जिद का सपना

एक व्यक्ति की जिद और उसका सपना  पूरे क्षेत्र का परिदृश्य बदल सकते हैं परिवेश बदल सकते हैं जिद देखने को अक्सर मिल जाती सपनों से वे अक्सर कंगाल होते है घर की जिद भी हवा बदल देती सपनों को तोड़ देती है जिद सपनो के लिए नहीं होती खुद सही साबित करने की ही होती है जिद करो तो एवेरेस्ट जैसी करो और फिर साथ हो सपना आसमानों सा अकेली जिद तो है ही बेमानी अकेला सपना कोई मायने नहीं रखता सपना देखो तो जिद के साथ देखो पूरा होना सपने की तब मजबूरी होगी सारी खुदाई जुट ही जायेगी […]

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थैंक गॉड, मैं कलेक्टर हुआ न नेता

क्या कभी आपके मन में ये अफसोस हुआ है कि आप या आपके पति/पत्नी कलेक्टर क्यों न हुए? क्या आप या आपके बच्चे कलेक्टर बनने का सपना पाले हुए हैं? यदि हाँ, तो अफसोस भूल जाएं, और उस तुच्छ सपने को त्याग दें – अभी, तुरंत. आधुनिक भारत के दो प्रमुख, टॉप प्रोफ़ेशनों – कलेक्टरी और नेतागिरी के बीच अंतरंग संबंध की है ये बानगी ! पेश है (आमतौर पर होने वाले?) बेहद मनोरंजक वार्तालाप के मुख्य अंश जो एक अखबार में छपे: गुड्डू और भूरिया बोले- हमें समझा रहे हो कलेक्टर  रतलाम जिला सतर्कता समिति की बैठक में कलेक्टर के देरी […]

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लालच बुरी बला

कंचनपुर के एक धनी व्यापारी के रसोईघर में एक कबूतर ने घोंसला बनाया हुआ था। एक दिन एक लालची कौआ उधर आ निकला। वहां मछली को देखकर उसके मुंह में पानी भर आया। तब उसने सोचा, मुझे इस रसोईघर में घुसना चाहिए, पर कैसे? तभी उसकी निगाह कबूतर पर जा पड़ी। उसने सोचा कि यदि मैं कबूतर से दोस्ती कर लूं तो शायद बात बन जाए। कबूतर जब दाना चुगने बाहर निकला तो कौआ उसके साथ लग गया। थोड़ी ही देर में कबूतर ने जब पीछे मुड़कर देखा तो अपने पीछे कौए को पाया।  उसने पूछा- तुम मेरे पीछे क्यों लगे हो? […]

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पंचतंत्र की बातः चतुर बिल्ली

एक चिड़ा पेड़ पर घोंसला बनाकर मजे से रहता था। एक दिन वह दाना पानी के चक्कर में अच्छी फसल वाले खेत में पहुंच गया। वहां खाने पीने की मौज से बड़ा ही खुश हुआ। उस खुशी में रात को वह घर आना भी भूल गया और उसके दिन मजे में वहीं बीतने लगे। इधर शाम को एक खरगोश उस पेड़ के पास आया जहां चिड़े का घोंसला था। पेड़ जरा भी ऊंचा नहीं था। इसलिए खरगोश ने उस घोंसलें में झांक कर देखा तो पता चला कि यह घोंसला खाली पड़ा है। घोंसला अच्छा खासा बड़ा था इतना कि वह […]

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चोर तुम भी,चोर हम भी

चोर तुम भी,चोर हम भी,सिर्फ इतना फर्क है,  कल तलक सत्ता में थे तुम,आज हम पावर में हैं हम भी नंगे,तुम भी नंगे,रहते है हम्माम में, दिखावे की दुश्मनी है,दोस्त हम सब घर में है हम हो या तुम,नहीं कोई भी धुला है दूध का पोल एक दूसरे की,हमको तुमको है पता  सेकतें हैं,अपनी अपनी ,राजनेतिक रोटियां  चलानी है ,तुमको भी और हमको भी अपनी दुकां ये तुम्हारा ओपोजिशन ,बंद ये,हड़ताल ये, कैसे सत्ता करें काबिज,बस इसी चक्कर में है एक थैली के हैं चट्टे बट्टे,हम भी,आप भी, नौ सौ चूहे मार कर के बिल्ली है हज को चली कोयले की […]

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बाबा रामदेव को लेकर एक पंचतंत्र कथा

किसी वन में एक विशाल सरोवर था। उसमें तरह-तरह के जीव-जन्तु रहते थे। उन्हीं जन्तुओं में एक बगुला भी था। जवानी के दिनों में तो उसकी गर्दन में इतनी लोच, नजर में ऐसा पैनापन और चोंच में ऐसी पकड़ हुआ करती थी कि भूले-भटके भी कोई मछली उसके पास पहुँच जाती तो उसकी चोंच में दबकर उसके पेट की ओर सरक जाती थी। अब वह बूढ़ा हो चला था और हर तरफ से निढाल-सा हो चुका था। बस एक चीज बची हुई थी। यह थी उसकी चालाकी। अब इसी का भरोसा था। एक दिन वह सरोवर के किनारे बैठकर रोने लगा। […]

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डॉलर यूं ही अट्टहास करता रहेगा

सुना है जब देश आज़ाद हुआ  रुपया डॉलर पौंड का भाव समान था  फिर कौन सी गाज गिरी  क्यों रुपये की ये हालत हुयी  किस किस की जेब भरी  किसने क्या घोटाला किया  क्यों दाल भात को भी  सट्टे की भेंट चढा दिया  जब से कोमोडिटी मे डाला है  तभी से निकला दिवाला है  तभी मंहगाई आसमान छूती है  अब क्यों हाय हाय करते हो  क्यों रुपये की हालत पर हँसते हो  जो बोया था वो ही तो काटना होगा  बबूल के पेड पर आम नही उगा करते  यूँ ही देश आत्मनिर्भर नही बना करते  जब तक ना सच्चाई का बोलबाला […]

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