अंतरात्मा झांकिये साहब

जब रोम जल रहा था तो नीरो संग उसके साथी भी बंशी बजा रहे थे। लेकिन माफ कीजियेगा झारखंड के सीएम अर्जुन मुंडा जी,  बात उस समय की है- जब आप हैलीकॉप्टर हादसे के बाद प्रायः विस्तर पर पड़े रहते थे और कभी-कभार व्हील चेयर या बैशाखी के सहारे आवासीय परिसर […]

Read more

अविश्वास और उत्पीड़न का पर्याय है झारखंड पुलिस

जब किसी भी सिस्टम का फिल्टर खराब हो जाये, तब अविश्वास और उत्पीड़न जन्म लेता है। आज हम बात करते हैं पुलिस फिल्टर सिस्टम की। इसमें कोई शक नहीं कि पुलिस नेताओं खास कर सत्ता पर कुंडली मार कर बैठे व्यूरोकेट्स के इशारे पर नाचती है। एक आम आदमी के दुःख-दर्द […]

Read more

लो भाई, देख लो आयना

तुझे मान गये भाई। तू है असली झारखंडी मीडिया का एक ऐसा बड़ा वर्ग, जिसके चश्में के गर्द साफ करने की कला राजनामा डॉट कॉम  में नहीं है। तू  कुछ भी छाप-दिखा सकते हो। आखिर वाक्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तेरी जागीर जो ठहरी। भला तू भाई लोग राजनामा डॉट कॉम […]

Read more

सरकारी मनमानी और निकम्मी मीडिया

अक्सर लोग मुझसे पुछते हैं कि आप मीडिया के खिलाफ इतने आक्रोशित क्यों रहते हैं… आखिर क्या मलाल है मीडिया से। सच पुछिये तो मेरे अंदर न तो मीडिया के प्रति कोई व्यक्तिगत आक्रोश है और न ही कोई मलाल। हां, जब एक आम भारतीय के रुप में आंखों के सामने […]

Read more

प्रभात खबर को है हिम्मत यह लिखने की ?

झारखंड-बिहार में भ्रष्टाचार की कोख से प्रकाशित दैनिक प्रभात खबर के स्थानीय संपादक विजय पाठक की निर्मल बाबा से संबंधित समाचार पढा़। मैं किसी भी धर्म-आस्था पर टीका टिप्पणी नहीं करता और सब कुछ जन मानस पर छोड़ देता हूं। फिलहाल, पाठक ने जिस प्रकार के संदर्भों की चर्चा देकर समाचार […]

Read more
1 2 3