अपेक्षा करना बेमानी

जिस हिसाब से सोशल मीडिया पर विरूपित चित्र पोस्ट करने वालों और मोदी के खिलाफ कमेंट करने वालों के खिलाफ कार्यवाही की जा रही है उस हिसाब आधे से ज्यादा बीजेपी समर्थक जेल में होने चाहिए। पिछले चुनावों में जिस तरह का नंगा नाच मोदी समर्थकों ने सोशल मीडिया पर मचाया था वो किसी से भी छुपा नहीं है इन बेशर्म लोगों ने राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी, दिग्विजय सिंह, अरविन्द केजरीवाल ,अमर्त्य सेन यहां तक कि पार्टी के मोदी का विरोध करने वाले अडवाणी सुषमा मुरली मनोहर जोशी, शत्रुघ्न सिन्हा आदि को भी नहीं बख्शा।  इन सभी नेताओं के विरूपित चित्र और […]

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ठीक है डीएसपी साहेब, जंग जारी रहेगी

पिछले दिन रांची के सदर डीएसपी आनंद जोसेफ तिग्गा से मुलाकात हुई। बातचीत के दौरान जो निष्कर्ष सामने आये, वे मेरे लिये न तो हैरान करने वाली रही और न ही परेशान करने वाली। मुझे पहले से पता था कि बात जब उपर वाले की हो तो एक अदद डीएसपी की औकात ही क्या रह जाती है। हां, इतना तो डीएसपी साहेब का शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने सच्चाई के साथ मेरे खिलाफ दर्ज फर्जी मामले को हर स्तर पर स्वीकार किया और अपने पद से इतर एक बतौर एक दोस्त की सलाह इतना अवश्य कहा कि वह अपने सीनियर के खिलाफ […]

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प्रेस काउंसिल की जगह हो मीडिया काउंसिल

वेशक मीडिया का दायरा अब पहले जैसा नहीं रहा। जिस समय प्रेस परिषद की अवधारणाये बनी और एक सार्थक उद्देश्य के लिये उसका गठन हुआ, तब प्रिंट मीडिया ही अस्तित्व में था। आज मीडिया का दायरा काफी बढ़ गया है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के बाद शोशल मीडिया ने तो सूचनाओं व विचारों के आदान प्रदान की दुनिया ही बदल डाली है। भारतीय संविधान में वाक्य व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आजादी के मायने भी बदल गये हैं। ऐसे में सबाल उठना लाजमि है कि प्रिंट मीडिया की तरह इलेक्ट्रॉनिक और शोशल मीडिया पर भी प्रिंट मीडिया की तरह अनुशासन जरुरी नहीं है […]

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बीच सड़क पर गुम मानवता की कसक

आज सुबह जैसे ही घर से रांची शहर के लिये निकलने लगा कि मेरे बेटे ने कहा कि पापा केक लेते आइयेगा।कल 28 फरवरी को उसका जन्म दिन है। रांची पहुंचने के बाद आवश्यक काम निपटाया और शहर का दिल माने जाने वाले फिरायालाल चौक पहुंचा। मेरे साथ मेरे एक मित्र मनोज सिंह, जो दैनिक रांची एक्सप्रेस में संवाददाता हैं, वे भी साथ थे। शहीद चौक और फिरायालाल चौक के बीच मुख्य डाकघर के ठीक सामने  डिवाईडर की दूसरी तरफ एक वयस्क आदमी लगभग सड़क पर वेहोशी की हालत में पड़ा था। उसके मुंह से ढेर सारा पीला रंग का झाग […]

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मेरी आत्मग्लानि का प्रेरक दिन

किसी ने सच ही कहा है कि कोई उपर न होता-कोई नीचे न होता, अगर कोई मजबूर न होता तो कोई खुदा न होता। कल जनवरी माह का अंतिम दिन मेरे लिये आत्मग्लानि का दिन रहा। हालांकि मेरा हरसंभव प्रयास होता है हरेक चीजों से प्रेरणा लेने की। कल भले ही मेरी आत्मा पर चोट लगी हो, विश्वास चूर-चूर हुआ हो..एक नई दिशा अवश्य दे गई है। वेशक अब लोग प्रोफेशनल हो गये हैं। इस  प्रोफेशनल युग में आपको विश्वास ढूंढना बहुत मुश्किल है। आंखों के सामने साथ खड़ा या खड़ा होने के दावा करने वाला व्यक्ति कब फरेब कर जाता […]

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गणतंत्र दिवसः गण का तेजी से बदलता “तंत्र”

 लीजिये एक और गणतंत्र दिवस आ गया। विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश अपने भारत की इस महान राष्ट्रीय  दिवस की सभी को हार्दिक शुभकामनायें। इसके साथ ही याद आ जाता है स्कूली जीवन के वे दिन, जिसकी यादें आज के दौर में आंखे नम कर देती है। क्या वे दिन थे और आज क्या दिन है। वाकई समय के साथ सब कुछ बदल जाता है। सामने के दृश्य बदल जाते हैं। देखने का नजरिया भी बदल जाता है। यादें अस्सी के दशक के दिनों की है। मेरा बचपन  नालंदा जिले के एक सुदूरवर्ती  गांव में  बीता। प्रारंभिक पढ़ाई-लिखाई वहीं हुई। तब गांवों […]

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जय मां भारती। तुझे सलाम।

आज साल-2012 का अंतिम दिन है। यह मेरे लिये आत्म-चिंतन का दिन है। 2012 मानसिक-शारीरिक तौर पर बड़ा पीड़ादायक रहा, फिर भी चेहरे पर मायूसी को फटकने न दिया। 2012 में व्यवस्था के प्रति मन में अविश्वास उत्पन्न हुआ। सत्ता-माफिया-पुलिस के धुरंधरों ने जबरन 15 लाख का रंगदार बना कर जेल भिजवाया। क्या ये लोग किसी को कभी भी कुछ भी बना सकते सकते हैं ? मलाल की बात है कि रांची की मीडिया ने अपना काम ईमानदारी से नहीं किया। उसने सच की परिभाषा ही बदल दी। दारोगा से लेकर आईपीएस अफसर भी माफियाओं के आदेशपाल बने दिखे। तब सब कुछ […]

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अंतरात्मा झांकिये साहब

जब रोम जल रहा था तो नीरो संग उसके साथी भी बंशी बजा रहे थे। लेकिन माफ कीजियेगा झारखंड के सीएम अर्जुन मुंडा जी,  बात उस समय की है- जब आप हैलीकॉप्टर हादसे के बाद प्रायः विस्तर पर पड़े रहते थे और कभी-कभार व्हील चेयर या बैशाखी के सहारे आवासीय परिसर में ही कुछ घुम-फिर भी लेते थे। आपके खबरिया समाचार पत्रों और चैनलों से ज्ञात होता था कि आप राज्य की शासन व्यवस्था की बागडोर वखूबी संभाल रहे थे । जाहिर भी है कि प्रायः शारीरिक रुप से घायल इंसान मानसिक रुप से चोटिल थोड़े होता है। ऐसे मैं भी एक हादसे […]

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अविश्वास और उत्पीड़न का पर्याय है झारखंड पुलिस

जब किसी भी सिस्टम का फिल्टर खराब हो जाये, तब अविश्वास और उत्पीड़न जन्म लेता है। आज हम बात करते हैं पुलिस फिल्टर सिस्टम की। इसमें कोई शक नहीं कि पुलिस नेताओं खास कर सत्ता पर कुंडली मार कर बैठे व्यूरोकेट्स के इशारे पर नाचती है। एक आम आदमी के दुःख-दर्द और उसकी सच्चाई कोई मायने नहीं रखती। एक चौकीदार-कांस्टेवल से लेकर पुलिस सिस्टम का हर महकमा अधिक से अधिक काली कमाई करने पर उतारु है। हम यह नहीं कहते कि इस सिस्टम से जुड़े हर लोग निकम्मे और भ्रष्ट हैं। लेकिन इतना तो सत्य है कि इस सिस्टम में अगर […]

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लो भाई, देख लो आयना

तुझे मान गये भाई। तू है असली झारखंडी मीडिया का एक ऐसा बड़ा वर्ग, जिसके चश्में के गर्द साफ करने की कला राजनामा डॉट कॉम  में नहीं है। तू  कुछ भी छाप-दिखा सकते हो। आखिर वाक्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तेरी जागीर जो ठहरी। भला तू भाई लोग राजनामा डॉट कॉम को ये आजादी क्यों दोगे ! ऐसी भी बात नहीं है कि तू सब राजनामा डॉट कॉम या उसके संचालक-संपादक मुकेश भारतीय को नहीं जानते हो। सब जानते हो। लेकिन,सबाल है कि तू लोग एक बड़े समाचार पत्र को छोड़ मेरा साथ क्यों दोगे। वह भी व्यूरोकेट्स और कॉरपोरेटस् मीडिया की […]

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