है कि राजस्व और पाठक संख्या के लिहाज से जोरदार बढ़ोतरी करने वाले समाचार पत्र और पत्रिकाएं क्या बेहतरीन पत्रकारिता के लिए भी इसका इस्तेमाल कर रही हैं? हिंदी डिजिटल विंग ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ में छपे अपने आलेख के जरिए यह कहना है कॉलमिनिस्ट वनिता कोहली खांडेकर का। उनका पूरा आलेख है….. हाल ही में मीडिया जगत से संबंधित तीन ऐसी खबरें आईं जिन पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है। पहली, भारत में प्रिंट मीडिया की शानदार प्रगति अब भी जारी है। देश […]

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पहले ‘जय जवान,जय किसान’ और अब ‘मर जवान,मर किसान’

कभी इसी देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने एक नारा दिया था – जय जवान, जय किसान। बाद में अटल बिहारी वाजपेयी जब प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने वैज्ञानिकों की कर्मठता को देखा तो उस नारे में दो शब्द और जोड़े और फिर हुआ – जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, पर आज देश की क्या स्थिति है? न जवान की जय हो रही है, न किसान की जय हो रही है और न ही विज्ञान की जय हो रही है, तब जय किसकी हो रही है…   जाहिर है… नेताओं की, उनकी पत्नियों की और उनके बेवकूफ औलादों की। उद्योगपतियों […]

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अपने ही मुल्क में दफ्न होती ज़िंदगियां ! और कितनी शहादत ?

-: अरविन्द प्रताप :- झारखण्ड – छतीसगढ़ राज्य बनते ही इनके हिस्से में एक सबसे भयानक दुस्वारी आयी, जिसका नाम था नक्सलवाद, नक्सलवाद ने झारखण्ड और छतीसगढ़ जैसे कई राज्यों को खून के आंसू रुलाया है, जिसकी बलिवेदी पर न केवल सूबे के सांसद…और विधायक बलि चढ़ते रहे…बल्कि यहां की धरती रोजाना देश के जवानों के खून से लाल भी होती रही… राज्य में बनी सरकारों ने कभी इस मसले पर गंभीरता नहीं दिखाई…नतीजन वक़्त के साथ यह समस्या भी सूबे में नासूर बनता गया…नक्सली कैसे सूबे में लाल कारीडोर का निर्माण करते चले गए…और सरकारें कैसे बौनी बनी रहीं… छतीसगढ़ में […]

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मैं शहीद पापा बेटी हूं, पर आपके शहीद की बेटी नहीं : गुरमेहर

गुरमेहर ने अपने ब्लॉग पर लिखा है कि अब मैं अपने बारे में अपने शब्दों में बता रही हूं… ‘पाकिस्तान ने मेरे पिता को नहीं मारा, बल्कि जंग ने मारा है’, वीडियो जारी करने वाली गुरमेहर कौर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने एक ब्लॉग लिखा है। जिसका नाम ‘आई एम’ है। उन्होंने मंगलवार को ट्विटर पर ब्लॉग का लिंक शेयर कर इसकी जानकारी दी। लिखा, आपने मेरे बारे में पढ़ा है, लेखों के अनुसार अपनी राय बनाई है। अब मैं अपने बारे में अपने शब्दों में बता रही हूं। पढ़िए गुरमेहर का पूरा ब्लॉग……….. मैं कौन हूं […]

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एक व्यक्ति नहीं, संस्था थे रमेशजी : शिवराज सिंह चौहान

मुझे याद है कि जब मैंने इंदौर में पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट आयोजित की थी, उस समय प्रदेश में कोई भी बड़ा औद्योगिक घराना आना नहीं चाहता था। कई लोगों ने इस आयोजन को लेकर मजाक भी बनाया। उस कठिन समय में रमेशजी ने न सिर्फ मेरा हौसला बढ़ाया बल्कि खुलकर सहयोग दिया। उनके ही सुझावों और व्यक्तिगत संबंधों से उस समिट में देश के ही नहीं बल्कि विदेश के भी कई प्रतिष्ठित उद्योग समूहों ने भाग लिया। यह उन्हीं के प्रयासों का ही परिणाम था कि कई औद्योगिक घरानों ने मप्र में पूंजी निवेश भी किया। वे मप्र की […]

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अनुचित है रांची कॉलेज का नाम बदलना

-: नवीन शर्मा :- राज्य के सबसे पुराने कालेज रांची कालेज का नाम बदल कर डाक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय कर दिया गया है। यह निर्णय किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं लगता है। मेरा दृढ़ता से मानना है कि किसी भी पुराने संस्थान के नाम से लोगों की भावना जुड़ी होती है उसका अपना एक इतिहास होता है। उस संस्थान से जुड़े लोगों का उस संस्थान से एक तारत्मय बना होता है उसे बिना किसी वाजिब कारण के तोड़ना अनुचित है। रांची कॉलेज नाम में कोई बुराई तो नहीं है। ऐसा भी नहीं है कि वाराणसी या प्रयाग की तरह […]

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आपकी पार्टी भी कोई दूध की धूली नहीं है शरद यादव जी

23 मार्च 2017, राज्यसभा, नई दिल्ली। जदयू सांसद शरद यादव गरज रहे है… वे पत्रकारिता जगत में आयी गिरावट, कुरीतियों एवं अखबार-चैनल के मालिकों द्वारा की जा रही गंदी हरकतों और उससे शर्मसार होता लोकतंत्र पर केन्द्र सरकार का ध्यान आकृष्ट करा रहे हैं। विषय गंभीर है, पर राज्यसभा में गिने-चुने सदस्य ही मौजूद है, स्वयं जदयू के कई सांसद राज्यसभा से गायब है। सरकार के नुमाइंदों की संख्या भी कम है। ले-देकर एक केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ही मौजूद है, जो एक तरह से नमूने ही कहे जायेंगे। जदयू सांसद शरद यादव, बहुत अच्छा बोलते है, इसमें कोई दो मत […]

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आखिर रघुवर दास महेन्द्र सिंह धौनी से इतने चिढ़ते क्यों है?

मोमेंटम झारखण्ड की ब्रांडिंग या झारखण्ड का इमेज दूसरे राज्यों में चमकाने के लिए महेन्द्र सिंह धौनी ने एक भी पैसे नहीं लिये। यह भी याद रखिये कि महेन्द्र सिंह धौनी लगातार मोमेंटम झारखण्ड के कार्यक्रम में अपने सारे कार्यों को छोड़ कर, इसमें स्वयं को हृदय से समायोजित किया है और ऐसे व्यक्ति से मुख्यमंत्री का चिढ़ जाना, उसके पोस्टर व बैनर देखकर भड़क जाना, हमें कुछ अच्छा नहीं लगा। कल की ही बात है। रांची से प्रकाशित हिन्दुस्तान अखबार ने अपने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि मोमेंटम झारखण्ड के क्रम में कुछ अफसरों के बीच झड़प […]

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हमारे पत्रकार संगठन का हर विवाद अंदरुनी मामलाः IFWJ अध्यक्ष

रांची (मुकेश भारतीय)। इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट (IFWJ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष वी. विक्रम राव ने कहा है कि  IFWJ के साथ झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिशन (JJA) का जुड़ाव उसी तरह है, जिस तरह जिस तरह से झारखंड भारत से जुड़ा है। संगठन के बारे में वही सबाल कर सकता है, जो संगठन से जुड़ा है और हर विवाद संगठन का अंदरुनी मामला है। जब उनसे पुछा गया कि JJA  से जुड़े अनेक पत्रकार सदस्यों की शिकायत है कि संगठन पर हावी व्यक्तिवादी लोग किसी का नहीं सुनते। वे सोशल मीडिया के तहत ही पद देते हैं और जब चाहें छीन लेते हैं। […]

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अखबारों और चैनलों के सीले होठ और चूं-चूं का मुरब्बा बना झारखंड सीएम जनसंवाद केन्द्र

रांची। वरीय अधिकारियों के दल ने विज्ञापन का ऐसा लालच दिखाया है कि ये अखबार और चैनलवाले आम जनता के सामने नंगे हो गये है, फिर भी बेशर्म की तरह सीना तानकर खड़े है और कह रहे है कि हम लोकतंत्र के चौथे स्तंभ है, जबकि सच्चाई यह है कि ये इंसानियत के नाम पर कलंक है। आपको मालूम होगा कि मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र में कार्यरत दो बेटियों ने यहां हो रहे गलत कार्यों का विरोध किया, उनका कहना था कि मुख्यमंत्री जनंसवाद केन्द्र में कार्यरत महिलाओं के साथ अपमानजनक व्यवहार होता है, इन दोनों बेटियों ने इसकी जानकारी राज्य महिला […]

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