देखिये, शाहनवाज जैसे फ्रॉड का डंसा मौत से कैसे जुझ रहा एक पत्रकार

“जेजेए यानि झारखंड जर्नलिस्ट एशोसिएशन और उसके स्वंयभू अध्यक्ष यानि शाहनवाज हुसैन। एक ऐसा संगठन और एक ऐसा शख्स, जिसके बारे में समूचे झारखंड से मिल रही सूचनाएं काफी व्यथित करने वाली है।” राजनामा.कॉम (मुकेश भारतीय)। किसी भी संगठन या उसके स्वंयभूओं को जबरिया  मनमानी, शोषण और दमन करने की छूट नहीं दी जा सकती। खास कर उन्हें जो तत्थों से परे सिर्फ दुष्प्रचार के बल अपना स्वार्थ साधने वालों को तो बिल्कुल नहीं। शहनवाज के कहने पर कथित जेजेए संगठन के लोगों ने शोसल साइट के कई ग्रुपों पर राजनामा.कॉम और उसके संचालक को लेकर कई तरह की उटपुटांग बातें […]

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रघु’राज एक सचः सुशासन का दंभ और नकारा पुलिस तंत्र

रांची (मुकेश भारतीय)। झारखंड के सीएम रघुबर दास राज्य में सुशासन की बात करते हैं लेकिन क्या वाकई यहां कानून का भय कहीं दिखता है ? यदि उनके दो साल के राज खासकर हाल के दिनों की पड़ताल की जाये तो सब कुछ दलगत सत्ता-तंत्र से जुड़े लोगों तक ही सीमित नजर आता है। शासन- प्रशासन का निचला तबका हो या आम आदमी। वह गुंडों और अपराधियों की रहमोकरम पर अधिक निर्भर प्रतीत हो रहा है। आरटीसी इंजीनियरिंग कॉलेज की छात्रा के साथ राजधानी के भीतर जो कुछ जिस निर्दयता से हुआ, उसने निर्भया की बरसी पर एक कलंक बन गया। […]

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सड़क पर गजराज, समझिये इनके गुस्से

–: मुकेश भारतीय :– रांची।  भारतीय वेद, पुरान, रामायण, महाभारत आदि धार्मिक ग्रंथों में गजराज को मानव समुदाय से सीधा जोड़ा गया है। हिन्दू धर्म में कोई भी मांगलिक कार्य जयश्री गणेश यानि लंबोदर महाराज से ही होती है। लेकिन सांस्कारिक शुरुआत के अस्तिव पर ही प्रहार होने लगे तो परिणाम भयावह तो होगें हीं। झारखंड की प्रकृति और जीवन का मूल तत्व जल, जंगल और जमीन है। बढ़ती आबादी और औधोगिकीकरण ने पहले ही यहां की जमीने हड़प ली है। अब उनकी नजर पहाड़ और जंगल पर है। तेजी से जंगल काटे जा रहे हैं। विस्फोटों से पहाड़-पर्वत कांप रहे है। […]

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मीडिया के चतुर सयानों की सूचना को अब राज़नामा नहीं लेगी संज्ञान

इस साइट पर “वरिष्ठ संपादक हरिनारायण जी ने यूं उकेरी उषा मार्टिन एकेडमी के छात्र की पीड़ा  ”  शीर्षक से एक खबर प्रकाशित की थी। उस खबर पर रांची के एक पत्रकार ने अपनी पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर “हरिनारायण जी बताईये,  दैनिक आजाद सिपाही में क्यों नहीं छापी अपनी फेसबुक पीड़ा ? ” नामक ई-मेल की थी। लेकिन हम इस खबर को निम्न अपी के साथ हटा रहे हैं…….. हरिनारायण जी बताईये,  दैनिक आजाद सिपाही में क्यों नहीं छापी अपनी फेसबुक पीड़ा ?  शीर्षक से जुड़े समाचार को साइट से हटा दिया गया है क्योंकि, उसे एक ऐसी ई-मेल द्वारा प्राप्त […]

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रघुबर जी, शराबबंदी को लेकर अपनी बाट न लगाईए

-: मुकेश भारतीय :- नशेड़ी ही नशे की बात करता है। झारखंड के सीएम रघुवर दास ने बिहार के सीएम नीतिश कुमार के उस बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें श्री कुमार ने कहा था कि झारखंड सरकार को घमंड का नशा हो गया है। वेशक श्री दास के इस प्रतिक्रिया को आक्रामक नहीं कहा जा सकता। राजनीतिक विश्लेशक इसे अपरिपक्वता का परिचायक मानते हैं। बकौल रघुवर, यह कहना कि बिहार के सीएम को जातिवाद का नशा है।, भ्रष्टाचार का नशा है और घमंड का भी नशा है। वो हमसे नशा की बात कर रहे हैं। आखिर नीतिश कुमार ने […]

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नीतीश जी इ अंधभक्त को समझाईये कि गोरैया बाबा कब से खून पीने लगे

राज़नामा.कॉम (मुकेश भारतीय)। नीतिश जी यह पागलपन है। उसे आप ही बेहतर समझा सकते हैं। समर्थक सब होते हैं। भक्त भी बन जाते हैं लेकिन अंधभक्ति को उचित नहीं ठहराया जा सकता । अब देखिए न। जहानाबाद के घोसी थाना के वैना गांव के युवक अनिल शर्मा उर्फ अली बाबा को। आपकी पांचवी बार सीएम बनने के बाद जो किया है और इसके पहले भी चार बार करता आया है, वह चाहत नहीं, पागलपन की हद है। उसने आपकी पांचवी ताजपोशी होने के साथ ही अपनी पांचवी उंगली भी अंधविश्वास की भेंट चढ़ा दिया है। इन दिनों फेसबुक, व्हाट्सअप जैसे सोशल […]

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अपेक्षा करना बेमानी

जिस हिसाब से सोशल मीडिया पर विरूपित चित्र पोस्ट करने वालों और मोदी के खिलाफ कमेंट करने वालों के खिलाफ कार्यवाही की जा रही है उस हिसाब आधे से ज्यादा बीजेपी समर्थक जेल में होने चाहिए। पिछले चुनावों में जिस तरह का नंगा नाच मोदी समर्थकों ने सोशल मीडिया पर मचाया था वो किसी से भी छुपा नहीं है इन बेशर्म लोगों ने राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी, दिग्विजय सिंह, अरविन्द केजरीवाल ,अमर्त्य सेन यहां तक कि पार्टी के मोदी का विरोध करने वाले अडवाणी सुषमा मुरली मनोहर जोशी, शत्रुघ्न सिन्हा आदि को भी नहीं बख्शा।  इन सभी नेताओं के विरूपित चित्र और […]

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ठीक है डीएसपी साहेब, जंग जारी रहेगी

पिछले दिन रांची के सदर डीएसपी आनंद जोसेफ तिग्गा से मुलाकात हुई। बातचीत के दौरान जो निष्कर्ष सामने आये, वे मेरे लिये न तो हैरान करने वाली रही और न ही परेशान करने वाली। मुझे पहले से पता था कि बात जब उपर वाले की हो तो एक अदद डीएसपी की औकात ही क्या रह जाती है। हां, इतना तो डीएसपी साहेब का शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने सच्चाई के साथ मेरे खिलाफ दर्ज फर्जी मामले को हर स्तर पर स्वीकार किया और अपने पद से इतर एक बतौर एक दोस्त की सलाह इतना अवश्य कहा कि वह अपने सीनियर के खिलाफ […]

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प्रेस काउंसिल की जगह हो मीडिया काउंसिल

वेशक मीडिया का दायरा अब पहले जैसा नहीं रहा। जिस समय प्रेस परिषद की अवधारणाये बनी और एक सार्थक उद्देश्य के लिये उसका गठन हुआ, तब प्रिंट मीडिया ही अस्तित्व में था। आज मीडिया का दायरा काफी बढ़ गया है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के बाद शोशल मीडिया ने तो सूचनाओं व विचारों के आदान प्रदान की दुनिया ही बदल डाली है। भारतीय संविधान में वाक्य व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आजादी के मायने भी बदल गये हैं। ऐसे में सबाल उठना लाजमि है कि प्रिंट मीडिया की तरह इलेक्ट्रॉनिक और शोशल मीडिया पर भी प्रिंट मीडिया की तरह अनुशासन जरुरी नहीं है […]

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बीच सड़क पर गुम मानवता की कसक

आज सुबह जैसे ही घर से रांची शहर के लिये निकलने लगा कि मेरे बेटे ने कहा कि पापा केक लेते आइयेगा।कल 28 फरवरी को उसका जन्म दिन है। रांची पहुंचने के बाद आवश्यक काम निपटाया और शहर का दिल माने जाने वाले फिरायालाल चौक पहुंचा। मेरे साथ मेरे एक मित्र मनोज सिंह, जो दैनिक रांची एक्सप्रेस में संवाददाता हैं, वे भी साथ थे। शहीद चौक और फिरायालाल चौक के बीच मुख्य डाकघर के ठीक सामने  डिवाईडर की दूसरी तरफ एक वयस्क आदमी लगभग सड़क पर वेहोशी की हालत में पड़ा था। उसके मुंह से ढेर सारा पीला रंग का झाग […]

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मेरी आत्मग्लानि का प्रेरक दिन

किसी ने सच ही कहा है कि कोई उपर न होता-कोई नीचे न होता, अगर कोई मजबूर न होता तो कोई खुदा न होता। कल जनवरी माह का अंतिम दिन मेरे लिये आत्मग्लानि का दिन रहा। हालांकि मेरा हरसंभव प्रयास होता है हरेक चीजों से प्रेरणा लेने की। कल भले ही मेरी आत्मा पर चोट लगी हो, विश्वास चूर-चूर हुआ हो..एक नई दिशा अवश्य दे गई है। वेशक अब लोग प्रोफेशनल हो गये हैं। इस  प्रोफेशनल युग में आपको विश्वास ढूंढना बहुत मुश्किल है। आंखों के सामने साथ खड़ा या खड़ा होने के दावा करने वाला व्यक्ति कब फरेब कर जाता […]

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गणतंत्र दिवसः गण का तेजी से बदलता “तंत्र”

 लीजिये एक और गणतंत्र दिवस आ गया। विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश अपने भारत की इस महान राष्ट्रीय  दिवस की सभी को हार्दिक शुभकामनायें। इसके साथ ही याद आ जाता है स्कूली जीवन के वे दिन, जिसकी यादें आज के दौर में आंखे नम कर देती है। क्या वे दिन थे और आज क्या दिन है। वाकई समय के साथ सब कुछ बदल जाता है। सामने के दृश्य बदल जाते हैं। देखने का नजरिया भी बदल जाता है। यादें अस्सी के दशक के दिनों की है। मेरा बचपन  नालंदा जिले के एक सुदूरवर्ती  गांव में  बीता। प्रारंभिक पढ़ाई-लिखाई वहीं हुई। तब गांवों […]

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