‘न तू अंधा है, न अपाहिज है, न निकम्मा है तो फिर ऐसा क्यूं’?

-: मुकेश भारतीय :- इसको भाव शून्यता कहिये, चाहे कहिये निर्बलता, नाम कोई भी दे सकते हैं आप मेरी मजबूरी को। कि जंगल-जगल ढूंढ रहा हूं, मृग बनके कस्तूरी को, बड़ा मुश्किल है तय करना, खुद से खुद की दूरी को।। कभी मेरी द्वारा रचित-प्रकाशित कविता के उपरोक्त अंश आज फिर एक बार मन-मस्तिष्क को झकझोर रही है। हर तरफ इस तरह की माहौल बन गया है कि किसी के दुःख-दर्द को उकेरना भी बड़ा मुश्किल है। ऐसा इसलिये कि हम जिस वर्ग की बात करते हैं, वे वर्ग ही सर्वहारा है। उसमें कोई खुद अपनी लड़ाई लड़ने को सामने नहीं […]

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प्रेस क्लब रांची चुनावः कमजोर नींव पर बुलंद ईमारत बनाने के जुमले फेंकने लगे प्रत्याशी

रांची (मुकेश भारतीय)। संभवतः कल 27 दिसंबर को प्रेस क्लब रांची के चुनाव का वोटिंग होनी है। इसके लिये अध्यक्ष पद के 5, उपाध्यक्ष पद के 5, सचिव पद के 9, संयुक्त सचिव के 5, कोषाध्यक्ष पद के 5 और 10 सदस्यीय कार्यकारिणी पद के लिये कुल 39 प्रत्याशी  आपस में एक दूसरे से  खूब गुत्थमगुत्था करते नजर आ रहे हैं। यह चुनाव बतौर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सेवानिवृत जज विक्रमादित्य प्रसाद व उनकी टीम की देखरेख में काराई जा रही है। हालांकि ऐन चुनाव पूर्व सदस्यता अभियान में इनकी कहीं कोई भूमिका नहीं रही है। अगर होती तो तस्वीर कुछ और […]

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रांची के ऐसे पत्रकार संगठन के अध्यक्ष और अखबार के संपादक पर मुझे शर्म है

-: मुकेश भारतीय :- बनिया सिर्फ बनिया होता है। वह सब कुछ अपनी नफा-नुकसान के तराजू पर तौलता है। यदि हम रांची के पत्रकारों की बात करें तो प्रायः वे ऐसे ही बनिया नजर आते हैं। बात जब किसी संपादक-प्रकाशक-पत्रकार की हो तो उनकी बनियागिरी काफी स्पष्ट हो जाती है। आगे लिखने से पहले स्पष्ट कर दूं कि बनिया शब्द का आशय किसी जाति विशेष से नहीं है। बल्कि मूल सांकेतिक डंडीमार धंधे से है। जिसकी व्यापक पैमाने पर व्याख्या करने के साथ आत्म चिंतन-मंथन होनी चाहिये। बीते कल एक पत्रकार संगठन के अध्यक्ष और एक दैनिक अखबार के संपादक से मुलाकात-बात […]

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देखिये, शाहनवाज जैसे फ्रॉड का डंसा मौत से कैसे जुझ रहा एक पत्रकार

“जेजेए यानि झारखंड जर्नलिस्ट एशोसिएशन और उसके स्वंयभू अध्यक्ष यानि शाहनवाज हुसैन। एक ऐसा संगठन और एक ऐसा शख्स, जिसके बारे में समूचे झारखंड से मिल रही सूचनाएं काफी व्यथित करने वाली है।” राजनामा.कॉम (मुकेश भारतीय)। किसी भी संगठन या उसके स्वंयभूओं को जबरिया  मनमानी, शोषण और दमन करने की छूट नहीं दी जा सकती। खास कर उन्हें जो तत्थों से परे सिर्फ दुष्प्रचार के बल अपना स्वार्थ साधने वालों को तो बिल्कुल नहीं। शहनवाज के कहने पर कथित जेजेए संगठन के लोगों ने शोसल साइट के कई ग्रुपों पर राजनामा.कॉम और उसके संचालक को लेकर कई तरह की उटपुटांग बातें […]

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रघु’राज एक सचः सुशासन का दंभ और नकारा पुलिस तंत्र

रांची (मुकेश भारतीय)। झारखंड के सीएम रघुबर दास राज्य में सुशासन की बात करते हैं लेकिन क्या वाकई यहां कानून का भय कहीं दिखता है ? यदि उनके दो साल के राज खासकर हाल के दिनों की पड़ताल की जाये तो सब कुछ दलगत सत्ता-तंत्र से जुड़े लोगों तक ही सीमित नजर आता है। शासन- प्रशासन का निचला तबका हो या आम आदमी। वह गुंडों और अपराधियों की रहमोकरम पर अधिक निर्भर प्रतीत हो रहा है। आरटीसी इंजीनियरिंग कॉलेज की छात्रा के साथ राजधानी के भीतर जो कुछ जिस निर्दयता से हुआ, उसने निर्भया की बरसी पर एक कलंक बन गया। […]

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सड़क पर गजराज, समझिये इनके गुस्से

–: मुकेश भारतीय :– रांची।  भारतीय वेद, पुरान, रामायण, महाभारत आदि धार्मिक ग्रंथों में गजराज को मानव समुदाय से सीधा जोड़ा गया है। हिन्दू धर्म में कोई भी मांगलिक कार्य जयश्री गणेश यानि लंबोदर महाराज से ही होती है। लेकिन सांस्कारिक शुरुआत के अस्तिव पर ही प्रहार होने लगे तो परिणाम भयावह तो होगें हीं। झारखंड की प्रकृति और जीवन का मूल तत्व जल, जंगल और जमीन है। बढ़ती आबादी और औधोगिकीकरण ने पहले ही यहां की जमीने हड़प ली है। अब उनकी नजर पहाड़ और जंगल पर है। तेजी से जंगल काटे जा रहे हैं। विस्फोटों से पहाड़-पर्वत कांप रहे है। […]

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मीडिया के चतुर सयानों की सूचना को अब राज़नामा नहीं लेगी संज्ञान

इस साइट पर “वरिष्ठ संपादक हरिनारायण जी ने यूं उकेरी उषा मार्टिन एकेडमी के छात्र की पीड़ा  ”  शीर्षक से एक खबर प्रकाशित की थी। उस खबर पर रांची के एक पत्रकार ने अपनी पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर “हरिनारायण जी बताईये,  दैनिक आजाद सिपाही में क्यों नहीं छापी अपनी फेसबुक पीड़ा ? ” नामक ई-मेल की थी। लेकिन हम इस खबर को निम्न अपी के साथ हटा रहे हैं…….. हरिनारायण जी बताईये,  दैनिक आजाद सिपाही में क्यों नहीं छापी अपनी फेसबुक पीड़ा ?  शीर्षक से जुड़े समाचार को साइट से हटा दिया गया है क्योंकि, उसे एक ऐसी ई-मेल द्वारा प्राप्त […]

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