डमी मीडिया का समाजवाद

पत्रकार-सर हम ब्यूरो चीफ है। स्त्रैण आवाज में बोलते हुए ”सर हम आपकी पत्रिका से जुड़ना चाहते है।“ मैगजीन देखने के बाद और फिर आवाज को थोड़ा मजबूत करते हुए, ”आपकी मैगजीन में तो विज्ञापन दिख ही नहीं रहा। आप इस पत्रिका और अखबार को देखियें। यह अखबार तो चलता भी नहीं। इशारा करते हुए ”इस विज्ञापन को देखिये, ”यह 5 हजार का है“।  संचालक-अच्छा! ठीक है जुडि़ये। हमें साल में पचास हजार का बिजनेस चाहिये। और पत्रिका के लिये महीने में एक खबर। एक महीने बाद— पत्रकार संचालक से – ”सर एसपी चाहते है कि उनकी दो पेज की खबर […]

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कोई रास्ता दिखा दे…

ऐसी जगह बता दे, कोई रास्ता दिखा दे… जिस रास्ते पे चल कर, ये खिज़ा रशीद गुलशन… ये उदासियों का मौसम, ये बेबसी का तिलिस्म… ये इंतज़ार आलोदा शमाएँ, ये सियाह रंग रातें… ये कुफ्र काली सोचें… ये अगयार के ताने… ये तंज भरे लहजे… ये काट खाती नज़रें ये समुद्र सी जुदाइयाँ, मै ऊबर के अब जो आऊँ कोई ऐसी जगह बता दे, कोई रास्ता दिखा दे… ……. अवंतिका सेन की एक हृदयस्पर्शी  नज्म़

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आकर्षण का केन्द्रः बनी ममता बनर्जी की किताबें-पेंटिंग्‍स

पुस्तक मेले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा लिखी गईं किताबें आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। कविता और निबंध के रूप में लिखी गई उनकी पांच नई किताबों को ब्रिक्री के लिए रखा गया है। किताबों के अतिरिक्त ममता की पेंटिंग्स भी इस मेले का आकर्षण हैं। 1995 से लिखती आ रहीं ममता की अभी तक 40 पुस्‍तक आ चुकी हैं। एक पोलोके एक झोलोक और भाबनार साथी नामक पुस्तक लघु निबंधों और कविताओं के रूप में हैं। एक अन्य किताब शे नेई में उन लोगों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई है, जिन्हें ममता बनर्जी अपने जीवन में खो चुकी हैं। […]

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यमराज और स्वर्ग प्राप्ति के नये नियम

राज़नामा.कॉम। यमराज  अपने सिंहासन पर विराजमान हो,  उंघ रहे थे कि चिंतित चित्रगुप्त ने आकर उन्हे डिस्टर्ब कर दिया। यमराज बोले-  “चित्रगुप्त हमारी रानी की तरह तुम्हे भी क्या हमारा सुख देखना पसंद नही।” चित्रगुप्त ने सफ़ाई दी – “महाराज, दो आपात कालीन पत्र आये हैं एक स्वर्ग से दूसरा नर्क से।” यमराज ने पत्र सुनाने का इशारा किया। सो चित्रगुप्त ने पहला पत्र स्वर्गाधिपति इंद्र का पढ़ना शुरू किया- ” मेरे प्यारे मित्र यमराज, आपके रहते हुये स्वर्ग के साथ ऐसा अन्याय क्यों हो रहा है। आज कल कोई भी मनुष्य स्वर्ग नही भेजा जाता। अप्सरायें त्राही त्राही कर रही […]

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तितली का संघर्ष

एक बार एक आदमी को अपने बाग़ में टहलते हुए किसी टहनी से लटकता हुआ एक तितली का कोकून दिखाई पड़ा. अब हर रोज़ वो आदमी उसे देखने लगा , और एक दिन उसने ध्यान किया कि उस कोकून में एक छोटा सा छेद बन गया है. उस दिन वो वहीँ बैठ गया और घंटो उसे देखता रहा. उसने देखा की तितली उस खोल से बाहर निकलने की बहुत कोशिश कर रही है , पर बहुत देर तक प्रयास करने के बाद भी वो उस छेद से नहीं निकल पायी , और फिर वो बिलकुल शांत हो गयी मानो उसने हार […]

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मेरे पास सिद्धांत है और कोई सत्ता नहीं

राजनामा.कॉम के  लिए बरोदा के पुराना छात्र भुचुंग सोनम  की कविताः मेरे पास सिद्धांत है और कोई सत्ता नहीं  तुम्हारे पास सत्ता है और कोई सिद्धांत नहीं  तुम तुम हो  मै मै हूं  समझोते का सवाल ही नहीं  तो शुरू होने दो युद्ध  मेरे पास सत्य है और कोई ताकत नहीं  तुम्हारे पास ताकत है और कोई सत्य नहीं  तुम तुम हो  मै मै हूं समझोते का सवाल ही नहीं  तो शुरू होने दो युद्ध तुम कुचल सकते हो मेरा सर  मै लडूंगा  तुम कुचल सकते हो मेरी हड्डियों मै लडूंगा  जिन्दा दफना सकते हो मुझे  मै लडूंगा  अपनी नसों मे दोरते […]

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गांधी का चौथा बन्दर

गाँधी के तीनों बन्दर लम्बे समय से एक ही स्थिति में रहते हुए बहुत परेशान हो गये थे। एक दिन उन्होंने आपस में सलाह की कि अब हमें अपनी भूमिकायें बदल लेनी चाहिए। इसके फलस्वरूप जिस बन्दर ने अपना मुँह बन्द कर रखा था, उसने आँखें बन्द कर लीं, जिसने आँख बन्दें कर रखी थीं, उसने कान बन्द कर लिये और जिसने कान बन्द कर रखे थे, उसने अपना मुँह बन्द कर लिया। कुछ दिनों तक तीनों इसी स्थिति में रहे। फिर उन्हें लगा कि इससे तो किसी को कोई अन्तर नहीं पड़ा। यह तो वही बात हुई। तीनों पहले भी […]

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ब्राह्मण और बकरा

किसी गांव में मित्रशर्मा नामक एक ब्राह्मण रहता था। एक बार वह अपने यजमान से एक बकरा लेकर अपने घर जा रहा था। रास्ता लंबा और सुनसान था। आगे जाने पर रास्ते में उसे तीन ठग मिले। ब्राह्मण के कंधे पर बकरे को देखकर तीनों ने उसे हथियाने की योजना बनाई।  एक ने ब्राह्मण को रोककर कहा, “पंडित जी यह आप अपने कंधे पर क्या उठा कर ले जा रहे हैं। यह क्या अनर्थ कर रहे हैं? ब्राह्मण होकर कुत्ते को कंधों पर बैठा कर ले जा रहे हैं।”ब्राह्मण ने उसे झिड़कते हुए कहा, “अंधा हो गया है क्या? दिखाई नहीं […]

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दोहे में छुपे स्वास्थ्य मंत्र

1.जहाँ कहीं भी आपको,काँटा कोइ लग जाय। दूधी पीस लगाइये, काँटा बाहर आय।। 2.मिश्री कत्था तनिक सा,चूसें मुँह में डाल। मुँह में छाले हों अगर,दूर होंय तत्काल।। 3.पौदीना औ इलायची, लीजै दो-दो ग्राम। खायें उसे उबाल कर, उल्टी से आराम।। 4.छिलका लेंय इलायची,दो या तीन गिराम। सिर दर्द मुँह सूजना, लगा होय आराम।। 5.अण्डी पत्ता वृंत पर, चुना तनिक मिलाय। बार-बार तिल पर घिसे,तिल बाहर आ जाय।। 6.गाजर का रस पीजिये, आवश्कतानुसार। सभी जगह उपलब्ध यह,दूर करे अतिसार।। 7.खट्टा दामिड़ रस, दही,गाजर शाक पकाय। दूर करेगा अर्श को,जो भी इसको खाय।। 8.रस अनार की कली का,नाक बूँद दो डाल। खून बहे जो नाक […]

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जिद का सपना

एक व्यक्ति की जिद और उसका सपना  पूरे क्षेत्र का परिदृश्य बदल सकते हैं परिवेश बदल सकते हैं जिद देखने को अक्सर मिल जाती सपनों से वे अक्सर कंगाल होते है घर की जिद भी हवा बदल देती सपनों को तोड़ देती है जिद सपनो के लिए नहीं होती खुद सही साबित करने की ही होती है जिद करो तो एवेरेस्ट जैसी करो और फिर साथ हो सपना आसमानों सा अकेली जिद तो है ही बेमानी अकेला सपना कोई मायने नहीं रखता सपना देखो तो जिद के साथ देखो पूरा होना सपने की तब मजबूरी होगी सारी खुदाई जुट ही जायेगी […]

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